Bharat Express DD Free Dish
Kanya Sumangla Mission Shakti Digital
Kanya Sumangla Mission Shakti Digital

जीएसटी के आठ साल पूरे, बीते पांच वर्षों में कलेक्शन हुआ दोगुना, 2024-25 में 22 लाख करोड़ से ज्यादा का हुआ संग्रह

आधिकारिक डेटा के अनुसार, GST कलेक्शन के साथ-साथ सक्रिय जीएसटी करदाताओं की संख्या में भी जबरदस्त उछाल दर्ज किया गया है, जो कि 30 अप्रैल 2025 तक बढ़कर 1,51,80,087 हो गए हैं.

GST

GST के आठ साल पूरे.

GST Collection Double In Last Five Years: 1 जुलाई 2025 को वस्तु एवं सेवा कर (Goods and Service Tax) के आठ वर्ष पूरे हो गए. जीएसटी को एक सशक्त और अधिक एकीकृत अर्थव्यवस्था की नींव रखने में महत्वपूर्ण मानते हुए वर्ष 2017 में शुरू किया गया था. बीते पांच वर्षों की बात करें तो जीएसटी संग्रह बढ़कर दोगुना हो गया है.

GST को मिली जबरदस्त सफलता

जीएसटी (GST) के साथ कर अनुपालन सरल होने के साथ कारोबारियों की लागत में कमी आई और माल को बिना किसी परेशानी के देश के एक राज्य से दूसरे में ले जाने की अनुमति मिली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जीएसटी का परिचय ‘नए भारत के एक मार्गदर्शक कानून’ के रूप में दिया था. बीते आठ वर्षों में जीएसटी को जबरदस्त सफलता मिली और जीएसटी कलेक्शन को लेकर लगातार वृद्धि दर्ज की गई.

2024-25 में GST कलेक्शन 22 लाख करोड़ के पार

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, GST कलेक्शन को लेकर बीते 5 वर्षों में लगभग दोगुना वृद्धि दर्ज की गई है, जो कि वित्त वर्ष 2020-21 के दौरान 11.37 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर वित्त वर्ष 2024-2025 में 22.08 लाख करोड़ रुपए हो गया. जीएसटी कलेक्शन में यह तेजी अनुपालन और आर्थिक गतिविधि में निरंतर वृद्धि को दर्शाती है.

आधिकारिक डेटा के अनुसार, GST कलेक्शन के साथ-साथ सक्रिय जीएसटी करदाताओं की संख्या में भी जबरदस्त उछाल दर्ज किया गया है, जो कि 30 अप्रैल 2025 तक बढ़कर 1,51,80,087 हो गए हैं.

जीएसटी के वर्तमान स्ट्रक्चर में दरों के चार मुख्य स्लैब 5 प्रतिशत, 12 प्रतिशत, 18 प्रतिशत और 28 प्रतिशत हैं. ये दरें देशभर में अधिकांश वस्तुओं और सेवाओं पर लागू होती हैं. हालांकि, मुख्य स्लैब के अलावा, तीन विशेष दरें भी तय की गई हैं. जीएसटी की दर सोना, चांदी, हीरा और आभूषण पर 3 प्रतिशत, कटे एवं पॉलिश किए गए हीरे पर 1.5 प्रतिशत और कच्चे हीरे पर 0.25 प्रतिशत लगती है.

यह भी पढ़ें- भारत और भी बेहतर कर सकता है प्रदर्शन, सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बना रहेगा: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण

जीएसटी को एक राष्ट्र, एक कर के उद्देश्य से पेश किया गया था. जीएसटी आने के साथ ही विभिन्न अप्रत्यक्ष करों की एक विस्तृत श्रृंखला को एक कर दिया गया. जीएसटी ने उत्पाद शुल्क, सेवा कर और वैट जैसे करों की जगह ले ली. इससे देश में कर प्रणाली में एकरूपता आई.

-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read


Kanya Sumangla Mission Shakti Digital