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न सोना, न चांदी… जमीन के नीचे से निकला कुछ ऐसा जिसने इतिहासकारों के उड़ा दिए होश!

ग्रीस के मेगालोपोलिस बेसिन में वैज्ञानिकों ने एक ऐसी खोज की है जिसने मानव इतिहास की किताबों को फिर से लिखने पर मजबूर कर दिया है. यहां लगभग 4,30,000 साल पुराने लकड़ी के औजार मिले हैं, जो उस दौर के हैं जब निएंडरथल धरती पर हुआ करते थे.

Greece archaeology discovery

ये फोटो एआई द्वारा बनाई गई है.

जमीन के नीचे से पुरानी चीजें निकलना कोई नई बात नहीं है, लेकिन इस बार जो ‘खजाना’ हाथ लगा है, वह सोने-चांदी का नहीं बल्कि मामूली दिखने वाली ‘लकड़ी’ का है. हैरानी की बात यह है कि ये लकड़ियां कोई साधारण टुकड़े नहीं, बल्कि 4 लाख 30 हजार साल पुराने औजार हैं.

क्यों है इतना खास?

आम तौर पर लकड़ी बहुत जल्दी गलकर खत्म हो जाती है. लाखों साल तो दूर, कुछ दशकों में ही लकड़ी का नामो-निशान मिट जाता है. लेकिन ग्रीस के मेगालोपोलिस बेसिन में वैज्ञानिकों को दो ऐसी कलाकृतियां (Artifacts) मिली हैं, जो निएंडरथल काल से भी पुरानी हो सकती हैं. वैज्ञानिकों का मानना है कि ये अब तक के खोजे गए सबसे पुराने लकड़ी के औजारों में से एक हैं.

जर्नल प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज (PNAS) में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, इनमें से एक औजार लगभग ढाई फीट लंबी एक पतली छड़ी है. शोधकर्ताओं का अंदाजा है कि उस दौर के इंसान इसका इस्तेमाल कीचड़ खोदने या जमीन के अंदर से कंद-मूल निकालने के लिए करते होंगे. वहीं दूसरा टुकड़ा काफी छोटा है, जिसे हाथ में पकड़कर शायद पत्थर के औजारों को पैना करने या उन्हें सही आकार देने के लिए इस्तेमाल किया जाता था.

इतने सालों तक बचे कैसे रहे?

यह किसी करिश्मे से कम नहीं है कि साढ़े चार लाख सालों बाद भी ये लकड़ी सुरक्षित है. वैज्ञानिकों ने बताया कि अक्सर ऐसी चीजें तभी बच पाती हैं जब वे ऑक्सीजन से दूर किसी खास वातावरण में हों जैसे बर्फ के नीचे, गहरी गुफाओं में या फिर पानी के भीतर. इस मामले में, ये औजार एक प्राचीन झील के किनारे मिट्टी और तलछट (Sediment) में बहुत जल्दी दब गए थे. वहां की नमी और ऑक्सीजन की कमी ने इन्हें सड़ने से बचा लिया और ये आज हमारे सामने हैं.

कौन थे इनके मालिक?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि इन्हें बनाया किसने था? दिलचस्प बात यह है कि उस जगह पर अब तक कोई इंसानी कंकाल या अवशेष नहीं मिले हैं. हालांकि, उसी इलाके में हाथियों की ऐसी हड्डियां मिली हैं जिन पर काटने के निशान हैं. इससे पता चलता है कि यहां कोई न कोई शिकारी समूह सक्रिय था. वैज्ञानिकों का अनुमान है कि ये निएंडरथल या उनके पूर्वज होमो हाइडेलबर्गेंसिस (Homo heidelbergensis) हो सकते हैं.

स्मिथसोनियन म्यूजियम के पुरातत्वविद जारोड हट्सन कहते हैं कि पहली नजर में इन्हें देखकर कोई नहीं कह सकता कि ये औजार हैं. इनकी बनावट इतनी साधारण है कि इन्हें पहचानना ही सबसे बड़ी चुनौती थी.

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-भारत एक्सप्रेस



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