भारत एक्सप्रेस की एसआईटी टीम
उत्तर प्रदेश के नोएडा में स्पोर्ट्स सिटी के नाम पर शुरू की गई परियोजना, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर के खेल आयोजनों के लिए एक सपना थी, आज एक बड़े घोटाले का पर्याय बन चुकी है. भारत एक्सप्रेस की विशेष पड़ताल में सामने आया है कि नोएडा अथॉरिटी के अधिकारियों, नेताओं और बिल्डरों के गठजोड़ ने इस परियोजना को भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा दिया. इस घोटाले में हजारों करोड़ रुपये की लूट हुई, जिसमें न केवल किसानों की जमीनें कौड़ियों के दाम पर हड़प ली गईं, बल्कि निवेशकों को भी ठगी का शिकार बनाया गया.
शुरुआत: सपनों की परियोजना का आगाज
साल 2004 में मुलायम सिंह यादव की समाजवादी पार्टी सरकार के दौरान नोएडा में राष्ट्रमंडल खेलों के आयोजन के लिए एक विस्तृत प्रस्ताव तैयार किया गया. नोएडा बोर्ड ने इस प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी दी और निर्देश दिया कि खेल बुनियादी ढांचा अंतरराष्ट्रीय स्तर का होना चाहिए. 2007 में मायावती की बहुजन समाज पार्टी सरकार के दौरान नोएडा बोर्ड ने स्पोर्ट्स सिटी की अवधारणा को मंजूरी दी. इसका उद्देश्य था अंतरराष्ट्रीय स्तर के खेल आयोजनों के लिए बुनियादी ढांचा तैयार करना. सेक्टर 101, 102 और 104 में बैडमिंटन, टेबल टेनिस, बास्केटबॉल जैसे खेलों के लिए स्टेडियम, हाई-स्पीड इंटरनेट, गेस्ट हाउस, रेस्तरां और अन्य सुविधाओं की योजना बनाई गई.
घोटाले की नींव: जमीन अधिग्रहण से लूट
स्पोर्ट्स सिटी परियोजना की शुरुआत से ही भ्रष्टाचार की नींव रखी गई. नोएडा अथॉरिटी ने किसानों की जमीनों को सस्ते दामों पर अधिग्रहण किया, लेकिन कई मामलों में अधिग्रहण की प्रक्रिया भी पूरी नहीं की गई. सेक्टर-79 में ज्यादातर जमीन ग्राम सभा की थी, जिसे बिना अधिग्रहण के ही कागजों में आवंटित कर दिया गया. 2011 में जमीन लेने की प्रक्रिया शुरू हुई, लेकिन तब तक बिल्डरों को सस्ती दरों पर जमीन आवंटित की जा चुकी थी. सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद सेक्टर-101 की पूरी जमीन वापस कर दी गई, जिससे यह सेक्टर परियोजना से बाहर हो गया.
बिल्डरों का खेल: शेल कंपनियों का जाल
स्पोर्ट्स सिटी परियोजना के लिए नोएडा अथॉरिटी ने सेक्टर-78, 79, 101, 150 और 152 में 798 एकड़ जमीन आवंटित की. इसमें 70% जमीन खेल सुविधाओं के लिए, 28% आवासीय इकाइयों और 2% व्यावसायिक इमारतों के लिए आरक्षित थी. लेकिन बिल्डरों ने इस योजना का दुरुपयोग किया. Logix Infra Developers, Xanadu Estates और Lotus Green Constructions जैसी कंपनियों को भूखंड आवंटित किए गए, जिनकी कुल पूंजी मात्र एक-एक लाख रुपये थी. इन कंपनियों ने जमीन को 84 शेल कंपनियों के नाम ट्रांसफर कर दिया और 74 भूखंडों को विभाजित कर मोटा मुनाफा कमाया. नोएडा अथॉरिटी के अधिकारियों ने इस प्रक्रिया को मंजूरी दे दी, जिससे बिल्डरों ने करीब 10,500 करोड़ रुपये की राशि हड़प ली.
भ्रष्टाचार: अधिकारियों-बिल्डरों का गठजोड़
स्पोर्ट्स सिटी घोटाले में नोएडा अथॉरिटी के अधिकारियों और बिल्डरों का गठजोड़ साफ दिखाई देता है. बिल्डरों को सस्ती दरों पर जमीन देने के लिए बोली में महज 10% धनराशि की शर्त रखी गई. इसके बाद नियम-शर्तों को ताक पर रखकर आवासीय और व्यावसायिक स्पेस बेच दिए गए. बिल्डरों ने ‘जीरो पीरियड’ का लाभ उठाया और नोएडा अथॉरिटी ने उनके लिए भुगतान योजनाओं को बार-बार संशोधित किया. यह सब तब हुआ, जब अथॉरिटी के पास जमीन ही उपलब्ध नहीं थी. सेक्टर-78 और 79 में Xanadu Estates को दी गई 7,27,500 वर्ग मीटर जमीन में से 7,03,001.80 वर्ग मीटर का कब्जा दे दिया गया, बाकी जमीन बाद में देने का वादा किया गया, जो कभी पूरा नहीं हुआ.
CAG रिपोर्ट: फिर हुआ घोटाले का खुलासा
साल 2021 में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट ने नोएडा अथॉरिटी की करतूतों का खुलासा किया. रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारियों ने बिल्डरों को कम दरों पर भूखंड देकर प्राधिकरण को 8,643 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान पहुंचाया. इसके बाद अथॉरिटी ने सख्ती दिखाने की कोशिश की और रजिस्ट्रियों पर रोक लगा दी. लेकिन बिल्डर कोर्ट चले गए और मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई. इस दौरान बिल्डरों ने नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) में जाकर ब्याज माफी का लाभ भी हासिल कर लिया.
योगी सरकार की कार्रवाई: अब हिसाब की बारी
उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार की भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत अब इस घोटाले का हिसाब लिया जा रहा है. नोएडा अथॉरिटी ने 50 बिल्डरों को 10,500 करोड़ रुपये की बकाया राशि वसूलने के लिए नोटिस जारी किया है. भारत एक्सप्रेस की SIT ने दस्तावेजों की छानबीन में पाया कि बिल्डरों ने परियोजनाओं से प्राप्त फंड को डायवर्ट किया और खेल सुविधाओं के बजाय आवासीय और व्यावसायिक इकाइयां बना दीं. इस घोटाले का मास्टरमाइंड एक चार्टर्ड अकाउंटेंट बताया जा रहा है, जिसने शेल कंपनियों के जरिए हजारों करोड़ रुपये का साम्राज्य खड़ा किया.
पीड़ित किसान और निवेशक: ठगे गए इनके सपने
इस घोटाले में सबसे ज्यादा नुकसान किसानों और निवेशकों को हुआ. किसानों की जमीनें सस्ते दामों पर ली गईं, जबकि निवेशकों को फ्लैट और दुकानों के नाम पर ठगा गया. इलाहाबाद हाई कोर्ट और सिविल कोर्ट में किसानों ने 25-30 याचिकाएं दायर कीं, जिसके बाद कुछ जमीनें वापस की गईं. लेकिन बिल्डरों ने पहले ही मोटा मुनाफा कमा लिया था. पीड़ित किसानों ने भारत एक्सप्रेस को बताया कि नोएडा अथॉरिटी ने उनकी जमीन का अधिग्रहण तक नहीं किया और ग्राम सभा की जमीन को कागजों में आवंटित कर दिया गया.
लोगों के मन में बड़ा सवाल- अब आगे क्या होगा?
नोएडा स्पोर्ट्स सिटी घोटाला उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार की एक बड़ी मिसाल बन गया है. इस मामले में सीबीआई जांच के आदेश दे दिए गए हैं और योगी सरकार सख्त कार्रवाई की तैयारी में है. लेकिन सवाल यह है कि क्या पीड़ित किसानों और निवेशकों को न्याय मिल पाएगा? भारत एक्सप्रेस इस मामले की गहराई से जांच कर रहा है और जल्द ही “Operation स्पोर्ट्स सिटी के खिलाड़ी Part-2” के साथ नए खुलासे लेकर आएगा.
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