Adani Ports TNFD Framework: समुद्र की लहरों से लेकर धरती की हरियाली तक, विकास की रफ्तार को अब नई दिशा मिल रही है. भारत की सबसे बड़ी ट्रांसपोर्ट यूटिलिटी आदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन लिमिटेड (APSEZ) ने यह साबित कर दिया है कि आर्थिक प्रगति और पर्यावरण संरक्षण एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हैं. आदाणी पोर्ट्स एंड एसईजेड (APSEZ) ने TNFD फ्रेमवर्क अपनाते हुए भारत की पहली ट्रांसपोर्ट यूटिलिटी बनने का गौरव हासिल किया है. यह कदम समुद्री पारिस्थितिकी संरक्षण और सतत विकास की दिशा में बड़ा बदलाव लाएगा.
इस पहल के साथ APSEZ भारत की पहली इंटीग्रेटेड ट्रांसपोर्ट यूटिलिटी बन गई है, जिसने TNFD फ्रेमवर्क को अपनाया है. यह कदम प्रकृति-सकारात्मक (Nature Positive) इंफ्रास्ट्रक्चर विकास की दिशा में एक नया मानक तय करता है.
2026 से शुरू होंगी TNFD मानकों के अनुरूप रिपोर्टिंग
आदाणी पोर्ट्स ने कहा कि कंपनी अब अपने कॉर्पोरेट रिपोर्टिंग में TNFD मानकों को लागू करेगी और प्रकृति पर प्रभाव, जोखिम और अवसरों से जुड़ी जानकारी पारदर्शी तरीके से सार्वजनिक करेगी. कंपनी पहले से ही जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय जोखिमों पर काम कर रही है. अब तक APSEZ ने 4200 हेक्टेयर मैंग्रोव (समुद्री वनस्पति) लगाए हैं और अतिरिक्त 3000 हेक्टेयर क्षेत्र को संरक्षण में लिया है. यह भारत में मैंग्रोव संरक्षण करने वाला सबसे बड़ा निजी क्षेत्र का संगठन बन गया है. कंपनी के सीईओ बोले ने कहा कि-
‘हम मानते हैं कि जिम्मेदार कारोबारी तरीके ही लंबे समय की सफलता का आधार हैं. TNFD फ्रेमवर्क को अपनाना हमारे लिए COP30 में प्रकृति संरक्षण की दिशा में मजबूत कदम है. हम प्रकृति से जुड़े जोखिमों को रणनीतिक रूप से देखते हैं और इन्हें अपने फैसलों का हिस्सा बना रहे हैं.’
आदाणी पोर्ट्स ने कायम की मिसाल
आज जब दुनिया जलवायु परिवर्तन और समुद्री प्रदूषण से जूझ रही है, आदाणी पोर्ट्स ने 4200 हेक्टेयर मैंग्रोव (समुद्री वनस्पति) लगाकर और 3000 हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र का संरक्षण करके एक मिसाल कायम की है. ये हरे-भरे मैंग्रोव न सिर्फ समुद्र की लहरों को संतुलन देते हैं बल्कि तूफानों से तटीय इलाकों को सुरक्षा कवच भी प्रदान करते हैं. इस पहल से कंपनी उन चुनिंदा वैश्विक बंदरगाह संचालकों की श्रेणी में शामिल हो गई है जो समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र और जैव विविधता की रक्षा के लिए वास्तविक प्रयास कर रहे हैं.
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बंदरगाहों में ‘हरित विकास’ की नई लहर
आदाणी पोर्ट्स आज 15 बड़े बंदरगाहों, 12 मल्टी-मोडल लॉजिस्टिक पार्कों और 3.1 मिलियन वर्गफुट वेयरहाउसिंग स्पेस के साथ काम कर रही है. कंपनी की कार्गो हैंडलिंग क्षमता 633 मिलियन टन प्रति वर्ष है — जो भारत के कुल पोर्ट वॉल्यूम का लगभग 28% हिस्सा है. 2030 तक इसका लक्ष्य 1 बिलियन टन कार्गो हैंडलिंग हासिल करने का है, लेकिन अब यह विकास सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि प्राकृतिक और टिकाऊ (Sustainable) भी होगा.
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