रक्षा बजट बढ़ाने पर विचार कर रही मोदी सरकार.
भारत का ‘ऑपरेशन सिंदूर’ केवल एक सैन्य अभियान नहीं था, बल्कि यह आत्मनिर्भरता, अत्याधुनिक तकनीक और रणनीतिक सोच का जीवंत उदाहरण बन गया. दुनिया ने देखा कि जब भारत अपने दम पर खड़ा होता है, तो न सिर्फ युद्ध के मैदान में, बल्कि वैश्विक रक्षा बाज़ार में भी वह अपनी छाप छोड़ता है.
अमेरिकी सैन्य विश्लेषक जॉन स्पेंसर के मुताबिक, भारत ने इस अभियान के जरिए यह सिद्ध कर दिया कि आत्मनिर्भरता केवल एक नारा नहीं, बल्कि एक वास्तविकता है जो युद्ध जैसी गंभीर परिस्थितियों में भी कारगर साबित होती है. अपने ही विकसित और निर्मित हथियारों के जरिए भारत ने लक्ष्यभेदन किया और दुश्मन के मंसूबों को ध्वस्त कर दिया.
पाकिस्तान बना चीन का मोहरा, नाकाम रहे चीनी हथियार
स्पेंसर ने सोशल मीडिया पर कहा कि जहां भारत ने संप्रभु राष्ट्र की तरह ऑपरेशन को अंजाम दिया, वहीं पाकिस्तान पूरी तरह से चीन के बनाए हथियारों पर निर्भर रहा. ये हथियार न सिर्फ जमीनी युद्ध में असफल रहे, बल्कि चीन की रक्षा तकनीक पर भी सवाल खड़े कर गए. इससे साफ हो गया कि केवल एक्सपोर्ट के लिए बनाए गए हथियार असली युद्ध में टिक नहीं सकते.
इस सैन्य सफलता का असर आर्थिक मोर्चे पर भी देखने को मिला. मई में भारत की रक्षा कंपनियों जैसे Paras Defence & Space के शेयर में 49% तक की बढ़ोतरी हुई, जबकि MTAR Technologies और Data Patterns में भी निवेशकों का भरोसा बढ़ा. दूसरी ओर, चीन की कंपनियों AVIC, NORINCO और CETC के शेयर गिर गए क्योंकि युद्धभूमि पर उनका प्रदर्शन कमजोर रहा.
‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ की बड़ी कामयाबी
स्पेंसर के अनुसार, भारत की रक्षा क्रांति 2014 में ‘मेक इन इंडिया’ से शुरू हुई. BrahMos मिसाइल, K9 वज्र होवित्जर और AK-203 राइफल जैसे सिस्टम भारत में बनने लगे. 2020 के बाद कोविड महामारी और गलवान झड़पों ने यह दिखाया कि विदेशी आपूर्ति शृंखला पर निर्भरता खतरनाक है. इसी के बाद शुरू हुआ ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान, जिसने 2025 तक रक्षा खरीद में देशी उपकरणों की हिस्सेदारी 30% से बढ़ाकर 65% कर दी है और दशक के अंत तक यह 90% तक पहुंचाने का लक्ष्य है.
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-भारत एक्सप्रेस
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