पीएम सूर्य घर योजना
नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की ओर से गुरुवार को जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, दुनिया की सबसे बड़ी घरेलू रूफटॉप सौर पहल, पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना (पीएमएसजीएमबीवाई) ने ऐतिहासिक मील का पत्थर पार कर लिया है, जिसके तहत 10 मार्च तक 10 लाख घरों को सौर ऊर्जा से ऊर्जा मिल चुकी है. 13 फरवरी, 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई यह योजना भारत के ऊर्जा परिदृश्य को बदल रही है. 47.3 लाख आवेदन प्राप्त होने के साथ, सरकार ने 6.13 लाख लाभार्थियों को 4,770 करोड़ रुपये की सब्सिडी वितरित की है, जिससे भारतीय घरों में सौर ऊर्जा अधिक सुलभ हो गई है.
इस योजना की एक प्रमुख विशेषता इसके आसान वित्तपोषण विकल्प हैं, जिसमें 12 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों द्वारा 6.75% सब्सिडी वाली ब्याज दर पर 2 लाख रुपये तक के जमानत-मुक्त ऋण शामिल हैं. अब तक 3.10 लाख ऋण आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 1.58 लाख स्वीकृत और 1.28 लाख वितरित किए गए हैं, जिससे वित्तीय समावेशन सुनिश्चित हुआ है. इस योजना में 15 दिनों की त्वरित सब्सिडी हस्तांतरण प्रक्रिया है और इसने कई परिवारों को शून्य बिजली बिल का आनंद लेने में सक्षम बनाया है.
चंडीगढ़ और दमन-दीव ने हासिल किया 100% टारगेट
कई राज्यों ने इस योजना को लागू करने में उल्लेखनीय प्रगति की है. चंडीगढ़ और दमन और दीव ने सरकारी इमारतों के लिए अपने रूफटॉप सोलर लक्ष्यों को 100% हासिल कर लिया है, जबकि राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात और तमिलनाडु ने स्थापना के आंकड़ों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है. सरकार का लक्ष्य 2026-27 तक 1 करोड़ सौर ऊर्जा संचालित घरों तक पहुंचना है, समय पर क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए सभी राज्यों में प्रगति की निगरानी करना है. शीर्ष प्रदर्शन करने वाले राज्यों में गुजरात सबसे आगे है, जहां 3,51,273 परिवारों को लाभ मिला है, जो कि कुल स्थापित योजनाओं का 41.47% है. केरल में 65,423 परिवार (7.73%) और उत्तर प्रदेश में 73,602 परिवार (8.69%) लाभान्वित हुए हैं.
मुख्य लाभ
पीएम सूर्य घर: मुफ़्त बिजली योजना कई लाभ प्रदान करती है. घरों को सब्सिडी वाले रूफटॉप सोलर पैनल के माध्यम से मुफ़्त बिजली मिलती है, जिससे उनकी ऊर्जा लागत में काफ़ी कमी आती है. सौर ऊर्जा को व्यापक रूप से अपनाने से सरकार को बिजली की लागत में सालाना 75,000 करोड़ रुपये की बचत होने का अनुमान है. सौर ऊर्जा संयंत्र कार्बन उत्सर्जन को भी कम करते हैं, जो भारत के कार्बन पदचिह्न को कम करने के लक्ष्य में योगदान देता है. प्रत्येक सौर ऊर्जा संयंत्र 100 पेड़ लगाने के बराबर कार्बन उत्सर्जन को कम करता है, जिससे भारत एक स्वच्छ और आत्मनिर्भर भविष्य की ओर अग्रसर होता है.
सब्सिडी विवरण
इस योजना के तहत सब्सिडी परिवार की औसत मासिक बिजली खपत पर निर्भर करती है. 0-150 यूनिट मासिक खपत वाले परिवारों के लिए, 1-2 किलोवाट के सौर संयंत्र उपयुक्त हैं, जिनकी सब्सिडी 30,000 रुपये से लेकर 60,000 रुपये तक है. 150-300 यूनिट खपत करने वाले परिवारों के लिए, 2-3 किलोवाट का संयंत्र उपयुक्त है, जिसकी सब्सिडी 60,000 रुपये से लेकर 78,000 रुपये तक है. 300 यूनिट से ज़्यादा खपत के लिए, 3 किलोवाट से ज़्यादा के सौर संयंत्रों के लिए ₹78,000 की सब्सिडी दी जाती है. परिवार राष्ट्रीय पोर्टल के ज़रिए आवेदन कर सकते हैं, जो विक्रेता चयन, सिस्टम आकार की जानकारी और बहुत कुछ में सहायता करता है. आवेदन जमा करने के 15 दिनों के भीतर सब्सिडी संसाधित की जाती है.
प्रभाव और भविष्य के लक्ष्य
इस योजना से 2027 तक आवासीय छतों पर स्थापित सौर ऊर्जा संयंत्रों के माध्यम से 30 गीगावाट सौर क्षमता जुड़ने की उम्मीद है, जिससे भारत के नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों को काफी बढ़ावा मिलेगा. इन प्रणालियों के 25 साल के जीवनकाल में, यह अनुमान है कि वे 1000 बिलियन यूनिट (बीयू) बिजली पैदा करेंगे जबकि CO2 उत्सर्जन में 720 मिलियन टन की कमी आएगी. इसके अलावा, इस योजना से 17 लाख प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने का अनुमान है, जो सरकार की आत्मनिर्भर भारत पहल का समर्थन करता है. घरेलू स्तर पर उत्पादित सौर मॉड्यूल और सेल के उपयोग को अनिवार्य करके, यह योजना भारत के नवीकरणीय ऊर्जा पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करती है.
आदर्श सौर गांव
इस योजना का एक अनूठा घटक “मॉडल सोलर विलेज” का निर्माण है, जिसमें प्रत्येक जिले से एक गांव का चयन किया जाता है ताकि सौर ऊर्जा अपनाने और ऊर्जा आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने का प्रदर्शन किया जा सके. प्रत्येक चयनित गांव को 1 करोड़ रुपये आवंटित करने के साथ, इस पहल का उद्देश्य पूरे भारत में सौर ऊर्जा के उपयोग के लिए एक बेंचमार्क स्थापित करना है.
-भारत एक्सप्रेस
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