Bharat Express DD Free Dish
Kanya Sumangla Mission Shakti Digital
Kanya Sumangla Mission Shakti Digital

आचार्य किशोर कुणाल: एक सुपरकॉप, विद्वान और राम भक्त की अमर स्मृति

74 वर्ष की आयु में दुनिया छोड़ने वाले इस महान व्यक्तित्व ने अपने जीवनकाल में पुलिस सेवा, सामाजिक कार्य, धार्मिक पुनरुत्थान और सांस्कृतिक संरक्षण के क्षेत्र में अकूत योगदान दिया. वे न केवल बिहार के एक कुशल प्रशासक थे, बल्कि एक गहन विद्वान, दानवीर और राम भक्त के रूप में भी विख्यात थे.

Acharya Kishore Kunal
Edited by Vaibhav Gupta

आज पूर्व आईपीएस अधिकारी आचार्य किशोर कुणाल की प्रथम पुण्यतिथि है. एक वर्ष पूर्व, 29 दिसंबर 2024 को पटना में हृदयाघात से उनका निधन हो गया था. मात्र 74 वर्ष की आयु में दुनिया छोड़ने वाले इस महान व्यक्तित्व ने अपने जीवनकाल में पुलिस सेवा, सामाजिक कार्य, धार्मिक पुनरुत्थान और सांस्कृतिक संरक्षण के क्षेत्र में अकूत योगदान दिया. वे न केवल बिहार के एक कुशल प्रशासक थे, बल्कि एक गहन विद्वान, दानवीर और राम भक्त के रूप में भी विख्यात थे.

एक ग्रामीण परिवार से उदय

आचार्य किशोर कुणाल (Acharya Kishore Kunal) का जन्म 10 अगस्त 1950 को बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के बरुराज गांव में एक भूमिहार ब्राह्मण परिवार में हुआ था. बचपन से ही वे सभी सामाजिक वर्गों में सम्मानित थे. संस्कृत और इतिहास में उनकी गहरी रुचि ने उन्हें एक विद्वान बनाया. 1972 बैच के आईपीएस अधिकारी के रूप में वे गुजरात कैडर में शामिल हुए, लेकिन बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री करपूरी ठाकुर के साथ चर्चा के बाद वे बिहार लौट आए. उनकी शिक्षा और प्रारंभिक जीवन ने उन्हें एक बहुमुखी व्यक्तित्व प्रदान किया, जो बाद में उनके कार्यों में झलकता रहा.

जंगल राज’ के विरुद्ध सुपरकॉप की लड़ाई

आचार्य कुणाल का पुलिस करियर बिहार के अपराधी तत्वों के विरुद्ध एक क्रांतिकारी अध्याय था. रोहतास के एसपी के रूप में उन्होंने डकैती की समस्या को जड़ से समाप्त किया. उस समय रोहतास में प्रतिमाह लगभग 300 डकैतियां होती थीं. उन्होंने अपराधियों का एक विस्तृत डायरेक्टरी तैयार किया, जिसमें डाकुओं, हत्यारों और बलात्कारियों को वर्गीकृत किया गया. पुलिस अधिकारियों को मुठभेड़ों की पूर्ण स्वतंत्रता दी और वाहन लूट को रोकने के लिए सादे कपड़ों में डाकुओं को गोली मारने का आदेश दिया. इससे रोहतास की छवि बदल गई.

उल्लंघनों पर चलती लाठियां

पलामू जैसे माफिया राज वाले जिले में स्थानांतरित होने पर उन्होंने विधायक विनोद सिंह जैसे 80 मामलों में आरोपी को सरकारी विमान से उतारकर गिरफ्तार किया. पटना के एसएसपी के रूप में उन्होंने राजनीतिक हस्तक्षेप को नकारा और छह महीने की समयसीमा में सात दिनों में शहर से अपराधियों को साफ कर दिया. प्रसिद्ध बॉबी मर्डर केस में उन्होंने शव का पोस्टमॉर्टम करवाकर जहर से हत्या का खुलासा किया.

वे अपराधियों को सार्वजनिक रूप से घुमाते, छोटे-मोटे उल्लंघनों पर लाठियां चलाते और ट्रैफिक नियमों का कड़ाई से पालन करवाते. लालू यादव प्रशासन के ‘जंगल राज’ के विरुद्ध उनकी यह लड़ाई एक बाधा बनी, जिसके कारण उन्हें कई बार स्थानांतरित करने के प्रयास हुए, लेकिन वे सफल रहे. उनकी पुलिसिंग की कहानी पुस्तकदमन तक्षकों का में संकलित है.

महावीर मंदिर से राम मंदिर तक

सेवानिवृत्ति के बाद आचार्य कुणाल ने धार्मिक क्षेत्र में क्रांति ला दी. 1980 के दशक में एक ट्रेन यात्रा के दौरान पटना के महावीर मंदिर की जर्जर स्थिति जानकर उन्होंने इसे पुनर्जीवित करने का संकल्प लिया. महावीर मंदिर ट्रस्ट के संस्थापक सचिव के रूप में उन्होंने इसे एक जन आंदोलन बना दिया. अभिजात वर्ग और आम जनता के दान से मंदिर को देश के प्रमुख तीर्थस्थलों में परिवर्तित किया. ट्रस्ट ने महावीर अरोग्य संस्थान, कैंसर इंस्टीट्यूट, वात्सल्य अस्पताल, हृदय अस्पताल, नेत्रालय, विशालनाथ अस्पताल और वरिष्ठ नागरिक अस्पताल जैसे कई स्वास्थ्य संस्थान स्थापित किए.

BSBRT के रहे अध्यक्ष

वे बिहार राज्य धार्मिक न्यास बोर्ड (बीएसबीआरटी) के अध्यक्ष रहे. उन्होंने हजारों मंदिरों का जीर्णोद्धार कराया, जैसे पूर्वी चंपारण का रामायण मंदिर (500 करोड़ रुपये), मुजफ्फरपुर का गरीब नाथ मंदिर, वैशाली का चतुर्मुख महादेव मंदिर, बोधगया का जगन्नाथ मंदिर और हाजीपुर का राम चौरा मंदिर. दलित पुजारियों की नियुक्ति में अग्रणी भूमिका निभाई, उन्होंने अयोध्या से एक दलित पुजारी को महावीर मंदिर में नियुक्त किया, जबकि रामई राम जैसे प्रयासों को रोका. मंदिर आरक्षित भूमि की बिक्री पर प्रतिबंध लगाया.

राम जन्मभूमि आंदोलन के प्रमुख स्तंभ

राष्ट्रीय स्तर पर वे राम जन्मभूमि आंदोलन के प्रमुख स्तंभ थे. वी.पी. सिंह, चंद्रशेखर और पी.वी. नरसिम्हा राव के अधीन ओएसडी के रूप में अदालत में साक्ष्य प्रस्तुत किए, जो सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्वीकार किए गए. उनकी पुस्तकेंअयोध्या: बियॉन्ड अड्यूस्ड एविडेंस औरअयोध्या रिविजिटेड (पूर्व मुख्य न्यायाधीश एम.एन. वेंकटचलैया और जी.बी. पटनायक के फोरवर्ड के साथ) मार्क्सवादी इतिहासकारों की भूमिका पर प्रकाश डालती हैं. वे राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य थे; महावीर मंदिर ने अयोध्या के लिए 10 करोड़ रुपये दान दिए और वहां राम रसोई चलाकर तीर्थयात्रियों को निःशुल्क भोजन प्रदान कर रहा है. संस्कृत में पारंगत कुणाल इतिहास, धर्म और विधि के प्रेमी थे.

एक बहुआयामी व्यक्तित्व की चिरस्थायी छाप

आचार्य किशोर कुणाल एक सुपरकॉप, विद्वान और राम भक्त थे, जिनकी बिहार के प्रशासनिक और सामाजिक-धार्मिक क्षेत्रों में गहरी छाप है. महावीर मंदिर को देश के सबसे बड़े मंदिरों में से एक बनाने का श्रेय उन्हें जाता है. दलित पुजारियों की नियुक्ति और मंदिर जीर्णोद्धार से उन्होंने सामाजिक समावेश को मजबूत किया. बिहार में शायद ही कोई ऐसा व्यक्तित्व हो, जिसका प्रभाव सभी वर्गों पर इतना व्यापक हो.

ये भी पढ़ें:बागेश्वर धाम सरकार: पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की अद्भुत यात्रा

-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read


Kanya Sumangla Mission Shakti Digital