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अदालत में झूठ बोलना पड़ा भारी! दिल्ली हाईकोर्ट का 6 CBI अधिकारियों पर शिकंजा, केस दर्ज करने के आदेश

Delhi High Court: पूर्व IRS अधिकारी अशोक अग्रवाल मामले में अदालत के सामने झूठे बयान देने वाले छह CBI अधिकारियों पर गाज गिरी है. हाईकोर्ट ने मजिस्ट्रेट को शिकायत दर्ज करने का निर्देश दिया है.

Delhi High Court
Edited by Shubhra Rai

Delhi High Court: दिल्ली हाई कोर्ट ने पूर्व आईआरएस अधिकारी अशोक कुमार अग्रवाल से जुड़े मामले में सीबीआई के 6 अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही को लेकर दिए गए अपने ही आदेश पर रोक लगा दिया है. जस्टिस मधु जैन ने सीबीआई अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही का आदेश दिया था. जिसपर जस्टिस मिनी पुष्करणा ने रोक लगाते हुए कहा कि यह निर्देश फिलहाल स्थगित रहेगा. कोर्ट 4 फरवरी 2027 को मामले में अगली सुनवाई करेगा.

पूर्व IRS अधिकारी मामले में झूठे बयान देने पर फंसे CBI अधिकारी

इन अधिकारियों पर आरोप था कि उन्होंने एक मामले में पूर्व आईआरएस अधिकारी अशोक अग्रवाल को आरोपमुक्त किए जाने को चुनौती देते समय सरकार के साथ हुए पत्राचार के बारे में अदालत के सामने झूठे बयान दिए थे. इससे पहले कोर्ट ने माना था कि इन अधिकारियों द्वारा अदालत के समक्ष दिए गए बयानों को लेकर प्रथम दृष्टया गंभीर आपत्तियां है और उनके खिलाफ झूठे साक्ष्य तथा अदालत में गलत दावा करने से जुड़े अपराधों का आधार बनता है. जस्टिस मधु जैन ने अशोक अग्रवाल की याचिका को स्वीकर करते हुए संबंधित स्पेशल जज को निर्देश दिया था.

इन छह CBI अधिकारियों पर चलेगा मामला

सीबीआई अधिकारियों सुशील दीवान, विनीत विनायक, अमित कुमार, रमन त्यागी, प्रेम कुमार गौतम और मोहम्मद आजाद के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कर संबंधित मजिस्ट्रेट को चार सप्ताह के भीतर भेजने का निर्देश दिया था. अदालत ने कहा था, कि भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 91 (झूठी गवाही देना), 193 (झूठी गवाही देने या गढ़ने के लिए दंड) और 209 (अदालत में धोखाधड़ी या बेईमानी से झूठा दावा के लिए दंड) के तहत इन अधिकारियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों में उचित आधार है. यह मामला आईआरएस अधिकारी अशोक कुमार अग्रवाल के खिलाफ सीबीआई की उस जांच से जुड़ा है, जिसमें उन पर आय से अधिक संपत्ति रखने का आरोप था.

क्या है पूरा मामला? जानिए कैसे कानून मंत्रालय के पत्राचार पर अदालत से छिपाई गई थी असल बात

जनवरी 2016 में दिल्ली हाई कोर्ट ने उनके खिलाफ अभियोजन की मंजूरी को अमान्य करार दिया था. इसके बाद अशोक अग्रवाल को मामले में डिस्चार्ज कर दिया गया था. इसके बाद अशोक अग्रवाल ने जब्त दस्तावेजों को वापस मांगने के लिए याचिका दायर की. सीबीआई ने 2 अगस्त 2016 को जवाब दाखिल करते हुए कहा था, कि कानून और न्याय मंत्रालय/प्रशासनिक मंत्रालय के साथ आगे की कानूनी कार्रवाई पर बातचीत जारी है. जबकि कानून मंत्रालय ने पहले ही 8 जून 2016 को इस संबंध में अपनी राय दे चुका था कि सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का कोई ठोस आधार नहीं है. किसी तरह की कोई बातचीत लंबित नही थी, बल्कि सिर्फ आंतरिक विचार-विमर्श चल रहा था.

लोअर कोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद हाईकोर्ट पहुंचा मामला

अशोक अग्रवाल ने धारा 340 सीआरपीसी के तहत गलत हलफनामा/झूठा बयान देने के लिए सीबीआई अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर निचली अदालत का रुख किया था, लेकिन निचली अदालत ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया. जिसके बाद यह मामला हाई कोर्ट पहुचा है, जिसपर कोर्ट सुनवाई कर रहा है.

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-भारत एक्सप्रेस



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