साइबर फ्रॉड रोकने के लिए RBI ने उठाया बड़ा कदम
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2023-24 में भारतीय परिवारों की वित्तीय बचत सकल राष्ट्रीय डिस्पोजेबल आय (GNDI) का 5.1% तक पहुंच गई, जो पिछले वर्ष के निचले स्तर से उल्लेखनीय सुधार दर्शाती है.
बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, यह वृद्धि भारत के आर्थिक विकास और स्थिरता के लिए सकारात्मक संकेत है. RBI ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 6.5% जीडीपी वृद्धि का अनुमान लगाया है, जिसके साथ भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहेगा.
रिपोर्ट में कहा गया है कि उपभोक्ता मूल्य मुद्रास्फीति 4% के लक्ष्य पर रहने की उम्मीद है, जो खाद्य कीमतों में कमी और अनुकूल आर्थिक परिस्थितियों से समर्थित है. घरेलू बचत में वृद्धि का मुख्य कारण शेयरों, बैंक जमा, और पेंशन फंड में निवेश में उछाल है. FY24 में सकल वित्तीय बचत GNDI का 11.2% रही, जो पिछले वर्ष के 10.7% से अधिक है. हालांकि, सोने और चांदी के आभूषणों में बचत केवल 0.93% बढ़ी, क्योंकि ऊंची कीमतों ने खरीदारी को प्रभावित किया.
RBI ने वैश्विक व्यापार अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत बताया, जिसमें सरकारी पूंजीगत व्यय और उपभोक्ता मांग में वृद्धि महत्वपूर्ण कारक हैं. भारत के 14 मुक्त व्यापार समझौतों (FTAs) और छह विशेष व्यापार समझौतों (PTAs) ने वैश्विक व्यापार में देश की स्थिति को और मजबूत किया.
हालांकि, RBI ने चेतावनी दी कि वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और व्यापार नीतियों में बदलाव से वित्तीय बाजारों में अस्थिरता हो सकती है. यह उपलब्धि भारत के आत्मनिर्भर और डिजिटल इंडिया के लक्ष्यों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.
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