शादियों का सीजन चल रहा है साथ ही नवंबर के इस महीने में आप लोगों के पास भी कई सारे शादी के निमंत्रण आ चुके होगें. इस बीच शादी की एक ऐसी खबर आई, जिसने सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है.
ये शादी अंबिकापुर में हुई, जहां दूल्हा-दुल्हन कोई नौजवान नहीं बल्कि बुजुर्ग है. खास बात ये है कि इस शादी में परपोते को सहबाला बनाया गया.
दरअसल, शहर के ब्रम्ह रोड के निवासी 82 वर्षीय बलदेव प्रसाद सोनी और 77 वर्षीय उनकी पत्नी बेचनी देवी ने अपनी 65वीं वैवाहिक वर्षगांठ पर एक बार फिर शादी रचाई. इस अनोखे और भावनाओं से भरे शादी को पूरे रस्मों रिवाजों के साथ संपन्न कराया गया.
क्या है पूरी कहानी?
दंपत्ति के बड़े बेटे और छोटे बेटे ने बताया की बड़े होने पर उन्हें पता चला कि उनके माता पिता की शादी बहुत ही कम उम्र में ही हो गई थी. इसको लेकर अक्सर दंपत्ती को बात करते थे कि छोटी उम्र और आर्थिक तौर पर संपन्न न होने के कारण उनके शादी के शौक पूरे नहीं हो पाए.
इस कारण बेटों ने अपने माता-पिता के 65वें सालगिरह का आयोजन कर एक बार फिर से शादी करवाने का निर्णय लिया.
पूरी रस्मों-रिवाजों के साथ हुई शादी
माता-पिता की शादी के इस आयोजन में बेटों ने हर एक रस्म का ध्यान रखा. बकायदा हल्दी की रस्म हुई, रिश्तेदारों को बुलाया गया, मंडप सजा, ढोल-नगाड़ों के साथ बारात गई. इसके बाद वैवाहिक कार्यक्रम को एक बड़े होटल में संपन्न किया गया. इसमें 82 साल के दूल्हे और 77 साल की दुल्हन ने हाथों में लाठी लेकर एक दूसरे को वरमाला पहनाई.
वहीं दोनों बेटों की पत्नियों बसंती और उर्मिला के साथ दोनों दामाद शिवशंकर और अशोक ने इस आयोजन में अपना पूरा सहयोग दिया
परपोता बना सहबाला
इस शादी की खास बात ये है कि इसमें परपोते को सहबाला बनाया गया. आमतौर पर शादी में अक्सर छोटे भाई या भतीजे को सहबाला बनाया जाता है, लेकिन इस शादी में उनका परपोता अपने परदादा दूल्हा और परदादी दुल्हन के साथ बैठा था. ये सौभाग्य मिल पाना खुद में खास है, जिसने इस शादी को और भी ज्यादा यादगार बना दिया.
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-भारत एक्सप्रेस
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