तेल मंत्रालय ने शुक्रवार (7 फरवरी) जनवरी में भारत में ईंधन की खपत के आंकड़े जारी किए. मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, जनवरी में भारत में ईंधन की खपत अक्टूबर के बाद से अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई, लेकिन यह पिछले साल की तुलना में 3.2 प्रतिशत बढ़कर 20.49 मिलियन मीट्रिक टन हो गई.
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता और आयातक है. यह डेटा देश की तेल मांग का एक प्रॉक्सी है. जैसा कि पेट्रोलियम नियोजन और विश्लेषण सेल (PPAC) की वेबसाइट से पता चलता है, मासिक आधार पर, जनवरी में ईंधन की मांग अक्टूबर के बाद से सबसे कम रही, जो दिसंबर में 20.73 मिलियन टन से 1 प्रतिशत से अधिक कम है.
पेट्रोल की बिक्री घटकर 3.3 मिलियन टन पहुंची
वहीं गैसोलिन या पेट्रोल की बिक्री पिछले महीने की तुलना में 0.3 प्रतिशत घटकर 3.3 मिलियन टन रह गई. जनवरी में डीजल की खपत महीने-दर-महीने लगभग 4 प्रतिशत घटकर 7.7 मिलियन टन रह गई. यह साल-दर-साल 4.3 प्रतिशत अधिक थी. रसोई गैस या तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (LPG) की बिक्री वार्षिक आधार पर 5.2 प्रतिशत बढ़कर 2.84 मिलियन टन हो गई, जबकि नेफ्था की बिक्री पिछले वर्ष की तुलना में 12.2 प्रतिशत घटकर 1.15 मिलियन टन रह गई.
इसके अलावा मासिक आधार पर LPG और नेफ्था की बिक्री में क्रमशः 2.16 प्रतिशत और 7.48 प्रतिशत की वृद्धि हुई.
5 सालों में पहली बार ब्याज दर में कटौती
वित्त मंत्रालय की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक जोखिमों के कारण भारत की सुस्त आर्थिक वृद्धि अगले वित्त वर्ष में भी जारी रहने की संभावना है. राज्यों से व्यापार सुधारों का आह्वान किया गया है. RBI ने शुक्रवार को लगभग पांच वर्षों में पहली बार अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के उद्देश्य से अपनी प्रमुख ब्याज दर में कटौती की. ताकि मुद्रास्फीति को अपने 4 प्रतिशत के लक्ष्य पर रख सके.
भारत ने इस महीने अपने वार्षिक बजट में व्यक्तिगत कर दरों में भी कटौती की, क्योंकि दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था संभावित नए टैरिफ अवरोधों के कारण वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के मद्देनजर घरेलू मांग को बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर रही है.
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-भारत एक्सप्रेस
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