Bharat Express DD Free Dish

विश्लेषण

गलवान संकट से लेकर गाजा और तेहरान तक, BRICS शिखर सम्मेलन यह साबित कर रहा है कि यह ब्लॉक अब पश्चिम के आर्थिक और रणनीतिक दबदबे का एक नया और असरदार जवाब बन रहा है.

BRICS शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की संभावित बैठक पर दुनिया की नजरें टिकी हैं. यह मुलाकात भारत-चीन संबंधों में स्थिरता की नई शुरुआत बन सकती है.

भारत जैसे घनी आबादी, जटिल परिवहन नेटवर्क और केंद्रीकृत प्रशासन वाले देश में एक समय व्यवस्था प्रबंधन को आसान बनाती है. चीन भी एक ही टाइम जोन रखता है (हालांकि उसका विस्तार और भी बड़ा है). हाल के “One Nation, One Time” नियम इसी दिशा में मजबूती देते हैं.

Sound Engineering In Hindu Temples: मंदिरों की बनावट इस तरह की जाती है कि वहां ॐ का जाप और घंटियों की आवाज ज्यादा देर तक गूंज सके. पत्थर की दीवारें, बंद कमरे, ऊंची छत और गूंजने वाली जगहें आवाज को रोकती और वापस लौटाती हैं. इससे मंदिर के अंदर ध्वनि का अनुभव ज्यादा गहरा और प्रभावशाली हो सकता है.

Sanatan Dharma Time Calculation: सनातन धर्म में समय को सिर्फ दिन, महीने और साल के हिसाब से नहीं देखा जाता. यहां समय की गणना बेहद बड़े स्तर पर की गई है. इसमें युग, महायुग, मन्वंतर और कल्प जैसे कालखंड शामिल हैं. इनकी गणना लाखों और करोड़ों ही नहीं, बल्कि अरबों वर्षों तक जाती है.

Gen Z सवाल पूछने और गहराई से समझने की आदत के साथ भारतीय समाज में नई सोच ला रही है. जाति और धर्म से परे यह पीढ़ी बराबरी, समझदारी और इंसानियत को प्राथमिकता देती है.

India GDP Growth: मध्य पूर्व में जारी तनाव और ऊर्जा संकट के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था ने अप्रैल-जून तिमाही में मजबूत प्रदर्शन किया है. इससे कारोबारियों, निवेशकों और नीति बनाने वालों को यह भरोसा मिला है कि देश की आर्थिक रफ्तार अभी भी मजबूत बनी हुई है.

Mohan Bhagwat London Visit: मोहन भागवत का न्यूयॉर्क, टोरंटो और लंदन का दौरा केवल प्रवासी भारतीयों से मिलने तक सीमित नहीं माना जा रहा है. इसे RSS के उस प्रयास के रूप में देखा जा रहा है, जिसके जरिए वह सेवा, सामाजिक समरसता, विविधता में एकता और वसुधैव कुटुंबकम जैसे विचारों को वैश्विक मंच पर पहुंचाना चाहता है.

Mohan Bhagwat UK Visit: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत का ब्रिटेन दौरा अब केवल प्रवासी भारतीयों से जुड़ा कार्यक्रम नहीं रह गया है. यह एक ऐसा अवसर बन गया है, जहां RSS, हिंदुत्व, भारत और संघ के विचारों को पश्चिमी देशों के लोगों के सामने समझाने की कोशिश की जा रही है.

बिहार में दुर्गा पूजा सिर्फ भव्य पंडालों और उत्सव का नाम नहीं है. पुराने जमींदार घरानों के लिए यह अपनी पुश्तैनी जड़ों, कुलदेवी और सदियों पुरानी परंपराओं से दोबारा जुड़ने का मौका भी है.