Bharat Express DD Free Dish

‘नेत्रों ने नेत्रों से की बात…’, सिद्धपीठ दक्षिण काली मंदिर में मिले जब दो दिग्गज संत, साधना देखकर पिघला दिल

सिद्धपीठ दक्षिण काली मंदिर में आचार्य प्रमोद कृष्णम् और स्वामी कैलाशानंद गिरी की आत्मीय मुलाकात चर्चा का विषय बनी. स्वामी कैलाशानंद की कठोर साधना देखकर आचार्य प्रमोद कृष्णम् भावुक हो गए..

Acharya Pramod Krishnam

प्रसिद्ध सिद्धपीठ दक्षिण काली मंदिर परिसर में आज एक ऐसा अलौकिक, भावुक और रूह को छू लेने वाला आध्यात्मिक दृश्य देखने को मिला, जिसने वहां मौजूद हर श्रद्धालु की आंखों को नम कर दिया. श्री कल्कि पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम् जी महाराज ने परमपूज्य आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी जी महाराज के दर्शन किए और उनकी कठोर साधना के साक्षी बने.

गुरुदेव की निश्चल तपस्या और साधना के दौरान उनके चेहरे पर झलक रही अदृश्य पीड़ा को देखकर आचार्य प्रमोद कृष्णम महाराज अपने आंसुओं को रोक न सके और बेहद भावुक नजर आए. ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो वे गुरुदेव की उस विकराल तपस्या और भीतर की वेदना को स्वयं अपने हृदय में गहराई तक महसूस कर रहे हों.

नेत्रों से नेत्रों ने कही दिल की बात

मंदिर परिसर में जब सनातन परंपरा के ये दो बड़े संत आमने-सामने आए, तो वहां एक अजीब सा सन्नाटा और अपार शांति छा गई. दोनों संतों के बीच शब्द बहुत कम थे, लेकिन भावनाओं का समंदर उफान पर था. वहां उपस्थित लोगों ने देखा कि कैसे दो साधकों के बीच बिना एक शब्द बोले ‘नेत्रों से नेत्रों की बात’ हो रही थी. आंखों में अपार वात्सल्य, करुणा और भावनाएं तैर रही थीं, जबकि चेहरों पर एक सहज, सौम्य और शांत मुस्कुराहट बिखरी हुई थी.

उस मौन और अलौकिक संवाद में संतत्व की वह अगाध गहराई साफ दिखाई दे रही थी, जो आम इंसान की समझ से परे है. यह केवल दो महान संतों की साधारण औपचारिक मुलाकात नहीं थी, बल्कि सनातन धर्म के दो शीर्ष साधकों का आत्मीय और रूहानी मिलन था-जहां शब्दों की मर्यादा छोटी पड़ गई और केवल भाव स्वयं बोलते नजर आए.

साधना देखकर नतमस्तक हुए आचार्य प्रमोद कृष्णम

पूज्य गुरुदेव स्वामी कैलाशानंद गिरी जी महाराज से इस बेहद खास और आत्मीय भेंट के बाद पूज्य आचार्य श्री प्रमोद कृष्णम् जी महाराज ने अपना अनुभव साझा किया. उन्होंने गद्गद भाव से बस इतना ही कहा कि आज पूज्य स्वामी कैलाशानंद जी महाराज की इस अत्यंत कठिन, निस्वार्थ और उग्र तपस्या को देखकर ऐसा लगा मानो साक्षात् भगवान शिव की तपस्वी चेतना और रुद्र रूप के दर्शन हो गए हों.

आचार्य जी ने कहा कि महामंडलेश्वर जी की यह साधना पूरे सनातन समाज, देश और संपूर्ण मानवता के कल्याण के लिए है, जिसकी अनुभूति मात्र से ही मन और आत्मा पूरी तरह पवित्र हो जाती है.

ये भी पढ़ें-‘हंसते-हंसते फांसी के फंदे को…’, शहीद राजगुरु की जयंती पर अमित शाह क्या बोले?

श्रद्धालुओं के लिए बना ऐतिहासिक क्षण

देश के दो महान और विद्वान संतों के इस अलौकिक मिलन के दौरान सिद्धपीठ दक्षिण काली मंदिर में श्रद्धालुओं का भारी जमावड़ा लग गया. वहां उपस्थित भक्तों के लिए यह क्षण जीवन का सबसे अविस्मरणीय और पावन आध्यात्मिक क्षण बन गया. कई श्रद्धालुओं ने इस भावुक दृश्य को अपने कैमरों में कैद किया, जिसके बाद दोनों संतों के इस मौन संवाद और आत्मीय मिलन की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं.

देश भर के सनातन धर्मी और श्रद्धालु इन दो महान संतों के प्रति अपनी अपार श्रद्धा व्यक्त कर रहे हैं और उनके इस पवित्र मिलन को ‘दिव्य अध्यात्म का सर्वोच्च रूप’ बता रहे हैं.

-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read