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DIPAM ने PSU शेयरों को डिविडेंड पावरहाउस घोषित किया; निजी क्षेत्र से अल्पसंख्यक निवेशकों के लिए बढ़ाने को कहा कदम

निवेश और लोक प्रबंधन विभाग (DIPAM) ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है कि केंद्रीय सार्वजानिक उपक्रम (CPSEs) भारत की कुल बाजार पूंजीकरण का महज 10% होने के बावजूद, FY25 में कुल डिविडेंड का 25% (रिकॉर्ड 1.5 लाख करोड़ रुपये) योगदान दिया.

Edited by Shalini

DIPAM: निवेश और लोक प्रबंधन विभाग (DIPAM) ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है कि केंद्रीय सार्वजानिक उपक्रम (CPSEs) भारत की कुल बाजार पूंजीकरण का महज 10% होने के बावजूद, FY25 में कुल डिविडेंड का 25% (रिकॉर्ड 1.5 लाख करोड़ रुपये) योगदान दिया. सरकार का हिस्सा अकेले 74,016 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष के 63,748 करोड़ रुपये से अधिक है. “ये सिर्फ आंकड़े नहीं हैं; ये PSUs की असंख्य संभावनाओं और समृद्धि के लोकतंत्रीकरण का प्रमाण हैं,” DIPAM सचिव अरुणीश चावला ने घोषणा करते हुए म्यूचुअल फंड्स से इन “छुपे हीरों” को अपने पोर्टफोलियो में शामिल करने का आग्रह किया.

मुंबई मिशन: DIPAM, PSUs को स्थिरता का आधार स्तंभ बताने को तैयार

चावला की मुंबई स्थित प्रमुख म्यूचुअल फंड हाउसेज के साथ आगामी बैठक का उद्देश्य PSU शेयरों के प्रति पुराने पूर्वाग्रहों को तोड़ना है. “रिटेल निवेशक, वरिष्ठ नागरिक और अल्पसंख्यक हितधारक PSUs के 30% डिविडेंड भुगतान अनुपात (जो निजी क्षेत्र के औसत से लगभग 50% अधिक है) से वंचित क्यों रहें?” उन्होंने सवाल उठाया. संदेश स्पष्ट है: PSUs न केवल स्थिरता बल्कि Nifty 50 कंपनियों पर “स्टोकेस्टिक प्रभुत्व” भी प्रदान करते हैं.

निजी क्षेत्र को डिविडेंड असमानता के लिए किया गया आड़े हाथ

एक दुर्लभ फटकार में, DIPAM ने निजी कंपनियों से PSUs की न्यायसंगत डिविडेंड प्रथाओं को अपनाने का आग्रह किया. “जहां CPSEs पर 30% मुनाफा वितरित करना अनिवार्य है, वहीं निजी फर्में मुश्किल से 20% ही देती हैं, जिससे अल्पसंख्यक निवेशकों का नुकसान होता है,” चावला ने कहा. संदेश स्पष्ट था: “निष्पक्ष डिविडेंड दान नहीं है—बल्कि बाजार की अखंडता की आधारशिला है.”

IDBI बैंक का विनिवेश: बाजार की अशांति के बीच सटीकता का संगीत

डिविडेंड चर्चा के समानांतर, DIPAM की IDBI बैंक की रणनीतिक बिक्री सैन्य सटीकता से आगे बढ़ रही है. एसेट वैल्यूअर्स नियुक्त किए गए हैं, वर्चुअल डेटा रूम सक्रिय हैं, और शेयर खरीद समझौता अंतिम रूप लेने को है. “हम अशांत पानी में भी शांत हैं,” चावला ने मुस्कुराते हुए कहा, जिसमें H1FY26 तक 61% हिस्सेदारी (30.48% भारत सरकार, 30.24% LIC) की बिक्री पूरी होने का संकेत दिया. बाजार ने तुरंत प्रतिक्रिया दी—IDBI बैंक के शेयरों में 3% की छलांग निवेशकों के विश्वास को दर्शाती है.

जैसे-जैसे DIPAM बाजार नैतिकता को नए सिरे से परिभाषित कर रहा है, उसका दोहरा एजेंडा—PSUs का सशक्तिकरण और निजी क्षेत्र की जवाबदेही—एक नए युग की शुरुआत कर सकता है, जहां हर निवेशक, चाहे बड़ा हो या छोटा, भारत की विकास गाथा का लाभ उठा सके.

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-भारत एक्सप्रेस 

 



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