भारतीय रेलवे अब एक नई और हरित तकनीक के साथ इतिहास रचने जा रहा है. रेलवे मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर भारत की पहली हाइड्रोजन-चालित ट्रेन की झलक साझा की.
इसके साथ ही भारत उन चुनिंदा देशों, जर्मनी, फ्रांस, स्वीडन और चीन, की सूची में शामिल हो जाएगा, जिन्होंने इस तकनीक को अपनाया है.
पहली सेवा हरियाणा के जींद और सोनीपत के बीच चलाई जाएगी. इसके लिए खास इंफ्रास्ट्रक्चर भी तैयार किया जा रहा है, जिसमें हाइड्रोजन उत्पादन, भंडारण और ईंधन भरने की पूरी सुविधा एक ही जगह होगी.
Bharat’s First Hydrogen Train! 🇮🇳
Coming soon… pic.twitter.com/Mtq72zd1Dd— Ashwini Vaishnaw (@AshwiniVaishnaw) August 12, 2025
रखरखाव के लिए खास टावर कारें
इस प्रोजेक्ट के तहत रेलवे पांच हाइड्रोजन फ्यूल सेल बेस्ड टावर कार भी तैयार करेगा, जो ट्रेन के रखरखाव के लिए इस्तेमाल होंगी. हर कार की कीमत लगभग 10 करोड़ रुपये होगी.
जींद में 1 मेगावॉट की पॉलिमर इलेक्ट्रोलाइट मेम्ब्रेन (PEM) इलेक्ट्रोलाइज़र लगाई जाएगी, जो लगातार चलकर रोज़ करीब 430 किलो हाइड्रोजन का उत्पादन करेगी. यह सप्लाई सीधे ट्रेन के लिए होगी.
ये भी पढ़ें- भारतीय खेलों में नया अध्याय, संसद में पास हुआ ‘नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस बिल 2025’
रीफ्यूलिंग स्टेशन की खासियत
ग्रीनH इलेक्ट्रोलिसिस कंपनी के मुताबिक, जींद में बनने वाला रीफ्यूलिंग स्टेशन 3,000 किलो हाइड्रोजन स्टोर कर सकेगा. इसके साथ हाइड्रोजन कंप्रेसर और दो हाई-स्पीड डिस्पेंसर भी होंगे, जिनमें प्री-कूलर इंटीग्रेशन रहेगा, जिससे ट्रेनों में तेज़ी से ईंधन भरा जा सकेगा.
पर्यावरण और भविष्य के लिए बड़ा कदम
हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेनें न सिर्फ प्रदूषण को कम करेंगी, बल्कि रेलवे को डीज़ल और कोयले पर निर्भरता घटाने में मदद करेंगी. यह तकनीक भविष्य के लिए एक बड़ा कदम है, जो भारत को स्वच्छ और टिकाऊ परिवहन व्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ाएगी.
Also Follow Bharat Express on X
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

