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गोपाल कृष्ण




भारत एक्सप्रेस


चुनाव चिह्न को लेकर NCP (S) नेता शरद पवार ने एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है. शरद पवार ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दायर कर अजित पवार को चुनाव आयोग द्वारा जारी किया गया चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग की है.

दिल्ली पुलिस ने दिल्ली में बीएनएस की धारा 163 लागू कर दी गई है. दिल्ली पुलिस के आदेश के बाद 30 सितंबर से 5 अक्टूबर तक के लिए नई दिल्ली, सेंट्रल दिल्ली और उत्तरी दिल्ली की सभी सीमाओं पर धारा 163 लगाया गया है, इसके तहत कही भी लोग भीड़ इकट्ठी नहीं कर सकेंगे, एक स्थान पर 5 से अधिक लोग जमा नहीं हो सकेंगे, लोग जुलूस नहीं निकाल सकेंगे, धरना नहीं दे सकेंगे.

आशा किरण आश्रय गृह में फिलहाल बच्चों और महिलाओं समेत 980 मानसिक रूप से बीमार लोग रह रहे हैं. एक आंकड़े के मुताबिक फरवरी से अब तक 25 लोगों की मौत हो चुकी है.

याचिकाकर्ता ने राष्ट्रीय जनगणना के हवाले से हाईकोर्ट के समक्ष जो डाटा पेश किया है, उसके मुताबिक साल 1951 में संथाल परगना क्षेत्र में आदिवासी आबादी 44.67 प्रतिशत से घटाकर साल 2011 में 28.11 प्रतिशत हो गई है. इसके पीछे की एक बड़ी वजह बंग्लादेशी घुसपैठ है.

दिल्ली हाईकोर्ट की खंडपीठ ने पाया कि लापता व्यक्तियों का पता लगाने के प्रयासों के दौरान पुलिस द्वारा सूचना मांगने और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से ऐसी सूचना प्राप्त करने के बीच अक्सर समय अंतराल होता है.

आरोप है कि जेल अधिकारियों ने 3 अगस्त, 2021 को अंकित गुर्जर की बेरहमी से पिटाई की थी और उसे कोई चिकित्सकीय सहायता नहीं दी जिससे जेल परिसर में उसकी मौत हो गई. यह भी आरोप लगाया गया था कि आरोपी मृतक के परिजनों से पैसे ऐंठने के लिए उसे परेशान कर रहे थे.

पूर्व केंद्रीय मंत्री जगदीश टाइटलर पर आरोप है कि उन्होंने भीड़ से कहा था कि सिखों को मार डालो, उन्होंने हमारी माँ को मार डाला. इस घटना के बाद तीन लोगों की हत्या कर दी गई.

सोनम वांगचुक अपनी 700 किलोमीटर की पदयात्रा करते हुए सोमवार की रात ही लद्दाख से दिल्ली पहुंचे थे. वांगचुक के साथ आए करीब 120 लोगों को भी पुलिस ने डिटेन किया है.

कोलकाता हाईकोर्ट ने पार्थ चटर्जी को जमानत देने से इनकार कर दिया था. हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान पार्थ चटर्जी की ओर से पेश वकील ने दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया सहित अन्य को मिली जमानत का हवाला दिया था.

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि वह स्पष्ट करेगी कि किसी अपराध में आरोपी या दोषी होने मात्र से किसी भी इमारत को ध्वस्त नहीं किया जा सकता. साथ ही पीठ ने कहा कि वह यह सुनिश्चित करेगी कि अनधिकृत निर्माण और सार्वजनिक अतिक्रमण को संरक्षण न मिले.