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FDI में जबरदस्त उछाल, अप्रैल में भारत में निवेश हुई 3.95 अरब डॉलर की विदेशी पूंजी, विदेश में पढ़ाई पर लगातार गिर रहा खर्च

रिज़र्व बैंक (RBI) के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, भारत को अप्रैल 2025 में कुल 3.95 अरब डॉलर का नेट विदेशी निवेश (FDI) मिला है. यह बीते 35 महीनों में सबसे ज़्यादा है और पिछले साल अप्रैल की तुलना में दोगुना.

FDI in india

FDI in india

अर्थव्यवस्था के लिए राहत की खबर है. रिज़र्व बैंक (RBI) के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, भारत को अप्रैल 2025 में कुल 3.95 अरब डॉलर का नेट विदेशी निवेश (FDI) मिला है. यह बीते 35 महीनों में सबसे ज़्यादा है और पिछले साल अप्रैल की तुलना में दोगुना.

इससे पहले मार्च में भारत से 43.8 करोड़ डॉलर की पूंजी बाहर गई थी. लेकिन नए वित्त वर्ष की शुरुआत में ही निवेशकों ने दोबारा भरोसा दिखाया है. इससे पहले 2024-25 के नौ में से छह महीने नेट आउटफ्लो यानी निकासी वाले रहे थे.

FDI इनफ्लो में रिकॉर्ड बढ़त

RBI के मुताबिक, अप्रैल में भारत को ग्रॉस यानी कुल 8.8 अरब डॉलर की एफडीआई प्राप्त हुई, जो कि बीते 39 महीनों में सबसे ज़्यादा है. इसमें सबसे ज़्यादा निवेश मैन्युफैक्चरिंग और बिजनेस सर्विस सेक्टर में आया. यानी निवेशक भारत के प्रोडक्शन और सर्विस सेक्टर पर बड़ा दांव लगा रहे हैं.

2024-25 में निवेश में आई थी गिरावट

पिछले वित्त वर्ष यानी 2024-25 में नेट FDI सिर्फ 2.29 अरब डॉलर रही, जो 2023-24 के मुकाबले 77% कम थी. हालांकि RBI का कहना है कि विदेशी कंपनियों द्वारा अपनी पूंजी वापस लेना इस बात का संकेत है कि भारत एक ‘परिपक्व बाज़ार’ बन चुका है, जहां निवेशक आसानी से आ-जा सकते हैं.

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भारत बना रहा है ग्लोबल निवेशकों का पसंदीदा

कुल मिलाकर, 2024-25 में ग्रॉस FDI 14% बढ़कर 81.04 अरब डॉलर रही, जो दिखाता है कि भारत अब भी विदेशी निवेशकों के लिए आकर्षक बना हुआ है.

देश से बाहर भी बढ़ रहा है निवेश

भारतीय कंपनियों ने भी विदेश में जमकर निवेश किया. अप्रैल में भारत से बाहर जाने वाला FDI 3.19 अरब डॉलर रहा, जो पिछले साल की तुलना में 169% ज़्यादा है. ये निवेश मुख्य रूप से बिजली-गैस, फाइनेंस और इंश्योरेंस सेक्टर में हुआ. सबसे ज़्यादा पैसा सिंगापुर, मॉरिशस और जर्मनी जैसे देशों में गया.

पढ़ाई पर घटता खर्च

हालांकि, पढ़ाई के लिए विदेश भेजा जाने वाला पैसा लगातार गिर रहा है. RBI के लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के तहत अप्रैल में सिर्फ 16.4 करोड़ डॉलर पढ़ाई के लिए भेजे गए, जो पिछले साल की तुलना में 21% कम है. ये गिरावट लगातार नौवें महीने दर्ज की गई है. 2025 के पहले चार महीनों में पढ़ाई के लिए कुल 87.4 करोड़ डॉलर ही भेजे गए यह भी 21% की गिरावट दर्शाता है.

ट्रैवल खर्च में बढ़ोतरी, लेकिन स्टडी रेमिटेंस में चिंता

जहां एक तरफ ट्रैवल पर खर्च 11% बढ़कर 1.27 अरब डॉलर पहुंच गया है, वहीं पढ़ाई को लेकर गिरते आंकड़े चिंताजनक हैं. खासतौर पर तब, जब अमेरिका में वीजा नियमों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है.

क्या है LRS?

RBI की LRS स्कीम के तहत भारतीय नागरिक हर साल विदेश में पढ़ाई, ट्रैवल, इलाज या विदेशी शेयर्स में निवेश के लिए 2.5 लाख डॉलर तक भेज सकते हैं.

– भारत एक्सप्रेस



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