भारतीय फार्मा उद्योग ने वैश्विक स्तर पर बड़ी पहचान बना ली है. मैकिन्से एंड कंपनी की नई रिपोर्ट के अनुसार, भारत अब दुनिया में सबसे बड़ा जेनरिक दवाओं का आपूर्तिकर्ता बन गया है. इस वृद्धि का मुख्य कारण तेजी से बढ़ता निर्यात और गुणवत्ता मानकों में सुधार है. हालांकि, उद्योग अब एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है, जहां नई चुनौतियां और अवसर दोनों मौजूद हैं.
तेजी से बढ़ता निर्यात और गुणवत्ता सुधार
मैकिन्से की रिपोर्ट ‘शेपिंग द फ्यूचर ऑफ इंडिया’ज़ फार्मास्युटिकल ऑपरेशंस’ को मुंबई में आयोजित 10वें ग्लोबल फार्मास्युटिकल क्वालिटी समिट में पेश किया गया. रिपोर्ट में बताया गया कि भारत ने अमेरिका को पीछे छोड़ते हुए सबसे अधिक FDA-रजिस्टर्ड जेनरिक निर्माण स्थलों की संख्या में बढ़त हासिल कर ली है. भारत में अब 752 FDA-अप्रूव्ड, 2,050 WHO GMP-सर्टिफाइड और 286 EDQM-अप्रूव्ड विनिर्माण इकाइयां हैं.
पिछले कुछ वर्षों में भारतीय फार्मा कंपनियों ने गुणवत्ता मानकों को काफी सुधार लिया है. 2013-14 से 2023-24 के बीच, अमेरिकी FDA निरीक्षणों में ‘ऑफिशियल एक्शन इंडिकेटेड’ (OAI) मामलों में 50% की गिरावट आई है. वहीं, यूरोपियन मेडिसिन एजेंसी (EMA) के गैर-अनुपालन मामलों में 27% की कमी दर्ज की गई है.
कम लागत, उच्च उत्पादन क्षमता
भारत में निर्माण लागत अमेरिका और यूरोप की तुलना में 30-35% कम बनी हुई है. इसका कारण सस्ता मानव संसाधन, उद्योग में उच्च उत्पादकता और डिजिटल तकनीकों का तेजी से अपनाना है. यही वजह है कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा जेनरिक दवाओं का आपूर्तिकर्ता बन गया है. 2024 में भारत का फार्मा निर्यात 9% की दर से बढ़ा, जो वैश्विक औसत से लगभग दोगुना है. भारत अब दुनिया की 20% दवा आवश्यकताओं को पूरा करता है, जिसमें अमेरिका की 40% और ब्रिटेन की 25% जेनरिक दवाएँ शामिल हैं.
हालांकि, यह सिर्फ एक शुरुआत है. उद्योग अब एक नए दौर में प्रवेश कर रहा है, जहाँ डिजिटलीकरण, स्मार्ट ऑटोमेशन और नई चिकित्सा विधियाँ उद्योग के संचालन को बदल सकती हैं. साथ ही, बाहरी वातावरण में भी कई बदलाव हो रहे हैं, जो फार्मा क्षेत्र के लिए नई संभावनाएँ और चुनौतियाँ ला सकते हैं.
भविष्य की संभावनाएं और निवेश
- वृद्धि दर: भारतीय फार्मा उद्योग 8% की वार्षिक वृद्धि दर से आगे बढ़ रहा है, जो वैश्विक औसत से दोगुना है.
- वैक्सीन और HIV उपचार में नेतृत्व: भारत दुनिया के 60% वैक्सीन और 70% HIV उपचार के लिए जरूरी एंटीरेट्रोवायरल दवाओं की आपूर्ति करता है.
- खर्च और संचालन दक्षता: भारत में उत्पादन लागत अमेरिका और यूरोप की तुलना में 30-35% कम है, जिससे यह आउटसोर्सिंग के लिए पसंदीदा स्थान बना हुआ है.
- आधुनिक टेक्नोलॉजी अपनाने में बढ़त: 2022-2024 के बीच, वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) ने भारत की कई फार्मा कंपनियों को 4IR लाइटहाउस के रूप में मान्यता दी. 2024 के अंत तक, भारत के पास दुनिया में सबसे अधिक फार्मा 4IR लाइटहाउस हैं.
- नई चिकित्सा तकनीकों में निवेश: mRNA, सेल और जीन थेरेपी तथा एंटीबॉडी आधारित उपचार 13-14% की वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ रहे हैं.
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का उपयोग: AI-आधारित नवाचार से 60 से 110 बिलियन डॉलर की अतिरिक्त कमाई होने की संभावना है. इससे मुनाफा 4-7% तक बढ़ सकता है और उत्पादकता में 50% तक सुधार आ सकता है.
- हरित निर्माण की ओर कदम: भारत की शीर्ष 20 फार्मा कंपनियों में से 10 ने 2030 तक अपने कार्बन उत्सर्जन में 30% से अधिक कटौती करने का संकल्प लिया है.
- CDMO में निवेश: शीर्ष 5 भारतीय कॉन्ट्रैक्ट डेवलपमेंट एंड मैन्युफैक्चरिंग ऑर्गनाइजेशन (CDMO) ने अपनी क्षमताओं को बढ़ाने के लिए 650 मिलियन डॉलर का निवेश किया है.
-भारत एक्सप्रेस
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