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भारत के रियल एस्टेट सेक्टर में संस्थागत निवेशों ने 2024 में नया रिकॉर्ड स्थापित किया, देखिए आंकड़े

Indian Realty Institutional Investments: वर्ष 2024 में भारत का रियल एस्टेट सेक्‍टर अभूतपूर्व गति पकड़ चुका है, जिसका मुख्य कारण बदलती बाजार परिस्थितियाँ और मजबूत संस्थागत निवेशक विश्वास है.

Indian realty institutional investments

प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर.

Vijay Ram Edited by Vijay Ram

भारत का रियल एस्टेट सेक्‍टर 2024 में अभूतपूर्व गति पकड़ चुका है, जिसका मुख्य कारण बदलती बाजार परिस्थितियाँ और मजबूत संस्थागत निवेशक विश्वास है. इस साल रियल एस्टेट में निवेश गतिविधि और पूंजी के प्रवाह में बढ़ोतरी के साथ भारत के रियल एस्टेट बाजार को वैश्विक निवेशकों से आकर्षण मिल रहा है.

संस्थागत निवेशों में ऐतिहासिक वृद्धि

2024 में भारत के रियल एस्टेट क्षेत्र में कुल संस्थागत निवेश $8.9 बिलियन तक पहुँच गया, जो कि 2007 के $8.4 बिलियन के पिछले रिकॉर्ड को पार करता है. यह पिछले साल के $5.8 बिलियन से 51% अधिक है. इस बढ़ोतरी ने डील्स की संख्या में भी 47% की सालाना वृद्धि दिखाई, जो कि कुल 78 डील्स तक पहुँच गई. जेटीएल इंडिया के डेटा के अनुसार, यह वृद्धि भारत की स्थिर और बढ़ती अर्थव्यवस्था और मजबूत नीतिगत सुधारों का परिणाम है.

रेजिडेंशियल सेक्टर की बढ़ती लोकप्रियता

इस साल रेजिडेंशियल सेक्टर ने सबसे अधिक निवेश आकर्षित किया, जो कुल निवेश का 45% रहा, जबकि ऑफिस सेक्टर को 28% निवेश मिला. इसके अलावा, $2.4 बिलियन की कुल प्रतिबद्धता प्लेटफॉर्म्स के लिए की गई, जो आगामी 3-5 वर्षों में निवेश के लिए नियत है.

स्थानीय-विदेशी निवेशकों की बढ़ती भागीदारी

2024 में घरेलू निवेशकों की भागीदारी में भी वृद्धि देखी गई, जिन्होंने कुल निवेशों में 37% योगदान दिया, जबकि 2019 से 2022 तक यह औसतन 19% था. विदेशी संस्थागत निवेशकों ने 63% हिस्सेदारी के साथ प्रमुख योगदान दिया.

REITs और क्यूआईपी में वृद्धि

भारत में रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स (REITs) की गतिविधियों में भारी बढ़ोतरी हुई है, जिनका निवेश 2024 में $800 मिलियन तक पहुँच गया, जो 2023 के स्तर से तीन गुना अधिक है. क्यूआईपी (Qualified Institutional Placements) ने $2.7 बिलियन जुटाए, जो इस क्षेत्र के लिए मजबूत निवेशक विश्वास को दर्शाता है.

ग्लोबल निवेशकों की बदलती प्राथमिकताएँ

2024 में अमेरिका से निवेश में पुनरुद्धार हुआ और यह कुल निवेश का 26% रहा. निवेशकों का ध्यान अब उच्च जोखिम वाले गैर-कोर एसेट्स की ओर भी बढ़ रहा है, जो अब कुल लेन-देन का 77% बनते हैं, जो पिछले साल 53% था.

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