Bharat Express DD Free Dish
Kanya Sumangla Mission Shakti Digital
Kanya Sumangla Mission Shakti Digital

भारत के कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य निर्यात में 13% वृद्धि, चावल के निर्यात में 21% की तेज बढ़त

अप्रैल-फरवरी अवधि में भारत के कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के निर्यात में 13% की वृद्धि हुई, जिसमें चावल निर्यात 21% बढ़कर 11 अरब डॉलर पहुंच गया. निर्यात प्रतिबंध हटने और वैश्विक मांग बढ़ने से वित्त वर्ष 2024-25 में चावल निर्यात 12 अरब डॉलर तक पहुंचने की संभावना है.

Agri & processed food exports

भारत के कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के निर्यात में अप्रैल-फरवरी की अवधि के दौरान वर्ष-दर-वर्ष 13% से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई, जो मुख्य रूप से चावल के निर्यात में 21% की तेज वृद्धि के कारण हुई. इस अवधि में कुल निर्यात बढ़कर 22.67 अरब डॉलर तक पहुंच गया.

डायरेक्टरेट जनरल ऑफ़ कॉमर्शियल इंटेलिजेंस एंड स्टैटिस्टिक्स (DGCIS) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, बासमती और गैर-बासमती दोनों तरह के चावल के निर्यात में 21% की वृद्धि हुई है. यह आंकड़ा 11 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जबकि पिछले वर्ष की समान अवधि में यह 9.32 अरब डॉलर था.

सितंबर 2024 में सरकार ने चावल उत्पादन में भारी वृद्धि और उच्च भंडार को ध्यान में रखते हुए निर्यात पर लगाए गए प्रतिबंधों में ढील देना शुरू किया. इसके बाद, सरकार ने न्यूनतम निर्यात मूल्य (MEP) सहित सभी निर्यात प्रतिबंधों को हटा दिया है.

वित्त वर्ष 2024-25 में 15% वृद्धि की संभावना

निर्यातकों का कहना है कि वित्त वर्ष 2024-25 में चावल के निर्यात में 15% की वृद्धि हो सकती है, जिससे यह 12 अरब डॉलर का नया रिकॉर्ड बना सकता है. वैश्विक स्तर पर मजबूत मांग इसकी मुख्य वजह बताई जा रही है. वित्त वर्ष 2023-24 में भारत ने 10.41 अरब डॉलर मूल्य का चावल निर्यात किया था, जो वर्ष-दर-वर्ष 6.5% की गिरावट थी. उस दौरान घरेलू आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सरकार द्वारा लगाए गए निर्यात प्रतिबंधों के कारण निर्यात प्रभावित हुआ था.

व्यापार से जुड़े सूत्रों के अनुसार, अफ्रीका और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में बढ़ती मांग के कारण भारत की वैश्विक चावल व्यापार में वर्चस्व फिर से स्थापित हो सकता है. भारत पिछले एक दशक से दुनिया में सबसे बड़ा चावल निर्यातक बना हुआ है.

पंजाब स्थित प्रमुख बासमती चावल निर्यातक कंपनी जोसन ग्रेन्स के प्रबंध निदेशक रंजीत सिंह जोसन ने फाइनेंशियल एक्सप्रेस को बताया, “वर्तमान वित्त वर्ष में बासमती चावल के लिए 5 मिलियन टन का निर्यात लक्ष्य रखा गया है. इस लक्ष्य को पूरा करने के साथ ही भारत अपने निकटतम प्रतिस्पर्धी पाकिस्तान से कहीं आगे निकल गया है, जो सालाना एक मिलियन टन से कम का निर्यात करता है.”

भैंस के मांस, डेयरी और पोल्ट्री निर्यात में 12% वृद्धि

निर्यातकों के अनुसार, ईरान को किए जाने वाले चावल निर्यात में भुगतान निपटान संबंधी चुनौतियों के बावजूद, बासमती चावल की वैश्विक मांग मजबूत बनी हुई है. इसी अवधि में भैंस के मांस, डेयरी और पोल्ट्री उत्पादों के निर्यात में भी करीब 12% की वृद्धि दर्ज की गई, जो वित्त वर्ष 2023-24 के 4.11 अरब डॉलर से बढ़कर वित्त वर्ष 2024-25 में 4.61 अरब डॉलर तक पहुंच गया.

अधिकारियों के अनुसार, पिछले एक दशक में भारतीय भैंस के मांस की गुणवत्ता और पोषण मूल्य के कारण इसकी वैश्विक मांग में लगातार वृद्धि हुई है. ताजा फल और सब्जियों के निर्यात में भी वृद्धि देखी गई है. वित्त वर्ष 2024-25 के पहले 11 महीनों में यह 5% से अधिक बढ़कर 3.39 अरब डॉलर हो गया, जबकि अनाज आधारित उत्पादों का निर्यात 9% से अधिक बढ़कर 2.82 अरब डॉलर तक पहुंच गया.

कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) ने वित्त वर्ष 2024-25 के लिए 26.56 अरब डॉलर के निर्यात लक्ष्य की घोषणा की है. कुल कृषि उत्पाद निर्यात में APEDA के उत्पादों की हिस्सेदारी लगभग 51% है. बाकी कृषि उत्पादों के निर्यात में समुद्री खाद्य पदार्थ, तंबाकू, कॉफी और चाय शामिल हैं.

-भारत एक्सप्रेस 



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read


Kanya Sumangla Mission Shakti Digital