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अडानी का अमेरिका के साथ विवाद खत्म, 275 मिलियन डॉलर के सेटलमेंट से भारत-US संबंधों को मिलेगी रफ्तार

अडानी एंटरप्राइजेज ने ईरान प्रतिबंध उल्लंघन मामले में US ट्रेजरी (OFAC) के साथ 275 मिलियन डॉलर का सेटलमेंट किया है. USISPF के अध्यक्ष मुकेश अघी ने इसे भारत-अमेरिका आर्थिक संबंधों और 10 अरब डॉलर के नए निवेश के लिए एक बड़ा कदम बताया है.

Adani Group

अडानी ग्रुप और अमेरिका के बीच चल रहे कानूनी विवादों के बादल अब पूरी तरह छंटने लगे हैं. ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों के कथित उल्लंघन मामले में ‘अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड’ (Adani Enterprises Limited) ने अमेरिका के ट्रेजरी विभाग के ‘ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल’ (OFAC) के साथ 275 मिलियन डॉलर (लगभग 2,300 करोड़ रुपये) का समझौता (Settlement) कर लिया है. इस बड़े कदम के बाद, ‘यूएस-इंडिया स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप फोरम’ (USISPF) ने दावा किया है कि इस कानूनी मामले के सुलझने से दोनों देशों के बीच बढ़ती आर्थिक साझेदारी की एक बड़ी बाधा दूर हो गई है.

USISPF चीफ मुकेश अघी का बड़ा बयान

USISPF के अध्यक्ष और सीईओ डॉ. मुकेश अघी ने इस सेटलमेंट का स्वागत करते हुए इसे एक बेहद सकारात्मक कदम बताया है. उन्होंने कहा कि अडानी मामले के बंद होने से दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग और ज्यादा मजबूत होगा.

डॉ. अघी के मुताबिक, विवाद सुलझने से यह एक ‘डिस्ट्रैक्शन’ (ध्यान भटकाने वाला मुद्दा) खत्म हो गया है और अब निवेशकों का पूरा फोकस नए मौकों पर होगा. इससे न केवल भारत-अमेरिका व्यापारिक रिश्तों में सुधार होगा, बल्कि अमेरिका में ताज़ा भारतीय निवेश (Fresh Indian Investments) को भी जबरदस्त बढ़ावा मिलेगा.

10 अरब डॉलर का निवेश और ‘मेगा-प्लान’

मुकेश अघी ने जानकारी दी कि अडानी एंटरप्राइजेज का अमेरिका में 10 अरब डॉलर के निवेश का प्रस्ताव, अमेरिकी बाजार में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की भारतीय कंपनियों की बढ़ती दिलचस्पी को दिखाता है. यह विशाल निवेश हाल ही में की गई उस घोषणा के बिल्कुल अनुरूप है, जिसमें कहा गया था कि भारतीय कंपनियां जल्द ही अमेरिका के विभिन्न सेक्टरों (मैन्युफैक्चरिंग, रिन्यूएबल एनर्जी और टेक्नोलॉजी) में कुल मिलाकर 20.5 अरब डॉलर से ज्यादा का निवेश करने वाली हैं.

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दोनों देशों को मिलेगा फायदा

USISPF चीफ ने जोर देकर कहा कि पिछले एक दशक में भारत और अमेरिका ने व्यापार, रक्षा, तकनीक और ऊर्जा के क्षेत्र में अपना सहयोग काफी बढ़ाया है. भारतीय व्यवसाय अब अमेरिका को एक दीर्घकालिक (Long-term) रणनीतिक और आर्थिक साझेदार के रूप में देख रहे हैं. अडानी एंटरप्राइजेज का यह बड़ा सेटलमेंट और निवेश का ऐलान इस बात का साफ संकेत है कि आने वाले समय में दोनों देशों के बीच रोजगार सृजन (Job Creation), बुनियादी ढांचे के विकास और लंबी अवधि की आर्थिक ग्रोथ में एक शानदार उछाल देखने को मिलेगा. इस फैसले ने निवेशकों का भरोसा एक बार फिर से बढ़ा दिया है.



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