'जगत के पालक दीनानाथ' छठ गीत बना श्रद्धालुओं की पहली पसंद
लोक आस्था के महापर्व छठ की शुरुआत होते ही भक्ति गीतों की गूंज हर तरफ सुनाई देने लगती है. इसी बीच मशहूर लोक गायिका कल्पना पटोवारी का नया छठ गीत ‘जगत के पालक दीनानाथ’ श्रद्धालुओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है. यह गीत छठ महापर्व की आध्यात्मिक भावना को बेहद खूबसूरती से प्रस्तुत करता है और सुनने वालों को भक्ति रस में डुबो देता है.
कल्पना पटोवारी की आवाज ने बढ़ाया आकर्षण
भोजपुरी और लोक संगीत की दुनिया में अपनी अलग पहचान बना चुकीं कल्पना पटोवारी ने इस गीत को बेहद भावपूर्ण अंदाज में गाया है. उनकी मधुर आवाज गीत के हर शब्द को जीवंत बना देती है. गीत में सूर्य देव की महिमा का वर्णन है और उनसे सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना की गई है.
बोल में दिखती है छठ की गहरी आस्था
‘जगत के पालक दीनानाथ’ के बोल सीधे भक्तों के दिल तक पहुंचते हैं. इस गीत में छठ व्रतियों की श्रद्धा, समर्पण और भगवान भास्कर के प्रति अटूट विश्वास को दर्शाया गया है. गीत सुनते समय ऐसा महसूस होता है जैसे कोई श्रद्धालु खुद सूर्य देव से अपनी मनोकामनाएं व्यक्त कर रहा हो.
संगीत और प्रस्तुति बनाते हैं खास
इस छठ गीत का संगीत पारंपरिक लोक धुनों से सजा हुआ है, जो इसकी खूबसूरती को और बढ़ा देता है. संगीत संयोजन में भक्ति और लोक संस्कृति का संतुलन साफ दिखाई देता है. यही वजह है कि यह गीत सिर्फ सुनने में ही नहीं बल्कि महसूस करने में भी बेहद खास लगता है.
वीडियो में दिखाई गई छठ की भव्यता
गीत का वीडियो भी बेहद आकर्षक है. इसमें छठ घाटों की रौनक, व्रतियों की श्रद्धा, डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य देने की झलक और पारंपरिक पूजा-पाठ के दृश्य देखने को मिलते हैं. वीडियो दर्शकों को छठ महापर्व की वास्तविक अनुभूति कराता है.
नई पीढ़ी को संस्कृति से जोड़ने की कोशिश
आज के दौर में ऐसे गीतों का महत्व और बढ़ जाता है, क्योंकि ये हमारी लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का काम करते हैं. ‘जगत के पालक दीनानाथ’ भी उसी कड़ी का एक मजबूत उदाहरण है, जो छठ के महत्व और उसकी पवित्रता को संगीत के माध्यम से लोगों तक पहुंचाता है.
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छठ प्लेलिस्ट के लिए बेहतरीन गीत
अगर आप इस छठ पर्व पर भक्ति और श्रद्धा से भरपूर गीतों की तलाश कर रहे हैं तो कल्पना पटोवारी का ‘जगत के पालक दीनानाथ’ आपकी प्लेलिस्ट में जरूर होना चाहिए. यह गीत न सिर्फ छठ की महिमा का गुणगान करता है बल्कि श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ऊर्जा से भी भर देता है. छठ के पावन अवसर पर यह गीत आस्था, संस्कृति और संगीत का शानदार संगम बनकर सामने आया है.
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-भारत एक्सप्रेस
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