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Digital Payments: भारत में डिजिटल भुगतान में शानदार बढ़त, लेनदेन की मात्रा में 34.8% की वृद्धि

FY25 में डिजिटल भुगतान में 34.8% की उछाल, UPI की हिस्सेदारी लगभग 84% हुई. लेनदेन मूल्य ₹2,862 लाख करोड़, रिटेल लेनदेन 2,222.9 करोड़. RBI की AI और e-Kuber 3.0 योजनाएं वित्तीय समावेशन को बढ़ाएंगी.

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Vijay Ram Edited by Vijay Ram

भारत के डिजिटल भुगतान क्षेत्र में वित्त वर्ष 2024-25 में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जिसमें लेनदेन की मात्रा में 34.8% की साल-दर-साल वृद्धि हुई. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की नवीनतम वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, यह वृद्धि पिछले वर्ष की 44% वृद्धि की गति को दर्शाती है.

द स्टेट्समैन की रिपोर्ट के मुताबिक, डिजिटल लेनदेन का कुल मूल्य ₹2,862 लाख करोड़ तक पहुंच गया, जो पिछले वित्त वर्ष के ₹2,428.2 लाख करोड़ से 17.3% अधिक है. रियल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट (RTGS) लेनदेन ने इस वृद्धि में प्रमुख भूमिका निभाई.

रिटेल डिजिटल भुगतान अब गैर-नकद रिटेल लेनदेन का 99.9% हिस्सा हैं, जो पिछले वर्ष के 99.8% से थोड़ा अधिक है. कुल रिटेल डिजिटल लेनदेन 2,222.9 करोड़ तक पहुंच गए, जिनका मूल्य ₹919.3 लाख करोड़ रहा. यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) ने रिटेल सेगमेंट में 84% हिस्सेदारी के साथ प्रभुत्व बनाए रखा, जिसमें लेनदेन की मात्रा में 41.7% और मूल्य में 30.3% की वृद्धि हुई.

पेमेंट्स इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड (PIDF) ने ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल भुगतान को बढ़ावा दिया, जिसके परिणामस्वरूप पॉइंट-ऑफ-सेल (PoS) टर्मिनल 24.7% बढ़कर 1.1 करोड़ और UPI QR कोड 91.5% बढ़कर 65.8 करोड़ हो गए.

RBI ने 26 ऑनलाइन पेमेंट एग्रीगेटर्स, 6 क्रॉस-बॉर्डर PAs, और 11 गैर-बैंक प्रीपेड पेमेंट इंस्ट्रूमेंट्स को मंजूरी दी. क्रेडिट कार्ड लेनदेन में 34% की वृद्धि हुई, जबकि डेबिट कार्ड लेनदेन में 16.1 करोड़ तक की कमी आई.

RBI ने भविष्य में AI गवर्नेंस, e-Kuber 3.0, और क्लाउड इन्फ्रास्ट्रक्चर पर ध्यान केंद्रित करने की योजना बनाई है. यह डिजिटल इंडिया और वित्तीय समावेशन की दिशा में भारत की प्रगति को दर्शाता है.



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