Aajab Gajab: दुनिया में कई जगहें रहस्यों से भरी हुई हैं और मैक्सिको का टिल्टेपक गांव उनमें से एक है. यहां इंसान ही नहीं बल्कि जानवर और पक्षी भी जन्म के बाद धीरे‑धीरे अंधे हो जाते हैं. यही वजह है कि यहां का माहौल बाकी जगहों से बिल्कुल अलग है. लोग लकड़ी का सहारा लेकर चलते हैं और पक्षी उड़ने की कोशिश में पेड़ों से टकराकर गिर जाते हैं.
जोपोटेक जनजाति का बसेरा
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस गांव में जोपोटेक जनजाति के लोग रहते हैं. जन्म के समय बच्चे सामान्य होते हैं लेकिन कुछ दिनों बाद उनकी आंखों की रोशनी चली जाती है. सड़क किनारे बसे इस गांव में करीब 70 झोपड़ियां हैं और इन्हें देखकर कोई भी हैरान रह जाए.
खिड़कियों से खाली झोपड़ियां
गांव की सबसे खास बात यह है कि यहां किसी भी घर में खिड़की नहीं मिलती. वजह साफ है, यहां रहने वालों को रोशनी की जरूरत ही नहीं पड़ती. उनकी दुनिया अंधेरे में ही चलती है और वे उसी के हिसाब से अपना जीवन जीते हैं.
खानपान और रहन‑सहन
यहां के लोग खाने में सेम, बाजरा और मिर्च का इस्तेमाल करते हैं. सूखी मिर्च खाना उनकी आदत है. लकड़ी से बने औजारों से वे काम करते हैं. रात को खाना खाने के बाद शराब पीते हैं और नाच‑गाना करते हुए सो जाते हैं.
श्रापित पेड़ की मान्यता
गांव वालों का मानना है कि ‘लावजुएजा’ नाम का एक पेड़ उनकी अंधता की वजह है. उनका विश्वास है कि इस पेड़ को देखने के बाद लोग अंधे हो जाते हैं. यही कारण है कि इस गांव को रहस्यमयी माना जाता है और वैज्ञानिक भी इसकी ओर आकर्षित हुए.
वैज्ञानिकों की खोज
जब विशेषज्ञों ने जांच की तो पाया कि पेड़ असल में दोषी नहीं है. उन्होंने बताया कि यहां एक विषैली मक्खी है जो लोगों को काटती है. यह मक्खी शरीर में ऐसे कीटाणु छोड़ देती है जो आंखों से दिमाग तक जाने वाले सिग्नल को रोक देते हैं. इसी वजह से लोग धीरे‑धीरे दृष्टिहीन हो जाते हैं.

प्रजाति को बचाने की कोशिश
रिपोर्ट्स के मुताबिक वैज्ञानिकों की रिसर्च के बाद इस जनजाति को बचाने की मुहिम शुरू हो गई है. अब कोशिश की जा रही है कि इस रहस्यमयी गांव के लोगों को बेहतर जीवन दिया जा सके और उनकी अंधता की समस्या का समाधान निकाला जा सके.
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-भारत एक्सप्रेस
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