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रेडियो सिलोन के 100 वर्ष : एक टूटे हुए क्षेत्र को एक साझा धुन पर जोड़ने की कहानी

श्रीलंका का रेडियो सिलोन (अब SLBC) अपनी 100वीं वर्षगांठ मना रहा है. 16 दिसंबर 1925 को कोलंबो से प्रसारण शुरू करने वाला यह एशिया का सबसे पुराना रेडियो स्टेशन, दशकों तक दक्षिण एशिया के घरों में संगीत और एकता की लहरें फैलाता रहा.

श्रीलंका का रेडियो सिलोन (अब श्रीलंका ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन – SLBC) अपनी 100वीं वर्षगांठ मना रहा है. एशिया का सबसे पुराना रेडियो स्टेशन, जो 16 दिसंबर 1925 को कोलंबो से आधिकारिक प्रसारण शुरू करने वाला पहला स्टेशन था, ने दशकों तक दक्षिण एशिया के लाखों घरों में संगीत और एकता की लहरें फैलाईं.

शुरुआती दौर और प्रसिद्धि की उड़ान

ब्रिटिश सीलोन में 1920 के दशक में सीलोन वायरलेस क्लब ने प्रयोगात्मक प्रसारण शुरू किए. इंजीनियर एडवर्ड हार्पर ने जर्मन सबमरीन से मिले उपकरणों से पहला ट्रांसमीटर बनाया. द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान इसे रेडियो SEAC के नाम से इस्तेमाल किया गया, फिर 1949 में रेडियो सिलोन के रूप में संगठित हुआ.

1950-60 के दशक में यह “एयरवेव्स का राजा” बन गया. कोलंबो प्लान के तहत ऑस्ट्रेलियाई विशेषज्ञ क्लिफर्ड डॉड ने इसे व्यावसायिक रूप दिया. शक्तिशाली शॉर्टवेव ट्रांसमीटरों से इसकी आवाज़ भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश तक साफ पहुंचती थी.

भारत में लोकप्रियता का राज: बिनाका गीतमाला

ऑल इंडिया रेडियो (AIR) के तत्कालीन मंत्री बी.वी. केसकर ने 1952 में फिल्मी गीतों पर प्रतिबंध लगा दिया, उन्हें “अश्लील और पश्चिमी” बताते हुए. क्लासिकल और लोक संगीत तक सीमित AIR के सामने रेडियो सिलोन ने मौका भुनाया. 3 दिसंबर 1952 को शुरू हुआ ‘बिनाका गीतमाला’ — हिंदी फिल्मी गीतों का साप्ताहिक काउंटडाउन. अमीन सयानी की गर्मजोशी भरी आवाज़ में शुरुआत होती:

“नमस्कार बहनों और भाइयों, मैं आपका दोस्त अमीन सयानी बोल रहा हूं… और आप सुन रहे हैं बिनाका गीतमाला!”

मुंबई में रिकॉर्ड की गई कमेंट्री टेप कोलंबो भेजी जाती, जहां गाने जोड़कर प्रसारित किया जाता. हर बुधवार शाम 8 बजे सड़कें सुनसान हो जातीं. परिवार रेडियो के पास बैठकर सुनते. सप्ताह में 65,000 तक पत्र आते. प्रशंसक क्लब बनते. अमीन सयानी ने 42 साल तक (1952-1988) इसे रेडियो सिलोन पर संचालित किया, फिर 1989-1994 तक विविध भारती पर. यह शो सिर्फ संगीत नहीं, बल्कि बॉलीवुड को वैश्विक पहचान देने वाला माध्यम बना. लता मंगेशकर, मोहम्मद रफ़ी, किशोर कुमार, आशा भोसले जैसे कलाकारों की लोकप्रियता इसमें बढ़ी.

विभाजित क्षेत्र में साझा सांस्कृतिक मंच

1947 के विभाजन के बाद धर्म, भाषा और सीमाओं से टूटे दक्षिण एशिया में रेडियो सिलोन एक दुर्लभ साझा जगह था. हिंदी फिल्मी गाने, पश्चिमी पॉप और स्थानीय संगीत सुनकर कराची से कर्नाटक तक लोग एक साथ जुड़ते. इसने बॉलीवुड को वैश्विक बनाया और एल्विस प्रेस्ली जैसे कलाकारों को क्षेत्र में पेश किया. स्टेशन के पास एशिया की सबसे बड़ी संगीत लाइब्रेरी है, जिसमें भारत में भी दुर्लभ हिंदी रिकॉर्डिंग्स हैं. 1967 में सीलोन ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन और 1972 में SLBC बनकर यह FM, टीवी और डिजिटल में ढल गया. आज भी कई भाषाओं में प्रसारण जारी है.

मधुर यादें

रेडियो सिलोन की 100 साल की यात्रा बताती है कि ध्वनि की लहरें सीमाओं को तोड़ सकती हैं. एक छोटे द्वीप से निकली आवाज ने पूरे उपमहाद्वीप को संगीत के माध्यम से जोड़ा. आज भी पुराने रेडियो पर उस दौर की मधुर यादें गूंजती हैं. “बहनों और भाइयों… यह थी बिनाका गीतमाला!” अमीन सयानी की यह आवाज आज भी दिलों में बसी है.

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-भारत एक्सप्रेस



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