Bharat Express DD Free Dish

मालवाहकों के लिए जीएसटी दर में कटौती से कम होगी भारत की रसद लागत, आर्थिक उत्पादन को मिलेगा बढ़ावा

GST Impact on Economy: GST काउंसिल ने गुड्स कैरियर पर टैक्स 28% से घटाकर 18% कर दिया है. इस फैसले से ट्रकिंग और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को राहत मिलेगी, मैन्युफैक्चरिंग सस्ता होगा और खपत बढ़ने से अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी.

GST Impact on Economy

GST Impact on Economy: देश की लॉजिस्टिक्स लागत को कम करने और आर्थिक वृद्धि को गति देने के मकसद से जीएसटी काउंसिल ने बड़ा फैसला लिया है. अब ट्रकों और गुड्स कैरियर पर लगने वाला टैक्स 28% से घटाकर 18% कर दिया गया है. सरकार को उम्मीद है कि इस कदम से ट्रांसपोर्टेशन सस्ता होगा, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मजबूती मिलेगी और महंगाई पर भी लगाम लगेगी.

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी लंबे समय से कह रहे हैं कि भारत की लॉजिस्टिक्स लागत को और कम करने की जरूरत है. जुलाई में मिंट को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि लक्ष्य है कि यह लागत जीडीपी का 9% तक लाई जाए. फिलहाल यह 10-11% के बीच है, जबकि कुछ साल पहले यह 11-15% के बीच रहती थी. तुलना करें तो चीन में यह करीब 8% है और अमेरिका, यूरोप व ब्रिटेन में लगभग 12%. गडकरी का मानना है कि पिछले वर्षों में सड़कों और हाइवे की क्वालिटी बेहतर होने से स्थिति में सुधार आया है.

ट्रकिंग और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को सीधा फायदा

नई दरों से ट्रक खरीदने और उनके रखरखाव का खर्च कम होगा. विशेषज्ञों का कहना है कि इससे फ्लीट ऑपरेटर अपने पुराने वाहनों को जल्दी अपग्रेड कर पाएंगे. वीई कमर्शियल व्हीकल्स लिमिटेड के एमडी और सीईओ विनोद अग्रवाल के अनुसार, “टैक्स कटौती से लॉजिस्टिक्स लागत तो कम होगी ही, साथ ही ग्राहक आधुनिक, ईंधन-किफायती और सुरक्षित ट्रक खरीदने की ओर भी प्रेरित होंगे. यह कदम न सिर्फ लॉजिस्टिक्स और माल-ढुलाई सेक्टर को मजबूती देगा, बल्कि देश की ग्रोथ को भी गति देगा.”

इंफ्रास्ट्रक्चर और वेयरहाउसिंग पर असर

सीबीआरई (CBRE) इंडिया के चेयरमैन एवं सीईओ अंशुमन मैगजीन का कहना है कि सीमेंट और स्टील जैसे निर्माण सामग्रियों पर टैक्स में कटौती से डेवलपर्स को भी राहत मिलेगी. वेयरहाउस, कोल्ड स्टोरेज और ट्रांसपोर्ट हब बनाने की लागत घटेगी, जिससे लॉजिस्टिक्स नेटवर्क का विस्तार आसान होगा. इसके साथ ही डोर-टू-डोर कार्गो चार्ज भी घटने की उम्मीद है क्योंकि मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट (हवाई मार्ग को छोड़कर) पर जीएसटी 12% से घटाकर 5% कर दिया गया है.

क्रिसिल इंटेलिजेंस ने अपने विश्लेषण में कहा है कि गुड्स कैरिज पर थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस टैक्स 12% से घटाकर 5% करने से ट्रांसपोर्ट कंपनियों का ऑपरेटिंग खर्च और घटेगा.

कारोबार और खपत पर व्यापक असर

मोगलिक्स के फाउंडर और सीईओ राहुल गर्ग का कहना है कि टैक्स सुधार से सिर्फ लागत में कमी नहीं होगी, बल्कि कारोबार करना भी आसान बनेगा. वहीं, ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के एमडी विनीत अग्रवाल ने कहा कि इस फैसले से कई सेक्टरों में दबा हुआ डिमांड बाहर आएगा. ऑटो, एफएमसीजी और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स जैसे क्षेत्रों में ग्राहकों और डीलरों ने दरों को लेकर इंतजार किया था. अब जब नई दरें लागू हो गई हैं तो खासतौर पर गाड़ियों और बड़े इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों की बिक्री बढ़ने की उम्मीद है.

उन्होंने कहा, ‘त्योहारी सीजन की खरीदारी अब दीवाली के करीब तेज़ी से बढ़ेगी, जिससे सप्लाई चेन और लास्ट-माइल डिलीवरी पर दबाव बनेगा. कंपनियों को इसके लिए पहले से तैयार रहना होगा.’

ब्रोकरेज हाउस मोतीलाल ओसवाल ने अपने नोट में लिखा कि इस जीएसटी रिफॉर्म को केवल टैक्स सुधार नहीं, बल्कि ग्रोथ सुधार के रूप में देखना चाहिए. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इशारा किया है कि आने वाले समय में और सुधार किए जाएंगे ताकि वैश्विक भू-राजनीतिक चुनौतियों के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत और लचीली बनी रहे.

ये भी पढ़ें: यूरोप को भारत से डीज़ल निर्यात अगस्त में 137% उछला, 2.42 लाख बैरल प्रतिदिन पहुंचा

-भारत एक्सप्रेस 



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read