Indian Mango Export
Indian Mango Export: चीन के बाद भारत दुनिया का सबसे बड़ा फल उत्पादक देश है. यहां हर साल 115 मिलियन टन फलों का उत्पादन किया जाता है. इन फलों में केला, आम, पपीता और अमरूद जैसे प्रमुख फल हैं. इन फलों की विदेशों में बहुत डिमांड है. आम जैसे फल की तो अमेरिका से लेकर यूरोप तक में जबरदस्त मांग रहती है. लेकिन भारत के गर्म जलवायु के चलते इन फलों को सुरक्षित रूप से विदेशों में निर्यात करना बेहद चुनौती भरा काम है. आम के मामले में तो यह और भी कठिन हो जाता है. भारत के फल उत्पादन करने वाले किसानों के लिए अब परमाणु तकनीक वरदान साबित हो रही है.
परमाणु तकनीक का उपयोग करके इन फलों का भंडारण ज्यादा दिनों तक सुरक्षित रूप से किया जा रहा है. इस तकनीक को भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) ने विकसित किया है. इस तकनीक में रेडिएशन का प्रयोग करके फलों को जल्द खराब होने से रोक दिया जाता है. जिससे इन फलों को बिना खराब हुए विदेशों में भेजा जा सकता है. इस तकनीक ने फलों के भंडारण को नई दिशा दी है.
विदेशी बाजारों में सख्त है आयात नियम
अमेरिका और यूरोप में आयात नियम बेहद ही सख्त हैं. यहां सिर्फ वो ही फल भेजे जा सकते हैं जिनमें किसी भी प्रकार के कीट-पतंगे या उनके अंडे व लार्वा मौजूद ना हों. भारत की गर्म जलवायु की वजह से यहां के फल जल्द खराब हो जाते हैं. ऐसे में विदेशों के ये मानक भारतीय निर्यात में बड़ी रुकावट पैदा कर रहे थे. BARC ने इसी परेशानी को खत्म करने के लिए साल 2000 के आसपास विकिरण तकनीक पर रिसर्च करना शुरू कर दिया. जो अब भारत के फलों के लिए वरदान साबित हो रहा है.
कैसे काम करती है विकिरण तकनीक?
आमों को तोड़ने के बाद उन्हें उनकी साइज और गुणवत्ता के आधार पर छांट कर अलग कर लिया जाता है. इसके बाद उन्हें पैकिंग के लिए विकिरण केंद्रों में भेजा जाता है. जहां उन आमों पर नियंत्रित मात्रा में इलेक्ट्रॉन बीम, एक्स-रे या गामा किरणों का प्रयोग कर फलों में मौजूद कीटों या उनके लार्वा को नष्ट कर दिया जाता है. इससे आमों के पकने की प्रक्रिया ना सिर्फ धीमी हो जाती है, बल्कि उनके खराब होने के चांस भी कम हो जाते हैं.
इस तकनीक की मदद से फल लंबे समय तक ताजे बने रहते हैं. इस प्रक्रिया में फल ना तो रेडियोएक्टिव बनते हैं और ना ही उनके स्वाद या पोषण पर कोई खराब प्रभाव पड़ता है. यह तकनीक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षित मानी जाती है.
भारत में फलों की सेल्फ लाइफ कितनी है?
देश में हर साल 240 लाख टन से अधिक आम का उत्पादन करता है, यह पूरी दुनिया के आम उत्पादन का लगभग आधा है. लेकिन खास बात ये है कि भारत से निर्यात होने वाले आम पूरी दुनिया के निर्यात का सिर्फ 1 प्रतिशत हिस्सा हैं. उत्पादन और निर्यात के बीच इस गैप के पीछे का कारण इसका जल्द खराब होना है.
भारत में आमों की लगभग 5-7 दिनों तक ही सेल्फ लाइफ होती है. यहां के अल्फांसो, चौसा, केसर और लंगड़ा आम किस्मों की पूरी दुनिया में भारी डिमांड रहती है. अब विकिरण तकनीक से यह सेल्फ लाइफ बढ़कर 20 दिनों तक हो जाती है. ऐसे में इन आमों को विदेशों में निर्यात करना काफी आसान और सुविधाजनक है. इससे भारत के निर्यात की ना सिर्फ क्षमता बढ़ी है, बल्कि आमों को निर्यात करने में लगने वाली लागत में भी कमी आई है.
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विकिरण तकनीक भारत को सिर्फ आम के निर्यात में ही नहीं बल्कि अन्य फलों के निर्यात में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है. लीची, अनार सहित कई अन्य फल जो जल्दी खराब हो जाते हैं उनकी सेल्फ लाइफ में बढ़ोतरी हुई है. ऐसे में यह तकनीक ना सिर्फ किसानों की आय को बढ़ा रही है, बल्कि भारत को वैश्विक फल आपूर्ति बाजार का एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी के रूप में स्थापित कर रही है.
-भारत एक्सप्रेस
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