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भारत में निजी खपत 2.1 ट्रिलियन डॉलर पहुंची, वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं से तेजी से बढ़ रही: रिपोर्ट

भारत में निजी खपत 2024 में 2.1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गई, जो 7.2% वार्षिक वृद्धि के साथ वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं से तेज़ी से बढ़ रही है.

India Private Consumption Growth

भारत की निजी खपत 2024 में 2.1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गई है. यह 7.2% की वार्षिक वृद्धि के साथ अमेरिका, चीन और जर्मनी जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को पीछे छोड़ रही है. यह जानकारी डेलॉयट-RAI रिपोर्ट में सामने आई है. रिपोर्ट के अनुसार, भारत की प्रति व्यक्ति आय FY25 में 2,000 डॉलर पार कर चुकी है और 2030 तक 4,000 डॉलर से अधिक होने की उम्मीद है. इससे भारतीय उपभोक्ताओं की क्रय शक्ति और बढ़ेगी.

रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि 2030 तक भारत की जीडीपी 7.3 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगी. इसमें उपभोग का योगदान 60% होगा, जिससे भारत एक वैश्विक उपभोग केंद्र बन जाएगा. इस विकास के पीछे मध्य वर्ग की बढ़ती संख्या एक महत्वपूर्ण कारण है.

2024 में, 60 मिलियन भारतीयों की वार्षिक आय 10,000 डॉलर से अधिक थी. यह संख्या 2030 तक बढ़कर 165 मिलियन हो जाएगी. इससे भारत में प्रीमियम और ब्रांडेड उत्पादों की मांग तेज़ होगी.

खुदरा और उपभोक्ता क्षेत्र में बड़े बदलाव

डेलॉयट इंडिया के पार्टनर आनंद रमणाथन ने बताया कि भारत में उपभोक्ताओं की प्राथमिकताएं तेजी से बदल रही हैं. डिजिटल कॉमर्स, कर्ज की आसान उपलब्धता और बढ़ती डिस्क्रेशनरी स्पेंडिंग इस बदलाव को गति दे रही है. उन्होंने कहा कि कंपनियों को उपभोक्ताओं की नई अपेक्षाओं को अपनाना होगा. उन्हें सस्ती, सुविधाजनक, टिकाऊ और व्यक्तिगत खरीदारी अनुभव देने होंगे, ताकि वे इस बदलते बाजार में आगे बढ़ सकें.

रिटेलर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (RAI) के सीईओ कुमार राजगोपालन ने कहा कि भारत में डिस्क्रेशनरी स्पेंडिंग अब एक नई ऊंचाई पर पहुंच रही है. बढ़ती आय, डिजिटल बदलाव और उपभोक्ताओं की बदलती प्राथमिकताओं से खुदरा क्षेत्र को नई दिशा मिल रही है. रिपोर्ट में ब्रांड्स के लिए एक रोडमैप दिया गया है, जिससे वे भारतीय उपभोक्ताओं की आकांक्षाओं को समझकर अपनी रणनीतियां बना सकते हैं.

भारत में उपभोक्ता खपत को बढ़ाने वाले मुख्य कारक

1. प्रीमियम उत्पादों की मांग बढ़ी
आर्थिक उन्नति के कारण अब लोग गुणवत्ता, सुविधा और अनुभव को अधिक प्राथमिकता दे रहे हैं. जेन जेड और मिलेनियल्स, जो भारत की 52% आबादी हैं, वे प्रीमियम और टिकाऊ उत्पादों की मांग को बढ़ा रहे हैं.

2. डिजिटल और वित्तीय समावेशन
भारत में क्रेडिट कार्ड की पहुंच 2030 तक तीन गुना बढ़ने की उम्मीद है. इससे लोगों की खपत शक्ति बढ़ेगी. डिजिटल भुगतान और फिनटेक समाधान, जैसे कि UPI, लोगों की खरीदारी के तरीके को बदल रहे हैं और ई-कॉमर्स को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहे हैं.

3. घरेलू खर्च का पैटर्न बदला
लोग अब अपनी आय का कम हिस्सा आवश्यक चीजों (जैसे कि भोजन) पर खर्च कर रहे हैं. इसके बजाय, वे डाइनिंग आउट, ट्रैवल, फिटनेस, फैशन और होम इम्प्रूवमेंट जैसी चीजों पर अधिक खर्च कर रहे हैं.

4. संगठित खुदरा क्षेत्र का विकास
भारत में संगठित खुदरा क्षेत्र 10% CAGR की दर से बढ़ रहा है और 2030 तक 230 बिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगा. उपभोक्ता ओमनीचैनल खरीदारी को पसंद कर रहे हैं, जिससे ब्रांड्स को अपनी रणनीतियां बदलनी पड़ रही हैं. अनुभव आधारित खरीदारी का चलन भी तेजी से बढ़ रहा है.


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-भारत एक्सप्रेस



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