Liz East Law Career Dog Walking Business- bharat express
Dog Walking Business: “इतनी पढ़ाई-लिखाई किस काम की, जब आखिर में कुत्ते ही घुमाने थे?” — यह वही तीखा ताना है, जो 30 वर्षीय लिज ईस्ट (Liz East) को तब सुनना पड़ा था, जब उन्होंने अपने चमकते हुए लॉ करियर को लात मारने का फैसला किया था. रिश्तेदारों और दोस्तों ने आंखें मटकाते हुए तंज कसे, लेकिन आज वही लिज महज कुछ घंटे कुत्तों के साथ टहलकर रोजाना ₹50,000 तक छाप रही हैं. कॉर्पोरेट की 14 घंटे की घुटनभरी गुलामी से निकलकर लिज ने साबित कर दिया कि असली सफलता किसी चमचमाते केबिन में नहीं, बल्कि मन की शांति और खुशहाली में छुपी है.
12-14 घंटे का टॉर्चर और ‘मशीन’ बनती जिंदगी
पीपल मैगजीन की रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रिटेन की रहने वाली लिज ईस्ट ने 6 साल तक कानून की कड़ा मुकाबला करने वाली पढ़ाई की और फिर 4 साल तक क्रिमिनल केसेज में बतौर पैरालीगल (Paralegal) काम किया. कोर्टरूम के कागजात, जेलों के चक्कर, ढेरों फाइलें और क्लाइंट्स का तनाव—उनकी रोज की जिंदगी बन चुका था. सुबह घर से निकलना और रात को 9-10 बजे थकी-हारी लौटना. ऊपर से रोज का 2 घंटे का ट्रैवल और ऑफिस की बोरिंग पार्टियां. लिज अपनी उम्र से दुगनी बूढ़ी महसूस करने लगी थीं. उन्हें लगने लगा था कि वह इंसानी जिंदगी नहीं, बल्कि एक तय रोस्टर पर चलने वाली मशीन बन चुकी हैं, जिसकी कोई अपनी ख्वाहिश नहीं बची.
पति की मुस्कान ने खोली आंखें
जब लिज रोज तनाव के बोझ तले दब रही थीं, तब उन्होंने अपने पति पर गौर किया. उनके पति डॉग वॉकिंग (कुत्तों को घुमाने और उनकी देखभाल) का काम करते थे. दिनभर बेजुबानों के साथ समय बिताकर जब वह घर लौटते, तो उनके चेहरे पर थकावट नहीं, बल्कि एक अजीब सी संतुष्टि और मुस्कान होती थी. बस यहीं से लिज का ‘माइंडसेट’ बदल गया. उन्होंने सोचा—जब जिंदगी इतनी छोटी है, तो इसे किसी ऐसी जगह क्यों घसीटना जहां रोज दम घुटता हो?
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जब ‘लॉयर’ बनी ‘डॉग वॉकर’: ऐसे रचा इतिहास
लिज ने एक ही झटके में लॉ की भारी-भरकम नौकरी को अलविदा कह दिया. शुरुआत आसान नहीं थी; समाज के ताने थे और पैसों का बैकअप भी चाहिए था. उन्होंने हिम्मत नहीं हारी, एक पुरानी वैन खरीदी और शुरुआती खर्चों को संभालने के लिए कुछ समय एक पब में वेट्रेस का काम भी किया. धीरे-धीरे उनका डॉग वॉकिंग बिजनेस पटरी पर आ गया. आज लिज हर दिन 4 अलग-अलग बैच में 20 से 30 कुत्तों को घुमाने ले जाती हैं. एक घंटे एक कुत्ते को घुमाने की उनकी फीस करीब 19 डॉलर (लगभग ₹1,800) है. गणित सीधा है—वह रोजाना 400 से 530 डॉलर (करीब 38,000 से 50,000 रुपये) कमा लेती हैं. यानी अपनी पुरानी कॉर्पोरेट जॉब से आधी मेहनत और आधे समय में कई गुना ज्यादा कमाई!
तंज कसने वालों के मुंह पर करारा तमाचा
आज लिज हर सुबह चेहरे पर बड़ी सी मुस्कान लिए अपनी वैन में सवार होती हैं, जहां उनकी अगवानी इंसानी राजनीति करने वाले बॉस नहीं, बल्कि वफादार और प्यारे कुत्ते अपनी पूंछ हिलाकर करते हैं. लिज का कहना है कि उनकी 6 साल की लॉ की पढ़ाई बेकार नहीं गई—उससे मिले अनुशासन और मैनेजमेंट की बदौलत ही वह आज अपना बिजनेस इतनी सटीकता से चला पा रही हैं. लिज की यह कहानी हर उस इंसान के लिए एक करारा जवाब है जो दूसरों के तानों के डर से अपनी जिंदगी का रिस्क लेने से डरता है. उनका सक्सेस मंत्र बेहद साफ है—”नौकरी ऐसी मत करो जो तुम्हारी रूह को मार दे. बदलाव मुश्किल होता है, लेकिन पूरी जिंदगी पछतावे में घिसटने से तो हजार गुना बेहतर है!”
भारत एक्सप्रेस
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