India New Zealand FTA: भारत और न्यूजीलैंड के बीच व्यापारिक रिश्तों में सोमवार, 27 अप्रैल 2026 को एक नया और ऐतिहासिक अध्याय जुड़ने जा रहा है. दोनों देशों ने आधिकारिक तौर पर ‘फ्री ट्रेड एग्रीमेंट’ (FTA) पर हस्ताक्षर होंगे. अमेरिका द्वारा लगाए जा रहे टैरिफ के दौर में मोदी सरकार की इस डील को एक मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है. केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और न्यूजीलैंड के व्यापार मंत्री टॉड मैक्ले की मौजूदगी में इस डील को फाइनल होगा. न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने इसे ‘एक पीढ़ी में एक बार आने वाला समझौता’ करार दिया है.
कीवी, ब्लूबेरी, वाइन और सीफूड होंगे सस्ते (india new zealand fta news)
आम उपभोक्ताओं के लिए यह डील कई खुशियां लेकर आई है. एफटीए लागू होने के बाद न्यूजीलैंड से आयात होने वाले महंगे फल जैसे एवोकैडो, कीवी, ब्लूबेरी और चेरी भारत में सस्ते हो जाएंगे. इसके साथ ही दुनियाभर में मशहूर न्यूजीलैंड की वाइन, भेड़ का ऊन, सीफूड और लकड़ी के सामान पर भी टैरिफ कम या खत्म कर दिया जाएगा.
भारतीय पेशेवरों के लिए खुलेंगे दरवाजे (ndia new zealand fta today)
यह समझौता सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि रोजगार के मोर्चे पर भी बड़ी राहत लाया है. न्यूजीलैंड हर साल 5,000 भारतीय पेशेवरों को 3 साल का अस्थायी रोजगार वीजा देगा. इसमें IT, इंजीनियरिंग, आयुष चिकित्सक, योग शिक्षक, और शेफ जैसे उच्च मांग वाले क्षेत्र शामिल हैं. 1,000 युवा भारतीय छात्र साल भर के लिए न्यूजीलैंड जाकर काम कर सकेंगे.
20 अरब डॉलर का निवेश
इस समझौते (india new zealand fta 2026) का सबसे बड़ा लक्ष्य अगले पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार (जो वर्तमान में 2.4 अरब डॉलर है) को दोगुना कर 5 अरब डॉलर तक पहुंचाना है. न्यूजीलैंड अगले 15 वर्षों में भारत के विनिर्माण, बुनियादी ढांचे और सेवा क्षेत्रों में 20 अरब डॉलर का भारी निवेश करेगा. भारतीय कंपनियों को न्यूजीलैंड के बाजारों में 100% ड्यूटी-फ्री (शुल्क-मुक्त) प्रवेश मिलेगा. यानी भारत के कपड़ा, चमड़ा, कालीन और वाहन पुर्जे बिना किसी टैक्स के न्यूजीलैंड में बिक सकेंगे.
डेयरी उत्पादों को रखा बाहर (india new zealand fta announced)
सरकार ने घरेलू उद्योग और किसानों के हितों की पूरी सुरक्षा की है. न्यूजीलैंड की सबसे बड़ी ताकत ‘डेयरी उत्पादों’ को इस समझौते से पूरी तरह बाहर रखा गया है. दूध, पनीर, क्रीम और अन्य डेयरी उत्पादों पर न्यूजीलैंड को कोई छूट नहीं दी गई है. इसके अलावा प्याज, चना, मक्का, चीनी और जेम्स-ज्वेलरी जैसे संवेदनशील उत्पादों को भी सुरक्षित रखा गया है. उल्टा, न्यूजीलैंड भारत को सेब, कीवी और शहद की पैदावार बढ़ाने के लिए उन्नत कृषि-तकनीक साझा करेगा.
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फार्मा और मेडिकल उपकरणों के क्षेत्र में भी भारत को इस डील से बड़ा ‘बूस्ट’ मिलने वाला है, क्योंकि यूएस (FDA) और यूरोपीय यूनियन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों की जांच रिपोर्ट को सीधे न्यूजीलैंड में मान्यता मिल जाएगी, जिससे भारतीय दवाइयों की मंजूरी प्रक्रिया तेज हो जाएगी. 2020 के बाद से भारत का यह 7वां व्यापार समझौता है. दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर अग्रसर भारत के लिए ओशिनिया क्षेत्र में यह डील एक मजबूत व्यापारिक पुल का काम करेगी.
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