दिल्ली पुलिस के एसीपी मनस्वी वशिष्ठ और अन्य पुलिसकर्मियों द्वारा वकीलों को कथित तौर पर धमकी देने व सार्वजनिक रूप से बदनाम करने के मामले में दायर याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट 6 नवंबर को सुनवाई करेगा. मुख्य न्यायाधीश नितिन वासुदेव साम्ब्रे की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष इस मामले की जल्द सुनवाई की मांग को लेकर मेंशन किया गया था, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया है.
याचिका से जुड़े मुख्य बिंदु और मांगें
यह याचिका करण बीर सिंह द्वारा दायर की गई है. दायर याचिका में वकीलों को AK-47 से धमकाने और ‘काली कोट के गुंडे’ कहे जाने के मामले में निलंबित एसीपी मनस्वी वशिष्ठ के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने तथा वकीलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की गई है.
इससे पहले हाईकोर्ट ने वकीलों की मौखिक मांग पर स्वतः संज्ञान लेने से इनकार कर दिया था और वकीलों को उचित याचिका दायर करने को कहा था. कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया था कि याचिका की एक कॉपी दिल्ली पुलिस के स्टैंडिंग काउंसिल को दी जाए और भरोसा दिलाया था कि अदालत इस मामले को देखेगी.
सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी एक अन्य याचिका वकील नरेंद्र मिश्रा द्वारा दायर की गई है, जिसमें संबंधित एसीपी को बर्खास्त करने की मांग की गई है.
विवाद की पृष्ठभूमि
यह पूरा विवाद शाहदरा पुलिस थाने में पुलिस और वकीलों के बीच हुई झड़प के बाद सामने आया था. इस घटना के बाद एसीपी मनस्वी वशिष्ठ और तत्कालीन एसएचओ इंस्पेक्टर अरुण कुमार का ट्रांसफर कर दिया गया था.
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इसी तबादले से नाराज होकर करीब 150 पुलिसकर्मी (जिसमें महिला पुलिसकर्मी और एसीपी मनस्वी वशिष्ठ भी शामिल थे) पुलिस मुख्यालय के बाहर जमा हुए थे और विरोध प्रदर्शन किया था. उनकी मांग थी कि दोनों अधिकारियों को उनकी पुरानी तैनाती पर वापस भेजा जाए.
कथित वीडियो और धमकियां
वकीलों का आरोप है कि इस दौरान सामने आए एक वीडियो में एसीपी मनस्वी वशिष्ठ ने वकीलों के लिए आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया और AK-47 का जिक्र करते हुए धमकी दी. राजधानी दिल्ली के इतिहास में यह दूसरा मौका है जब पुलिसकर्मी सड़क पर उतरकर इस तरह विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं.
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