समय रैना
देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) के आदेशों की अवहेलना करना मशहूर स्टैंड-अप कॉमेडियन समय रैना को बेहद महंगा पड़ गया है. सुप्रीम कोर्ट ने समय रैना के खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार करते हुए पहले उन पर भारी-भरकम जुर्माना लगाया. हालांकि, बाद में मामले की गंभीरता और परिस्थितियों को देखते हुए कोर्ट ने इस जुर्माने की राशि को घटाकर 3 लाख रुपये कर दिया है. इसके साथ ही अदालत ने इस मामले से जुड़े अन्य सह-आरोपियों को भी 3-3 लाख रुपये सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में जमा कराने का आदेश दिया है.
दो हफ्ते के भीतर रकम जमा करने का निर्देश, ₹30 लाख की चेतावनी
सीजेआई (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की तीन सदस्यीय पीठ ने समय रैना को कड़े निर्देश दिए हैं कि वे जुर्माने की इस राशि को हर हाल में दो सप्ताह के भीतर कोर्ट की रजिस्ट्री में जमा कराएं. शीर्ष अदालत ने बेहद सख्त लहजे में चेतावनी देते हुए कहा कि यदि अगली सुनवाई तक उसके निर्देशों का संतोषजनक पालन नहीं किया गया, तो अगली बार दोषी पर सीधे 30 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा. पीठ ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि समय रैना ने कोर्ट के पुराने आदेशों का खुलेआम उल्लंघन किया है और ऐसा प्रतीत होता है कि उन्होंने देश की सर्वोच्च अदालत को बहुत हल्के में लिया है. सुनवाई के दौरान जजों ने पूछा कि समय रैना और अन्य कॉमेडियनों ने अपने विवादित आचरण के बाद खुद में सुधार लाने के लिए आखिर अब तक क्या कदम उठाए हैं?
सॉलीसिटर जनरल और वरिष्ठ वकील ने उठाए गंभीर सवाल
मामले की पैरवी के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने समय रैना द्वारा हाल ही में सोशल मीडिया या मंचों पर की गई कुछ टिप्पणियों का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि उनका हालिया व्यवहार भी उनकी गंभीरता पर गंभीर सवाल खड़े करता है. सॉलिसिटर जनरल ने तंज कसते हुए कहा कि देश के युवाओं के लिए समाज में इनसे कहीं बेहतर आदर्श (Role Models) मौजूद हैं.
वहीं, इस मामले में ‘क्योर एसएमए फाउंडेशन’ की ओर से पेश हुईं वरिष्ठ वकील अपराजिता सिंह ने अदालत को असलियत से रूबरू कराते हुए बताया कि समय रैना ने सोशल मीडिया पर यह बड़े-बड़े दावे किए थे कि उन्होंने दिव्यांगजनों के कल्याण के लिए कुछ विशेष कार्यक्रम आयोजित किए हैं, लेकिन हकीकत यह है कि अदालत के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद उन्होंने क्योर एसएमए फाउंडेशन से आज तक कोई संपर्क नहीं किया. उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि समय रैना की ओर से कोर्ट के समक्ष सच्चे मन से माफी मांगने का भी साफ अभाव दिखाई देता है. इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि समय रैना ने अदालत को “राइड पर लेने” (हल्के में लेने) की कोशिश की है. अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि न्यायपालिका के आदेशों का पालन हर हाल में होना चाहिए और किसी भी प्रकार के अहंकार या अवहेलना को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

