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‘मेरा जिम टाइम है!’ कोर्ट बुलाने पर Gen Z इंटर्न की दो टूक, वकील बोलीं- सीनियर हूं या पर्सनल असिस्टेंट?

Gen Z News: दिल्ली की एक वकील ने अपने Gen Z इंटर्न का किस्सा शेयर किया, जिसने सुबह 9 बजे कोर्ट आने से इसलिए मना कर दिया क्योंकि उस समय उसका जिम शेड्यूल था. इंटर्न के जवाब पर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई, जहां कुछ यूजर्स ने इसे गैर-जिम्मेदाराना बताया तो कुछ ने वर्क-लाइफ बैलेंस का मुद्दा उठाया.

Gen Z intern gym court Delhi

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Gen Z intern gym court Delhi: देश में Gen Z के काम करने के तौर-तरीकों को लेकर बहस लगातार तेज हो रही है. अब दिल्ली की एक वकील का सोशल मीडिया पोस्ट इसी बहस को हवा दे रहा है. वकील के मुताबिक, उनके एक Gen Z इंटर्न ने सुबह 9 बजे कोर्ट आने से सिर्फ इसलिए मना कर दिया, क्योंकि उस समय उसका जिम जाने का शेड्यूल था.

इंटर्न ने साफ कह दिया- इस वक्त नहीं आ सकता

वकील ने X पर अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्होंने इंटर्न को अगले दिन सुबह 9 बजे कोर्ट पहुंचने और कुछ काम संभालने के लिए कहा. लेकिन इंटर्न ने तुरंत कहा कि वह 9 बजे नहीं आ सकता, क्योंकि यही उसका जिम जाने का समय है. हालांकि, बाद में उसने एक बार के लिए अपने शेड्यूल में बदलाव करने पर सहमति जता दी. वकील ने इस बातचीत पर हैरानी जताते हुए सवाल किया कि आखिर वह इंटर्न की सीनियर हैं, जूनियर हैं या फिर उसकी पर्सनल असिस्टेंट.

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सोशल मीडिया पर छिड़ी जंग

पोस्ट वायरल होते ही यूजर्स दो खेमों में बंट गए. कुछ लोगों ने इंटर्न के रवैये को गैर-जिम्मेदार बताया. उनका कहना था कि प्रोफेशनल कमिटमेंट के सामने निजी शेड्यूल को प्राथमिकता देना सही नहीं है. वहीं, दूसरे यूजर्स ने वकील के पक्ष पर भी सवाल उठाए. उनका कहना था कि अगर इंटर्न से तय समय से पहले काम करने की उम्मीद की जा रही है, तो यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि उसके काम के घंटे और भुगतान की व्यवस्था क्या है. एक यूजर ने तो सीधे पूछ लिया कि क्या सुबह जल्दी काम करने के लिए इंटर्न को अतिरिक्त भुगतान किया जा रहा था?

वकील ने बाद में दी सफाई

बढ़ते विवाद के बीच वकील ने स्पष्ट किया कि मामला सिर्फ जिम जाने या इंटर्न के निजी समय का नहीं था. उन्होंने बताया कि कोर्ट के काम में रूटीन वर्क और ब्रीफिंग शामिल थी और उनके वर्कप्लेस पर इंटर्न को वेतन/भुगतान दिया जाता है. इस पूरे मामले ने Gen Z को लेकर एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा कर दिया है—क्या नई पीढ़ी वर्क-लाइफ बैलेंस की सीमाएं तय कर रही है, या फिर प्रोफेशनल जिम्मेदारियों से बचने के लिए निजी पसंद को वजह बना रही है?

भारत एक्सप्रेस



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