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Agri Business Summit 2025: दिल्‍ली में कृषि शिखर सम्मेलन का समापन, किसानों के लिए नई टेक्‍नोलॉजी-इनोवेशन पर रहा फोकस

नई दिल्ली में कृषि व्यवसाय शिखर सम्मेलन 2025 संपन्न हुआ. इसमें जल सुरक्षा और किसान-केंद्रित इनोवेशन पर जोर दिया गया. विशेषज्ञों ने कृषि जीडीपी तिगुना करने के लिए नई तकनीक और गुणवत्ता वाले इनपुट की मांग की.

Agribusiness Summit 2025
Vijay Ram Edited by Vijay Ram

Agri Business Summit 2025 Update: नई दिल्ली में 8 दिसंबर 2025 को PHDCCI द्वारा आयोजित एग्रीबिजनेस समिट 2025 का समापन हो गया. यह सम्मेलन ताज पैलेस होटल में हुआ. इसमें जल सुरक्षा, किसान-केंद्रित इनोवेशन और कृषि क्षेत्र में बड़े सुधारों पर जोर दिया गया. नेता, नीति निर्माता और विशेषज्ञों ने पानी के संसाधनों को प्राथमिकता दी. उन्होंने किसानों को राष्ट्रीय विकास का मुख्य चालक बनाने की बात कही.

सम्मेलन का लक्ष्य चर्चाओं को व्यावहारिक समाधानों में बदलना था. यह विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण से जुड़ा हुआ है. नीति आयोग के सदस्य प्रोफेसर रमेश चंद ने मुख्य भाषण दिया. उनका विषय था, “नई तकनीक और गुणवत्ता वाले कृषि इनपुट से कृषि जीडीपी को तिगुना करना.” उन्होंने इस लक्ष्य को हासिल करने की रणनीतियां बताईं.

डॉ. राज भूषण चौधरी का संबोधन

समापन सत्र में प्रमुख वक्ताओं ने कृषि परिवर्तन की प्रतिबद्धता दोहराई. जल शक्ति राज्य मंत्री डॉ. राज भूषण चौधरी ने जल की महत्वपूर्ण भूमिका पर भाषण दिया. उन्होंने चेतावनी दी कि जलवायु परिवर्तन से बाढ़ आ रही हैं. इससे भूजल रिचार्ज बाधित हो रहा है. प्रदूषण से मिट्टी और पानी दूषित हो रहे हैं. उन्होंने कहा कि पीने के पानी का केवल 4 प्रतिशत ही सुरक्षित बचा है. उन्होंने पानी को इंटरनेट कनेक्टिविटी जितना जरूरी बताया. सतत जल प्रबंधन को भारत की कृषि भविष्य की नींव कहा.

डॉ. राज भूषण चौधरी ने कहा, “कृषि के बिना विश्वसनीय जल उपलब्धता के बिना खेती संभव नहीं.”

किसानों की आकांक्षाओं से जुड़ाव: डॉ. पीके

कृषि आयुक्त डॉ. पीके सिंह ने किसानों की आकांक्षाओं को विज्ञान-आधारित कार्रवाइयों से जोड़ने की अपील की. उन्होंने 2047 तक आत्मनिर्भर कृषि प्रणाली बनाने पर जोर दिया. जीएम कॉटन अपनाने के सबक साझा किए. पारंपरिक बीज प्रजातियों को बेहतर बनाने की जरूरत बताई. उच्च लाभ वाले फसलों, बागवानी और अच्छी कृषि प्रथाओं को बढ़ावा देने को कहा. जलवायु लचीलापन, वित्तीय पहुंच और पोषण सुरक्षा जैसी चुनौतियों पर चर्चा की. किसानों, शोधकर्ताओं और उद्योग के बीच विश्वास बनाने की बात कही.

रसायन ‘पौधों की दवा’, ‘कीटनाशक’ नहीं

क्रिस्टल क्रॉप प्रोटेक्शन लिमिटेड के सीएमडी अंकुर अग्रवाल ने ‘किसान पहले’ दर्शन को बढ़ावा दिया. उन्होंने कृषि-इनपुट कंपनियों के बारे में गलत धारणाओं को खारिज किया. रसायनों को ‘पौधों की दवा’ कहा, न कि ‘कीटनाशक.’ अवशेष-मुक्त, निर्यात-तैयार तकनीकों के लिए उत्कृष्टता केंद्रों की मांग की. उद्योग निवेश की रक्षा करने वाले इनोवेशन स्‍ट्रक्‍चर की बात की.

PHDCCI की एग्रीबिजनेस समिति के चेयर डॉ. आरजी अग्रवाल ने विस्तार प्रणाली, हाइब्रिड बीज उपलब्धता और उत्पाद पंजीकरण में खामियों पर इशारा किया. मंजूरी प्रक्रिया धीमी है. नकली इनपुट से उत्पादकता घट रही है. उन्होंने आपूर्ति श्रृंखलाओं को आधुनिक बनाने को कहा. अनुमान लगाया कि मजबूत नीति और बुनियादी ढांचे से तीन साल में कृषि निर्यात दोगुना होकर 100 अरब डॉलर पहुंच सकता है.

सम्मेलन एकजुट संकल्प के साथ खत्म हुआ. जल सुरक्षा और किसान-केंद्रित प्रगति के लिए व्यावहारिक समाधान बनाने का आह्वान किया गया. प्रतिभागियों ने सहयोग, इनोवेशन और किसान समर्थन से लंबे समय तक परिवर्तन की उम्मीद जताई.



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