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भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का आगाज, जींद-सोनीपत रूट से होगी स्वच्छ और हरित रेलवे सेवा की शुरुआत

हरियाणा के जींद-सोनीपत रूट पर भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन शुरू होने जा रही है, जो प्रदूषण कम करेगी और रेलवे को ग्रीन एनर्जी की दिशा में आगे बढ़ाएगी.

hydrogen train

भारतीय रेलवे अब एक नई और हरित तकनीक के साथ इतिहास रचने जा रहा है. रेलवे मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर भारत की पहली हाइड्रोजन-चालित ट्रेन की झलक साझा की.

इसके साथ ही भारत उन चुनिंदा देशों, जर्मनी, फ्रांस, स्वीडन और चीन, की सूची में शामिल हो जाएगा, जिन्होंने इस तकनीक को अपनाया है.

पहली सेवा हरियाणा के जींद और सोनीपत के बीच चलाई जाएगी. इसके लिए खास इंफ्रास्ट्रक्चर भी तैयार किया जा रहा है, जिसमें हाइड्रोजन उत्पादन, भंडारण और ईंधन भरने की पूरी सुविधा एक ही जगह होगी.

रखरखाव के लिए खास टावर कारें

इस प्रोजेक्ट के तहत रेलवे पांच हाइड्रोजन फ्यूल सेल बेस्ड टावर कार भी तैयार करेगा, जो ट्रेन के रखरखाव के लिए इस्तेमाल होंगी. हर कार की कीमत लगभग 10 करोड़ रुपये होगी.

जींद में 1 मेगावॉट की पॉलिमर इलेक्ट्रोलाइट मेम्ब्रेन (PEM) इलेक्ट्रोलाइज़र लगाई जाएगी, जो लगातार चलकर रोज़ करीब 430 किलो हाइड्रोजन का उत्पादन करेगी. यह सप्लाई सीधे ट्रेन के लिए होगी.

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रीफ्यूलिंग स्टेशन की खासियत

ग्रीनH इलेक्ट्रोलिसिस कंपनी के मुताबिक, जींद में बनने वाला रीफ्यूलिंग स्टेशन 3,000 किलो हाइड्रोजन स्टोर कर सकेगा. इसके साथ हाइड्रोजन कंप्रेसर और दो हाई-स्पीड डिस्पेंसर भी होंगे, जिनमें प्री-कूलर इंटीग्रेशन रहेगा, जिससे ट्रेनों में तेज़ी से ईंधन भरा जा सकेगा.

पर्यावरण और भविष्य के लिए बड़ा कदम

हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेनें न सिर्फ प्रदूषण को कम करेंगी, बल्कि रेलवे को डीज़ल और कोयले पर निर्भरता घटाने में मदद करेंगी. यह तकनीक भविष्य के लिए एक बड़ा कदम है, जो भारत को स्वच्छ और टिकाऊ परिवहन व्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ाएगी.

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-भारत एक्सप्रेस



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