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इंजीनियर राशिद टेरर फंडिंग मामला; दिल्ली हाईकोर्ट ने जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा

दिल्ली हाईकोर्ट ने बारामूला सांसद राशिद इंजीनियर की जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है. NIA ने गवाहों को प्रभावित करने का गंभीर आरोप लगाया है.

Rashid Engineer

दिल्ली हाईकोर्ट ने जम्मू-कश्मीर टेरर फंडिंग मामले में आरोपी और बारामूला से लोकसभा सांसद राशिद इंजीनियर (इंजीनियर राशिद) की ओर से दायर जमानत याचिका पर सभी पक्षों की लंबी जिरह सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है. टेरर फंडिंग के इस मामले में राशिद इंजीनियर पिछले करीब सात साल से जेल में बंद हैं.

सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलें

राशिद इंजीनियर का पक्ष: सुनवाई के दौरान राशिद इंजीनियर की पैरवी कर रहे वकील ने सुप्रीम कोर्ट के एक पुराने आदेश का हवाला देते हुए उन्हें जमानत दिए जाने की मांग की.

एनआईए (NIA) का कड़ा विरोध: राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) ने राशिद इंजीनियर की जमानत याचिका का पुरजोर विरोध किया है. एजेंसी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा ने कोर्ट को बताया कि राशिद के खिलाफ एनआईए के पास पर्याप्त और पुख्ता सबूत मौजूद हैं.

एनआईए ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जब पहले राशिद को जमानत दी गई थी, उस दौरान उन्होंने कॉल डिटेल्स से सामने आए साक्ष्यों के आधार पर एक गवाह को प्रभावित करने की कोशिश की थी. एजेंसी का तर्क है कि उनके खिलाफ आरोप बेहद गंभीर हैं, इसलिए उन्हें जमानत न दी जाए.

मामले की पृष्ठभूमि और चुनाव जीत

राशिद इंजीनियर वर्ष 2019 से दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद हैं. उन्होंने जेल में रहते हुए 2024 का लोकसभा चुनाव लड़ा था और उत्तर कश्मीर की बारामूला सीट से नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला को दो लाख से अधिक वोटों के भारी अंतर से हराया था.

अन्य आरोपी और चार्जशीट से जुड़े तथ्य

पटियाला हाउस कोर्ट ने 16 मार्च 2022 को हाफिज़ सईद, सैयद सलाहुद्दीन, यासीन मलिक, शब्बीर शाह, मसरत आलम, राशिद इंजीनियर, जहूर अहमद वताली, बिट्टा कराटे और आफताब बट्ट उर्फ पीर सैफुल्ला समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया था.

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एनआईए के अनुसार, पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के सहयोग से लश्कर-ए-तैयबा, हिजबुल मुजाहिदीन, जेकेएलएफ (JKLF) और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकवादी संगठनों ने जम्मू-कश्मीर में आम नागरिकों और सुरक्षा बलों पर हमलों व हिंसा को अंजाम दिया था. वर्ष 1993 में अलगाववादी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए ‘ऑल पार्टी हुर्रियत कॉन्फ्रेंस’ की स्थापना की गई थी.



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