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मुदलियर बंधु: सरदार पटेल के आदेश पर लक्षद्वीप को बनाया भारत का हिस्सा

विभाजन के बाद पाकिस्तान ने इन द्वीपों पर दावा ठोकने के लिए एक जहाज भेजा था. लेकिन भारत के ‘लौह पुरुष’ सरदार वल्लभभाई पटेल की दूरदर्शिता और त्वरित कार्रवाई ने इन द्वीपों को भारत का अभिन्न अंग बना दिया.

Mudaliar brothers
Vijay Ram Edited by Vijay Ram

स्वतंत्रता के ठीक बाद, जब नवजात भारत रियासतों के विलय और विभाजन की चुनौतियों से जूझ रहा था, तब एक छोटे लेकिन रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण द्वीपसमूह पर भी खतरा मंडरा रहा था. लक्षद्वीप, जो उस समय लक्काडिव, मिनिकॉय और अमिनिदीवी द्वीपों के नाम से जाना जाता था, मुस्लिम बहुल क्षेत्र होने के कारण पाकिस्तान की नजर में आ गया. विभाजन के बाद पाकिस्तान ने इन द्वीपों पर दावा ठोकने के लिए एक जहाज भेजा था. लेकिन भारत के ‘लौह पुरुष’ सरदार वल्लभभाई पटेल की दूरदर्शिता और त्वरित कार्रवाई ने इन द्वीपों को भारत का अभिन्न अंग बना दिया.

विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान

इस महत्वपूर्ण मिशन में सरदार पटेल ने दो प्रमुख व्यक्तियों, अर्कोट रामस्वामी मुदलियर और उनके जुड़वां भाई अर्कोट लक्ष्मणस्वामी मुदलियर की मदद ली. ये दोनों भाई, जिन्हें ‘अर्कोट के जुड़वां तारे’ (Twin Stars of Arcot) कहा जाता है, तमिलनाडु के प्रसिद्ध व्यक्तित्व थे. 14 अक्टूबर 1887 को जन्मे इन जुड़वां भाइयों ने सार्वजनिक जीवन में लंबी पारी खेली और विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दिया.

पाक के दावे को किया विफल

सरदार पटेल को जब पाकिस्तानी जहाज की जानकारी मिली, तो उन्होंने तुरंत मुदलियर भाइयों को निर्देश दिया कि वे त्रावणकोर (वर्तमान केरल का हिस्सा) के अधिकारियों से संपर्क कर पुलिस बल और कर्मचारियों को लक्षद्वीप भेजें. भाइयों ने ट्रावणकोर के कलेक्टर को संदेश पहुंचाया, जिसके फलस्वरूप एक भारतीय दल द्वीपों पर पहुंचा और तिरंगा फहराया. जब पाकिस्तानी जहाज वहां पहुंचा, तो भारतीय ध्वज देखकर उसे वापस लौटना पड़ा. इस तरह, सरदार पटेल की सूझबूझ और मुदलियर भाइयों की सक्रिय भूमिका से लक्षद्वीप पर पाकिस्तान का दावा विफल हो गया.

एक-दूसरे से उपलब्धियों में करते थे स्पर्धा

अर्कोट रामस्वामी मुदलियर मैसूर रियासत के अंतिम दीवान थे और संयुक्त राष्ट्र आर्थिक एवं सामाजिक परिषद के पहले अध्यक्ष बने. वे एक कुशल राजनयिक और राजनीतिज्ञ थे. वहीं, उनके भाई डॉ. अर्कोट लक्ष्मणस्वामी मुदलियर एक प्रसिद्ध चिकित्सक और शिक्षा विद थे, जिन्होंने मद्रास विश्वविद्यालय के कुलपति के रूप में 27 वर्षों तक सेवा की. यह भारतीय विश्वविद्यालयों में सबसे लंबा कार्यकाल है. दोनों भाइयों ने शिक्षा, स्वास्थ्य, कूटनीति और सार्वजनिक नीतियों में अमिट योगदान दिया. वे एक-दूसरे से उपलब्धियों में स्पर्धा करते थे, लेकिन दोनों का लक्ष्य देशसेवा ही था.

पटेल के निर्देशन में लक्षद्वीप को किया सुरक्षित

सरदार वल्लभभाई पटेल की पुण्यतिथि (15 दिसंबर) पर हम इन ‘अर्कोट के जुड़वां तारों’ को याद करते हैं, जिन्होंने पटेल के निर्देशन में लक्षद्वीप को भारत के लिए सुरक्षित किया. आज लक्षद्वीप न केवल रणनीतिक महत्व का है, बल्कि अपनी प्राकृतिक सुंदरता (नीले समुद्र, कोरल रीफ्स और शांत बीचों) के लिए विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल बन चुका है.

यह कहानी हमें याद दिलाती है कि स्वतंत्र भारत के निर्माण में कितने अनसुने नायकों का योगदान था. सरदार पटेल और मुदलियर भाइयों जैसे व्यक्तियों की दूरदर्शिता ने ही भारत को एकजुट और मजबूत बनाया.

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-भारत एक्सप्रेस



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