India Maritime Week 2025: नई दिल्ली में बुधवार को पोर्ट्स, शिपिंग और वाटरवेज मंत्रालय (MoPSW) की ओर से आयोजित Ambassadors Roundtable Meet में भारत ने अपने समुद्री क्षेत्र के लिए बड़े विज़न का खाका पेश किया. इस बैठक में 28 देशों के राजदूतों के साथ वरिष्ठ अधिकारी, इंडस्ट्री के दिग्गज और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे. यह चर्चा अक्टूबर 27 से 31 के बीच मुंबई में होने वाले इंडिया मैरिटाइम वीक (IMW) 2025 से पहले सहयोग की संभावनाओं को लेकर हुई है.
बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय पोर्ट्स, शिपिंग और वाटरवेज मंत्री सरबानंद सोनोवाल ने की. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विज़न के तहत भारत का समुद्री सफर अब एक नए दौर में प्रवेश कर रहा है. सरकार ने आने वाले वर्षों के लिए 1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश रोडमैप तैयार किया है, जो भारत को वैश्विक समुद्री व्यापार, सतत शिपिंग और ब्लू इकॉनमी (Blue Economy) का बड़ा केंद्र बना सकता है.
‘समुद्री क्षेत्र में खुल रहे निवेश के द्वार’
सोनोवाल ने कहा, ‘Maritime India Vision 2030 और Maritime Amrit Kaal Vision 2047 जैसे कदमों ने भारत के पोर्ट्स, शिपिंग और लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम को और अधिक मजबूत, आधुनिक और भविष्य-तैयार बना दिया है. यह बदलाव अंतरराष्ट्रीय सहयोग और निवेश के लिए बड़े अवसर लेकर आया है.’
उन्होंने आगे बताया कि इस 1 ट्रिलियन डॉलर के निवेश रोडमैप के तहत पोर्ट और कार्गो टर्मिनल डेवलपमेंट, मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी, शिपबिल्डिंग, शिप रिपेयरिंग और शिप रीसाइक्लिंग जैसे क्षेत्रों में संयुक्त उपक्रम (Joint Ventures) की अपार संभावनाएं हैं. इसके अलावा ग्रीन हाइड्रोजन हब्स, LNG बंकरिंग और सस्टेनेबल शिपिंग सॉल्यूशंस पर भी खास जोर दिया जा रहा है.
बड़े प्रोजेक्ट्स पर अंतरराष्ट्रीय नज़र
बैठक में मंत्रालय के संयुक्त सचिव आर. लक्ष्मणन ने सेक्टोरल प्रेजेंटेशन दिया. इसमें वधावन पोर्ट, गलथिया बे ट्रांसशिपमेंट पोर्ट और टुना टेकरा टर्मिनल जैसे मेगा प्रोजेक्ट्स पर निवेश की संभावनाओं को रेखांकित किया गया. साथ ही ग्रीन हाइड्रोजन हब्स, LNG बंकरिंग, शिपबिल्डिंग और मैरिटाइम इंडस्ट्रियल पार्क्स पर भी विस्तार से चर्चा हुई.
डिजिटल और ग्रीन शिपिंग पर फोकस
बैठक में प्रतिभागियों ने इस बात पर जोर दिया कि भारत को डिजिटल मैरिटाइम लॉजिस्टिक्स पर तेजी से काम करना होगा ताकि पारदर्शिता और कार्यकुशलता दोनों बढ़ें. इसके साथ ही ग्रीन शिपिंग को प्रोत्साहित करने के लिए हाइड्रोजन-पावर्ड और लो-इमीशन वेसल्स अपनाने की जरूरत बताई गई. मैरिटाइम फाइनेंसिंग को बढ़ावा देने में IFSC-गिफ्ट सिटी की अहमियत भी रेखांकित की गई, जिसे वैश्विक निवेश आकर्षित करने और इनोवेशन को बढ़ावा देने का मजबूत साधन माना जा रहा है.
विदेशी प्रतिनिधियों ने केंद्र सरकार के हालिया सुधारों का स्वागत किया. इनमें पांच नए कानून— Bills of Lading Act, Carriage of Goods by Sea Act, Merchant Shipping Act, Coastal Shipping Act और Indian Ports Act शामिल हैं, जो पुराने औपनिवेशिक दौर के कानूनों को हटाकर भारत के समुद्री क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाते हैं.
‘IMW 2025 बनेगा साझेदारी का मंच’
सोनोवाल ने कहा, ‘इंडिया मैरिटाइम वीक 2025 ऐसा मंच बनेगा जहां विचारों को प्रोजेक्ट्स में और वादों को साझेदारी में बदला जाएगा. भारत तैयार है, मिलकर काम करने और वैश्विक समुद्री भविष्य को समृद्ध, टिकाऊ और सर्वसमावेशी बनाने के लिए.’
बैठक में निकले सुझावों और चर्चाओं को सीधे IMW 2025 के एजेंडे में शामिल किया जाएगा, ताकि यह द्विवार्षिक कार्यक्रम वैश्विक हितधारकों की प्राथमिकताओं को सही मायनों में संबोधित कर सके.
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-भारत एक्सप्रेस
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