Bharat Express DD Free Dish

दूरदर्शन: आधी आबादी की सशक्त गाथा, एक प्रेरणादायी विमर्श

संगीता अग्रवाल की नवीनतम पुस्तक दूरदर्शन: आधी आबादी की सशक्त गाथा (वाणी प्रकाशन, 2025) न केवल भारत के लोक प्रसारक माध्यमों के इतिहास को उजागर करती है, बल्कि उन अदृश्य नायिकाओं की अनकही कहानियों को भी सामने लाती है.

Doordarshan
Edited by Vaibhav Gupta

संगीता अग्रवाल की नवीनतम पुस्तक Doordarshan: आधी आबादी की सशक्त गाथा (वाणी प्रकाशन, 2025) न केवल भारत के लोक प्रसारक माध्यमों के इतिहास को उजागर करती है, बल्कि उन अदृश्य नायिकाओं की अनकही कहानियों को भी सामने लाती है, जिन्होंने दूरदर्शन को आकार दिया.

लेखिका की पृष्ठभूमि खुदमें एक प्रेरणा

190 पृष्ठों वाली यह हिंदी पुस्तक, जो वर्तमान में डीडी न्यूज की वरिष्ठ समाचार संपादक संगीता अग्रवाल द्वारा लिखी गई है, महिलाओं के योगदान पर केंद्रित है. लेखिका की पृष्ठभूमि स्वयं प्रेरणादायक है. आपातकाल के दौरान जन्मीं संगीता को जयप्रकाश नारायण और मधु दंडवते जैसे दिग्गजों ने नाम दिया, और उनकी पिछली रचनाएं जैसे एक से बढ़कर एक शिखर महिलाएं एवं मीडिया में महिलाओं की भूमिका इस पुस्तक की नींव को मजबूत बनाती हैं.

पुस्तक का मूल स्वर लोकतंत्र की यात्रा से जुड़ा है. आजादी के ठीक बाद आकाशवाणी और दूरदर्शन की स्थापना को लेखिका महात्मा गांधी के शांति संदेश से जोड़ती हैं, जो विभाजन की त्रासदी के बीच प्रसारित हुआ था. वर्तमान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ‘मन की बात’ कार्यक्रम इसी परंपरा का विस्तार है. लेकिन पुस्तक का केंद्रबिंदु ‘आधी आबादी’, यानी महिलाएं हैं.

प्रसार भारती की गरिमा

Doordarshan, डीडी न्यूज और डीडी इंडिया में विभिन्न पदों पर कार्यरत महिलाओं के साक्षात्कार इसकी रीढ़ हैं. स्वर्गीय प्रतिमा पुरी को छोड़कर सभी महिलाओं से प्रत्यक्ष बातचीत पर आधारित होने से हर शब्द प्रामाणिक लगता है. ये साक्षात्कार न केवल उनके संघर्षों, अनुशासन और योगदान को उजागर करते हैं, बल्कि प्रसार भारती की गरिमा को कैसे बरकरार रखा, यह भी दर्शाते हैं. फोटोग्राफ्स के साथ प्रस्तुत ये गाथाएं पुस्तक को जीवंत बनाती हैं, मानो पाठक स्वयं उन महिलाओं की आवाज़ सुन रहा हो.

लेखिका की शैली सरल, प्रवाहपूर्ण और संवादात्मक है, जो इसे पठनीय बनाती है. यह मात्र इतिहासकार नहीं, बल्कि प्रेरणा स्रोत है. आने वाली पीढ़ियों के लिए एक दस्तावेज, जो बताता है कि कैसे महिलाओं ने जनसंचार के क्षेत्र में सशक्तिकरण की मिसाल कायम की. सूचना और प्रसारण मंत्रालय के संदर्भ में यह पुस्तक महिला सशक्तीकरण की सशक्त गाथा के रूप में उभरती है, जहां समर्पण और प्रेरणा की कहानियां हर पृष्ठ पर झलकती हैं.

पुरुष योगदान का न्यूनतम उल्लेख

कुछ कमियां भी हैं, चूंकि यह साक्षात्कार आधारित है, इसलिए कुछ हिस्से दोहरावपूर्ण लग सकते हैं. इसमें पुरुष योगदान का उल्लेख न्यूनतम है, जो शायद जानबूझकर ‘आधी आबादी’ पर फोकस के कारण है. फिर भी, ये छोटी-मोटी बातें पुस्तक की समग्र ताकत को कम नहीं करतीं. 495 रुपये की कीमत में उपलब्ध यह पुस्तक पत्रकारों, इतिहास प्रेमियों और महिला सशक्तीकरण के अध्येताओं के लिए अनिवार्य है.

कुल मिलाकर, ‘दूरदर्शन: आधी आबादी की सशक्त गाथा’ एक ऐसी पुस्तक है जो न केवल अतीत को संजोती है, बल्कि भविष्य को प्रेरित करती है. चार में से चार सितारे! यदि आप भारतीय मीडिया के पीछे की महिलाओं की दुनिया जानना चाहते हैं, तो इसे अवश्य पढ़ें.

ये भी पढ़ें: क्या अब हफ्ते में मिलेंगी तीन छुट्टियां, 4 दिन ही करना होगा काम, क्या कहता है New Labour Code?

-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read