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NEET PG 2027: नीट पीजी 2027 की प्रवेश प्रक्रिया में एक बड़ा बदलाव किया गया है, जिसके तहत अब मेडिकल कोर्सेज में दाखिला पर्सेंटाइल के बजाय ऑल इंडिया रैंक (AIR) के आधार पर सुनिश्चित किया जाएगा. इस नए बदलाव से देश भर की लगभग 86,000 सीटों पर होने वाली काउंसलिंग और एडमिशन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और समयबद्ध बनेगी.
NEET PG 2027 में लागू किया गया यह नया रैंक-बेस्ड मेरिट सिस्टम मेडिकल पोस्ट-ग्रेजुएट्स के चयन को अधिक स्पष्ट, पारदर्शी और सुव्यवस्थित बनाएगा, जिससे पूरी प्रवेश प्रक्रिया में होने वाली देरी से राहत मिलेगी.
नीट पीजी एडमिशन प्रक्रिया में ऐतिहासिक बदलाव
एमडी (MD), एमएस (MS) और पीजी डिप्लोमा कोर्सेज के लिए होने वाली NEET-PG 2027 की परीक्षा के नियमों में नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेस (NBEMS) द्वारा महत्वपूर्ण फेरबदल किए गए हैं. इसके तहत अब एडमिशन के लिए पुराना पर्सेंटाइल सिस्टम पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया है और इसकी जगह रैंक-बेस्ड मेरिट लिस्ट तैयार की जाएगी.
ऑल इंडिया रैंक से तय होंगे दाखिले
एमबीबीएस (NEET-UG) की तर्ज पर अब नीट-पीजी में भी हर छात्र को उसकी परीक्षा में प्राप्त अंकों के आधार पर ऑल इंडिया रैंक (AIR) दी जाएगी. उच्चतम अंक प्राप्त करने वाले उम्मीदवार को ऑल इंडिया रैंक 1 से सम्मानित किया जाएगा. अधिकारियों का मानना है कि पहले पर्सेंटाइल आधारित क्राइटेरिया के कारण काउंसलिंग में लंबा वक्त लगता था और कई सीटें खाली रह जाती थीं, लेकिन अब इस नई व्यवस्था से काउंसलिंग समय पर पूरी होगी और अकादमिक सत्र भी देरी से नहीं शुरू होंगे.
काउंसलिंग और सीट आवंटन का नया स्वरूप
सेंट्रल और स्टेट लेवल पर काउंसलिंग की प्रक्रिया अपने पुराने पैटर्न पर ही आयोजित होगी, लेकिन सिस्टम पूरी तरह बदल जाएगा. रिजल्ट स्कोरकार्ड में पर्सेंटाइल की जगह सिर्फ ऑल इंडिया रैंक दर्ज होगी और सीटों का आवंटन पूरी तरह इसी मेरिट रैंक के आधार पर किया जाएगा. हालांकि, बहुत कम या नकारात्मक अंक पाने वाले उम्मीदवारों को दाखिला नहीं मिलेगा. पिछले वर्षों में सीटें खाली रहने पर पर्सेंटाइल को शून्य या माइनस तक घटाना पड़ता था, जिससे अब पूरी तरह छुटकारा मिल जाएगा.
पर्सेंटाइल और रैंकिंग सिस्टम का अंतर
पर्सेंटाइल और रैंकिंग प्रणाली दोनों एक-दूसरे से पूरी तरह अलग हैं. पर्सेंटाइल यह बताता है कि आपने परीक्षा में कितने प्रतिशत अन्य उम्मीदवारों से बेहतर प्रदर्शन किया है, जबकि रैंकिंग सिस्टम में हर छात्र को उसके सटीक अंकों के आधार पर 1 से लेकर अंतिम क्रम तक एक निश्चित रैंक दी जाती है. एक समान अंक आने की स्थिति में टाई-ब्रेकिंग नियमों का पालन किया जाता है और इसी रैंक के आधार पर छात्रों को उनकी पसंद के कॉलेज और स्पेशलाइजेशन अलॉट किए जाते हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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