भारत में बिजली और ऊर्जा के क्षेत्र में इस साल एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है. देश तेजी से पारंपरिक बिजली उत्पादन से निकलकर अक्षय ऊर्जा यानी रिन्यूएबल एनर्जी की ओर बढ़ रहा है. हाल ही में जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 भारत के ऊर्जा सेक्टर के लिए बेहद अहम साबित हुआ है. इस दौरान देश ने रिकॉर्ड 57.5 गीगावाट नई बिजली उत्पादन क्षमता जोड़ी, जो पिछले साल के मुकाबले करीब 1.73 गुना ज्यादा है. खास बात ये रही कि इसमें लगभग पूरी हिस्सेदारी हरित ऊर्जा की रही.
सौर ऊर्जा बनी सबसे बड़ी ताकत
नई जोड़ी गई कुल बिजली क्षमता में करीब 95 प्रतिशत हिस्सा अक्षय ऊर्जा का रहा. इसमें भी सौर ऊर्जा सबसे आगे रही. ग्रिड-स्केल और रूफटॉप सोलर परियोजनाओं को मिलाकर लगभग 44.6 गीगावाट क्षमता जोड़ी गई. वहीं पवन ऊर्जा ने भी अच्छी रफ्तार दिखाई और इसमें 6.1 गीगावाट की बढ़ोतरी दर्ज हुई.
देश की कुल स्थापित बिजली क्षमता अब करीब 533 गीगावाट तक पहुंच चुकी है. इनमें आधे से ज्यादा यानी करीब 52 प्रतिशत हिस्सा अब अक्षय ऊर्जा स्रोतों का हो चुका है. यह संकेत देता है कि भारत धीरे-धीरे कोयले पर निर्भरता कम कर रहा है और साफ ऊर्जा की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है.
रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में अक्षय ऊर्जा उत्पादन में 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई. दूसरी तरफ कोयला और लिग्नाइट आधारित बिजली उत्पादन में 4.3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई. यह बदलाव सिर्फ पर्यावरण के लिहाज से ही नहीं बल्कि आने वाले समय में ऊर्जा सुरक्षा और लागत नियंत्रण के लिए भी अहम माना जा रहा है.

निर्माणाधीन हैं बड़ी परियोजनाएं
देश में अभी करीब 151 गीगावाट अक्षय ऊर्जा परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं. इनमें सबसे बड़ा हिस्सा सौर ऊर्जा परियोजनाओं का है. आने वाले वर्षों में लगभग 90 गीगावाट सौर, 29 गीगावाट पवन, 19 गीगावाट हाइब्रिड और 13 गीगावाट बड़ी हाइड्रो परियोजनाओं से जुड़ने की उम्मीद है.
सरकार और ऊर्जा एजेंसियों की ओर से लगातार नए टेंडर भी जारी किए जा रहे हैं. इस साल 10.4 गीगावाट के नए टेंडर निकाले गए, जबकि 14.25 गीगावाट क्षमता की नीलामी पूरी हुई. दिलचस्प बात यह रही कि इनमें ज्यादातर परियोजनाएं नई तकनीक और स्टोरेज आधारित मॉडल पर केंद्रित थीं.
बैटरी स्टोरेज में आया बड़ा बदलाव
ऊर्जा स्टोरेज के क्षेत्र में भी भारत ने बड़ी छलांग लगाई है. सालभर में 37 स्टोरेज टेंडर जारी हुए, जिनमें से 31 बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम यानी BESS से जुड़े थे. आंध्र प्रदेश के एपीट्रांसको टेंडर में दो घंटे के बैटरी स्टोरेज के लिए 1.23 रुपये प्रति यूनिट का रिकॉर्ड कम टैरिफ सामने आया. यह पिछले साल की तुलना में करीब 33 प्रतिशत कम है. इससे साफ है कि भविष्य में बिजली स्टोरेज सस्ती और ज्यादा उपयोगी हो सकती है.
डिस्कॉम की हालत में भी सुधार
रिपोर्ट में बिजली वितरण कंपनियों यानी डिस्कॉम की वित्तीय स्थिति में सुधार की बात भी कही गई है. जनवरी 2024 में बिजली कंपनियों पर करीब 49 हजार करोड़ रुपये का बकाया था, जो फरवरी 2026 तक घटकर करीब 4 हजार करोड़ रुपये रह गया. इसे बिजली क्षेत्र के लिए राहत भरी खबर माना जा रहा है.
इसके अलावा देशभर में लगभग 6.5 करोड़ स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं. माना जा रहा है कि इससे बिजली चोरी कम होगी, बिलिंग बेहतर होगी और उपभोक्ताओं को भी फायदा मिलेगा.
ग्रीन बॉन्ड और विदेशी निवेश पर नजर
भारत ने इस दौरान 20,000 करोड़ रुपये के सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड भी जारी किए. ये बॉन्ड 30 साल की अवधि के लिए जारी हुए हैं. हालांकि, एक चिंता की बात भी सामने आई है. अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में विदेशी निवेश यानी FDI में कुछ गिरावट दर्ज की गई है. वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तीन तिमाहियों में करीब 2.5 बिलियन डॉलर का निवेश आया, जिसमें ज्यादातर हिस्सा सौर ऊर्जा सेक्टर को मिला है.
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-भारत एक्सप्रेस
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