CM Yogi
उत्तर प्रदेश की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को दुनिया के सामने नई पहचान दिलाने में अयोध्या का दीपोत्सव लगातार अहम भूमिका निभा रहा है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में प्रदेश की डबल इंजन सरकार ने अयोध्या की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को नया गौरव दिलाया है. अब यहां होने वाला दीपोत्सव केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं रह गया है, बल्कि यह भारत की परंपराओं और संस्कृति को दुनिया तक पहुंचाने का बड़ा माध्यम बन चुका है.
मुख्यमंत्री योगी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी बात रखते हुए कहा कि अयोध्या का दीपोत्सव आज भारत और दूसरे देशों के बीच सांस्कृतिक जुड़ाव का एक मजबूत माध्यम बन गया है. इस आयोजन में श्रीलंका, दक्षिण अफ्रीका, इंडोनेशिया और थाईलैंड जैसे देशों के कलाकार भी हिस्सा लेते हैं. खास बात यह है कि अलग-अलग देशों के कलाकार अपनी भाषा, पहनावे और पारंपरिक कलाओं के जरिए भगवान श्रीराम की कथा को मंच पर प्रस्तुत करते हैं.
योगी आदित्यनाथ के मुताबिक, अलग-अलग संस्कृतियों और परंपराओं के बावजूद रामकथा सभी को एक सूत्र में जोड़ती है. यही वजह है कि अयोध्या का दीपोत्सव अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी अलग पहचान बना रहा है.
आधुनिक तकनीक से और खास होगा अयोध्या का दीपोत्सव
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि इस बार आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से दीपोत्सव को और आकर्षक बनाया जा रहा है. इसका उद्देश्य केवल आयोजन की भव्यता बढ़ाना नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना भी है. परंपरागत दीपों की रोशनी के साथ आधुनिक तकनीक का मेल इस आयोजन को एक नया रूप दे रहा है.
दीपोत्सव-2026 के तहत 7 नवंबर को अयोध्या की राम की पैड़ी पर भव्य कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा. उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग की योजना के मुताबिक, इस दौरान मल्टीमीडिया प्रोजेक्शन, लेजर शो और रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देखने को मिलेंगी. कार्यक्रम में 100 से अधिक कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे.
राम के अयोध्या लौटने की कहानी दिखाएंगे कलाकार
इस बार के आयोजन की खास बात यह होगी कि भगवान श्रीराम के अयोध्या आगमन की पूरी कथा को अलग-अलग कलाओं के माध्यम से दर्शकों के सामने पेश किया जाएगा. इसके लिए नृत्य, संगीत, कहानी, वॉयस ओवर और रोशनी के विशेष प्रभावों का इस्तेमाल किया जाएगा.
कार्यक्रम में शामिल होने वाले 100 से अधिक भारतीय लोक और शास्त्रीय कलाकारों की वेशभूषा भी दीपोत्सव की थीम के अनुरूप होगी. हिंदी में तैयार की गई पटकथा को मंच पर प्रभावशाली अंदाज में प्रस्तुत किया जाएगा. इसके लिए प्रसिद्ध या राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त क्रिएटिव डायरेक्टर अथवा स्क्रिप्ट राइटर के निर्देशन की व्यवस्था की जाएगी.
योजना है कि दर्शकों को ऐसा अनुभव मिले, जिसमें उन्हें सिर्फ एक सांस्कृतिक कार्यक्रम देखने का मौका न मिले, बल्कि ऐसा महसूस हो जैसे वे खुद श्रीराम के अयोध्या लौटने की ऐतिहासिक कथा का हिस्सा हों.
सपा पर निशाना साधते हुए योगी ने कही परिवार वाली बात
दीपोत्सव की चर्चा के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी पर भी निशाना साधा. उन्होंने अपने पोस्ट में कहा कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश की सत्ता में रहे लोगों की सांस्कृतिक सोच सैफई महोत्सव और अपने परिवार के वैभव को दिखाने तक सीमित थी. उनके अनुसार, उस दौर में अयोध्या की ऐतिहासिक और धार्मिक विरासत को वह महत्व नहीं दिया गया, जिसकी वह हकदार थी.
मुख्यमंत्री ने अपनी बात रखते हुए कहा, ”उनके लिए परिवार ही प्रदेश था, हमारे लिए पूरा प्रदेश ही परिवार है.” उन्होंने इस सोच को मौजूदा सरकार की कार्यशैली से जोड़ते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में अयोध्या की सांस्कृतिक पहचान को फिर से स्थापित करने का काम किया गया है.
योगी आदित्यनाथ ने यह भी स्पष्ट किया कि आज का दीपोत्सव करोड़ों रामभक्तों की आस्था, भारतीय संस्कृति और आधुनिक तकनीक का अनूठा संगम है.
अयोध्या में हर साल होने वाला दीपोत्सव अब धीरे-धीरे अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक आयोजन का रूप लेता जा रहा है. इसमें देश-विदेश के कलाकारों की भागीदारी से भारत की परंपराओं को वैश्विक मंच मिल रहा है. वहीं, राम की पैड़ी पर होने वाले लेजर शो, मल्टीमीडिया प्रोजेक्शन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां इस आयोजन को और यादगार बनाने की तैयारी में हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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