सांकेतिक तस्वीर.
भारत ने वित्त वर्ष 2024-25 में रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है, जिसमें कुल उत्पादन मूल्य ₹1.46 लाख करोड़ तक पहुंच गया है. बिजनेस स्टैंडर्ड की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, यह आंकड़ा भारत के आत्मनिर्भर भारत अभियान और रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम को दर्शाता है. इस उपलब्धि ने भारत को वैश्विक रक्षा निर्माण के क्षेत्र में एक मजबूत खिलाड़ी के रूप में स्थापित किया है.
रक्षा मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, इस वृद्धि में सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की कंपनियों का योगदान उल्लेखनीय रहा है. हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL), भारत डायनामिक्स लिमिटेड (BDL) और निजी क्षेत्र की कंपनियों जैसे टाटा और लार्सन एंड टुब्रो ने उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
इस वर्ष रक्षा निर्यात में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई, जो ₹22,000 करोड़ को पार कर गया. स्वदेशी हथियारों, जैसे तेजस लड़ाकू विमान, आकाश मिसाइल सिस्टम और नौसेना के लिए युद्धपोतों का उत्पादन इस वृद्धि का प्रमुख कारण रहा.
सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ पहल और रक्षा क्षेत्र में 74% तक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की अनुमति ने इस क्षेत्र को और मजबूती दी. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस उपलब्धि को भारत की बढ़ती तकनीकी क्षमता और आत्मनिर्भरता का प्रतीक बताया.
विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि न केवल भारत की रक्षा तैयारियों को मजबूत करेगी, बल्कि रोजगार सृजन और आर्थिक विकास में भी योगदान देगी. भविष्य में, भारत का लक्ष्य रक्षा निर्यात को और बढ़ाने और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में अपनी हिस्सेदारी को मजबूत करने का है.
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