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वफादारी की मिसाल बना ‘जिम्मी’: परिवार को बचाने के लिए ब्लैक कोबरा से लड़ी जंग, सांप के डंसने से हुई मौत

हरियाणा के निसिंग क्षेत्र में वफादारी और बहादुरी की एक हैरान करने वाली घटना सामने आई है. यहाँ डॉ. सुमित ठाकुर के पालतू लैब्राडोर कुत्ते ‘जिम्मी’ ने अपने मालिक और उनके बच्चों की रक्षा के लिए एक जहरीले ब्लैक कोबरा से टक्कर ली. करीब 25 सेकंड तक चली इस लड़ाई में कोबरा के कई बार डंसने की वजह से वफादार जिम्मी की मौत हो गई.

Ajab Gajab, Dog Loyalty

Ajab Gajab: कहते हैं कि कुत्ता इंसान का सबसे वफादार दोस्त होता है और इस बात को हरियाणा के निसिंग क्षेत्र में एक पालतू फीमेल लैब्राडोर ने अपनी जान देकर साबित कर दिया. अपने मालिक और उनके बच्चों को एक जहरीले ब्लैक कोबरा से बचाने के लिए ‘जिम्मी’ नाम की यह डॉगी सीधे मौत से भिड़ गई. करीब 25 सेकंड तक चली इस रोंगटे खड़े कर देने वाली जंग का CCTV फुटेज भी सामने आया है, जिसे देखकर हर किसी की आंखें नम हैं.

घर के गेट पर आ धमका था ब्लैक कोबरा

यह पूरी घटना रविवार शाम करीब 6 बजे की है. पेशे से डॉक्टर सुमित ठाकुर अपने दोनों पालतू लैब्राडोर, ‘जिम्मी’ और ‘मैक्स’ को रोज की तरह टहलाने के लिए घर से बाहर निकाल रहे थे. इसी दौरान अचानक घर के मुख्य गेट से एक खतरनाक ब्लैक कोबरा अंदर घुसता दिखाई दिया. इससे पहले कि डॉ. सुमित या उनके परिवार का कोई सदस्य कुछ समझ पाता या पीछे हटता, दोनों वफादार कुत्ते खतरे को भांपकर कोबरा की तरफ लपके.

जहर फैलने के बावजूद पीछे नहीं हटी जिम्मी

डॉ. सुमित ठाकुर ने बताया कि गेट पर आते ही जैसे ही कोबरा ने अपना फन फैलाया, जिम्मी ने बिना डरे उस पर हमला कर दिया. इस खूनी संघर्ष के दौरान कोबरा ने जिम्मी के मुंह और पंजे पर कई बार डंक मारे. जहर शरीर में जाने के बाद भी जिम्मी टस से मस नहीं हुई और लगातार कोबरा को पीछे धकेलती रही. वहीं उनका दूसरा डॉगी मैक्स भी कोबरा को घेरे खड़ा रहा ताकि वह घर के अंदर न घुस पाए.

लगभग 25 सेकंड की इस लड़ाई के बाद कोबरा हार मानकर पास में रखे गमलों और दीवार के पीछे जाकर छिप गया. लेकिन तब तक कोबरा का जानलेवा जहर जिम्मी के शरीर में फैल चुका था. महज 8 मिनट के भीतर ही जिम्मी की हालत बिगड़ने लगी. परिवार ने तुरंत स्नेकमैन और डॉक्टर को फोन किया, लेकिन जब तक इलाज मिल पाता, जिम्मी ने दम तोड़ दिया.

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9 साल से परिवार की जान थी जिम्मी

डॉ. सुमित ने भावुक होते हुए बताया कि वे 9 साल पहले जिम्मी को करनाल से अपने घर लाए थे. वह उनके लिए जानवर नहीं बल्कि परिवार की सबसे लाडली सदस्य थी. गर्मियों में उसके लिए एसी-कूलर और सर्दियों में हीटर चलता था. जिम्मी को डॉक्टर के तीनों बच्चों से बेहद लगाव था.

डॉ. सुमित का कहना है कि अगर जिम्मी अपनी जान पर खेलकर उस सांप को नहीं रोकती, तो वह सीधा घर के अंदर आता और बच्चों के साथ कोई भी अनहोनी हो सकती थी. जिम्मी की इस बहादुरी और आखिरी सांस तक निभाई गई वफादारी ने आज पूरे इलाके को भावुक कर दिया है.

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-भारत एक्सप्रेस



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