आनंद विहार रेलवे स्टेशन का ये है हाल
Anand Vihar Railway Station: दिल्ली के आनंद विहार रेलवे स्टेशन पर इन दिनों पैर रखने की जगह नहीं है. हर तरफ सिर्फ और सिर्फ लोगों का ऐसा सैलाब है. सभी लोग जल्द से जल्द अपने घर पहुंचना चाहते हैं. और बात जब छठ महापर्व की हो, तो घर जाने की इस चाहत के आगे रेलवे की लंबी कतारें, धक्के और हर मुश्किल छोटी पड़ जाती है. आनंद विहार पर इस वक्त बिहार और उत्तर प्रदेश जाने वाले मुसाफिरों का जो हुजूम उमड़ा है. लोग घर जाने के लिए किसी भी हद तक गुजरने के लिए बेताब हैं.
आनंद विहार स्टेशन के चप्पे-चप्पे पर ऐसे चेहरे आसानी से दिख जाएंगे जो पिछले दो से तीन महीनों से लगातार अपनी यात्रा का जुगाड़ बिठाने में लगे थे. कोई मोबाइल पर ऐप्स रिफ्रेश कर रहा था, तो कोई खिड़की पर धक्के खा रहा था, लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला. उनके पास ट्रेन में रिजर्वेशन का ना तो टिकट है और ना ही जगह.
मोतिहारी जाने वाले एक व्यक्ति अपनी पत्नी और दो साल के मासूम बच्चे के साथ स्टेशन पर नजर आए. दिल्ली में नौकरी करने वाले इन साहब ने बताया कि पिछले तीन महीने से उन्होंने दर्जनों ट्रेनों में टिकट बुक कराने की कोशिश की, लेकिन हर बार स्क्रीन पर ‘वेटिंग’ का लाल निशान ही हाथ लगा. जब महीनों की कोशिश के बाद भी कन्फर्म सीट नसीब नहीं हुई, तो अब परिवार के साथ जनरल डिब्बे में धक्के खाकर सफर करना उनकी मजबूरी बन चुका है.
दिल्ली: शाहदरा रेलवे स्टेशन ट्रैफिक डीसीपी श्वेता सिंह चौहान ने ट्रैफिक पुलिस द्वारा की गई ट्रैफिक व्यवस्था पर कहा, “आने वाले फेस्टिवल सीजन में हमारे दो बड़े फेस्टिवल्स आ रहे हैं, दीपावली और छठ पूजा, इसको देखते हुए हाई फुटफॉल एरियाज़ जैसे कि शाहदरा रेलवे स्टेशन, आनंद विहार रेलवे स्टेशन, आनंद विहार ISBT और मार्केट एरियाज़ में ट्रैफिक की एक विस्तृत यातायात प्रबंधन योजना निकाली गई है…”
— IANS Hindi (@IANSKhabar) November 4, 2026
हर बार वेबसाइट दे देती है धोखा
आनंद विहार की इस भीड़ में हर यात्री की अपनी एक दास्तान है. मोतिहारी के ही रहने वाले तीन दोस्तों का ग्रुप भी इसी जद्दोजहद में फंसा था. पिछले दो महीनों से वे लगातार टिकट बुक करने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन उनका आरोप है कि रेलवे की वेबसाइट अक्सर हैंग हो जाती है या ठीक से काम ही नहीं करती. ऐन वक्त पर सर्वर डाउन होने की वजह से उनके हाथ से टिकट निकल गया. अब उनके पास भी जनरल टिकट लेकर किसी तरह घर की राह पकड़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है.
यही हाल एक महिला यात्री का भी था, जिन्होंने बताया कि उन्होंने तमाम जतन किए, लेकिन कंफर्मेशन का मैसेज कभी नहीं आया. वहीं कुछ मुसाफिर ऐसे भी थे जिन्हें किसी पारिवारिक आपात स्थिति या अचानक उपजे हालात के कारण बिना किसी पूर्व तैयारी के बिहार के लिए निकलना पड़ गया. छोटे-छोटे बच्चों की उंगलियां थामे ये लोग जनरल बोगी की उस भीड़भाड़ और धक्के-मुक्की को पार करने की चिंता में डूबे दिखे, जहां पैर रखने की भी जगह मिलना किसी जंग जीतने जैसा होता है.
रेलवे स्टेशन पर पांव रखने की नहीं है जगह
यात्रियों की इस भीड़ को संभालने के लिए रेलवे प्रशासन ने भी आनंद विहार स्टेशन पर अपनी तरफ से कोई कसर नहीं छोड़ी है. जनरल टिकट लेने वाले यात्रियों के लिए अलग से विशेष काउंटर बनाए गए हैं ताकि लंबी लाइनों से राहत मिल सके. स्टेशन परिसर में जगह-जगह पीने के पानी के स्टॉल और मेडिकल सहायता के कैंप लगाए गए हैं ताकि किसी की तबीयत बिगड़ने पर तुरंत मदद मिल सके.
भीड़ को नियंत्रित करने और भगदड़ जैसी किसी भी अनहोनी से बचने के लिए प्लेटफॉर्म पर एंट्री के नियमों को बेहद कड़क कर दिया गया है. केवल उन्हीं मुसाफिरों को अंदर जाने दिया जा रहा है जिनके पास वैध टिकट है. बिना टिकट वाले किसी भी शख्स या यात्रियों को छोड़ने आने वाले परिजनों को प्लेटफॉर्म पर पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है.
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प्रशासन के ये इंतजाम अपनी जगह दुरुस्त हो सकते हैं, लेकिन सच यह है कि महकमे की ये व्यवस्थाएं सिर्फ स्टेशन के गेट तक ही राहत दे पाती हैं. असली अग्निपरीक्षा तो तब शुरू होती है जब ट्रेन प्लेटफॉर्म पर आकर रुकती है और उसमें पैर रखने के लिए संघर्ष करना पड़ता है.
-भारत एक्सप्रेस
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