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भारतीय खेलों में नया अध्याय, संसद में पास हुआ ‘नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस बिल 2025’

संसद ने नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस बिल 2025 पारित कर भारतीय खेलों के प्रशासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और खिलाड़ी-केंद्रित बदलाव की शुरुआत कर दी है.

नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस बिल 2025

भारतीय खेल जगत के लिए मंगलवार का दिन ऐतिहासिक साबित हुआ. संसद ने नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस बिल 2025 को मंजूरी दे दी, जिसे खेल प्रशासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और खिलाड़ी-केन्द्रित नीतियों का सबसे बड़ा सुधार माना जा रहा है.

इसे देश का पहला एकीकृत और व्यापक कानूनी ढांचा कहा जा रहा है, जो दशकों से चली आ रही सुधार की मांग को पूरा करता है.

खिलाड़ियों और खेल संघों ने जताई खुशी

ओलंपिक पदक विजेता गगन नारंग ने सोशल मीडिया पर लिखा, “भारतीय खेलों के लिए ऐतिहासिक दिन. पारदर्शिता, जवाबदेही और खिलाड़ी-प्रथम शासन की दिशा में बड़ा कदम.”

महिला हॉकी टीम की अनुभवी गोलकीपर सविता पुनिया ने कहा, “ये सिर्फ एक बिल नहीं, बल्कि भारतीय खेलों का भविष्य है.”

बैडमिंटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (BAI) और हॉकी इंडिया ने भी इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह कानून भारत के खेल ढांचे को वैश्विक मानकों से जोड़ने वाला है.

एक दशक लंबा इंतज़ार खत्म

इस बिल का सपना 2011 से देखा जा रहा था, लेकिन इतने व्यापक विज़न वाला प्रस्ताव कभी संसद तक पहुंच ही नहीं पाया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया के नेतृत्व और प्रतिबद्धता से आखिरकार यह सपना हकीकत में बदला. हॉकी इंडिया के अध्यक्ष डॉ. दिलीप तिर्की ने इसे “वाटरशेड मोमेंट” यानी खेल इतिहास का टर्निंग प्वाइंट बताया.

क्या बदलेगा इस कानून से?

बिल राष्ट्रीय खेल महासंघों और भारतीय ओलंपिक संघ के लिए स्पष्ट नियम तय करता है-

  • पारदर्शी चुनाव प्रक्रिया
  • वित्तीय लेन-देन में खुलापन
  • खिलाड़ियों के लिए मजबूत ‘एथलीट कमीशन’
  • खेल प्रशासन में कम से कम 30% महिलाओं की भागीदारी
  • महिला और नाबालिग खिलाड़ियों की सुरक्षा के लिए कड़े प्रावधान
  • सख्त एंटी-डोपिंग और ‘सेफ स्पोर्ट’ नियम

इन प्रावधानों से खिलाड़ियों की आवाज़ न केवल सुनी जाएगी, बल्कि खेल नीतियों में उनकी सीधी भागीदारी भी होगी.

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2036 ओलंपिक और आगे की राह

साइक्लिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया ने कहा, “यह स्वतंत्रता के बाद का सबसे बड़ा सुधार है, जो भारत को खेलों में वैश्विक नेतृत्व की राह पर ले जाएगा और 2036 ओलंपिक की मेज़बानी के सपने को मजबूत करेगा.”

बिल का ओलंपिक और पैरालंपिक चार्टर से तालमेल दिखाता है कि भारत सिर्फ प्रतिस्पर्धा करने नहीं, बल्कि खेल जगत में नेतृत्व करने के इरादे से आगे बढ़ रहा है.

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-भारत एक्सप्रेस



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