भारत को ‘क्लीन एनर्जी’ का ग्लोबल हब बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया गया है. अडानी ग्रीन एनर्जी की सब्सिडियरी कंपनी ‘अडानी हाइड्रो एनर्जी इलेवन लिमिटेड’ अब आंध्र प्रदेश के वाईएसआर कडपा जिले में विशालकाय 2,250 MW का ‘गांडिकोटा-2 पंप्ड स्टोरेज प्रोजेक्ट’ (Pumped Storage Project) विकसित करने जा रही है. मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू की अध्यक्षता वाले ‘स्टेट इन्वेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड’ ने हाल ही में ‘आंध्र प्रदेश इंटीग्रेटेड क्लीन एनर्जी पॉलिसी 2024’ के तहत इस मेगा प्रोजेक्ट को अपनी आधिकारिक मंजूरी दे दी है.
कहां बनेगा यह देश का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट?
अधिकारियों के मुताबिक, इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को वाईएसआर कडपा जिले के लॉर्ड बालाजी दोंथी कोना पीएसपी पार्क (Lord Balaji Donthi Kona PSP Park) में स्थापित किया जाएगा.
बनकर तैयार होने के बाद, गांडिकोटा-2 प्रोजेक्ट देश की सबसे बड़ी पंप्ड स्टोरेज सुविधाओं में से एक होगा. यह आंध्र प्रदेश में रिन्यूएबल एनर्जी (अक्षय ऊर्जा), ग्रीन हाइड्रोजन, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, एडवांस मैन्युफैक्चरिंग और अत्याधुनिक एआई (AI) डेटा सेंटर्स के तेजी से बढ़ते इकोसिस्टम को एक बड़ी ताकत देगा.
कैसे काम करता है ‘पंप्ड स्टोरेज’ सिस्टम?
सौर (Solar) और पवन (Wind) ऊर्जा पर निर्भर पावर सिस्टम में ‘पंप्ड स्टोरेज प्रोजेक्ट’ एक विशाल बैटरी या ‘एनर्जी बैंक’ की तरह काम करते हैं. जब बिजली की मांग कम (Off-peak hours) होती है, तब यह सिस्टम अतिरिक्त सौर और पवन ऊर्जा का उपयोग करके पानी को ऊंचाई पर बने डैम (जलाशय) में पंप कर देता है. जब बिजली की मांग बहुत ज्यादा (High demand) होती है, तो उसी पानी को टर्बाइन के जरिए नीचे गिराकर तुरंत बिजली पैदा की जाती है.
विशेषज्ञों का मानना है कि 24 घंटे (Round-the-clock) स्थिर और निर्बाध क्लीन एनर्जी सप्लाई के लिए पंप्ड स्टोरेज बेहद जरूरी है. अडानी ग्रुप अपनी रिन्यूएबल एनर्जी रणनीति के तहत इसी मॉडल को आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में तेजी से फैला रहा है.
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72 महीने का लक्ष्य और 7.5 लाख नौकरियां
आंध्र प्रदेश की ‘इंटीग्रेटेड क्लीन एनर्जी पॉलिसी 2024’ राज्य में भारी बदलाव ला रही है. इस नीति का लक्ष्य लगभग ₹10 लाख करोड़ का निवेश आकर्षित करना और करीब 7.5 लाख नौकरियां पैदा करना है. सरकार ने अडानी के इस प्रोजेक्ट के लिए पानी के आवंटन और इंसेंटिव्स को भी मंजूरी दे दी है. अधिकारियों को उम्मीद है कि नीतिगत स्थिरता और तेजी से मिल रही मंजूरियों के दम पर यह ‘गांडिकोटा-2’ प्रोजेक्ट अगले 72 महीनों के भीतर पूरी तरह से बनकर तैयार हो जाएगा.
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