India Japan Summit
India Japan Trade: जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची (Sanae Takaichi) का तीन दिवसीय भारत दौरा दोनों देशों के आर्थिक और रणनीतिक रिश्तों को नई ऊंचाई देने वाला माना जा रहा है. इस दौरे का सबसे बड़ा फोकस निवेश, व्यापार, सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मैन्युफैक्चरिंग सहयोग को मजबूत करना है. राष्ट्रपति भवन में औपचारिक स्वागत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) के साथ हैदराबाद हाउस में उनकी द्विपक्षीय वार्ता होगी, जहां कई अहम आर्थिक और रणनीतिक मुद्दों पर चर्चा होगी.
16वां भारत-जापान शिखर सम्मेलन
इस दौरे का प्रमुख आकर्षण 16वां भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन होगा, जिसमें दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के साथ जापान के 150 से अधिक उद्योगपति भी शामिल होंगे. इससे साफ संकेत मिलता है कि जापान भारत को अपनी दीर्घकालिक निवेश रणनीति का महत्वपूर्ण केंद्र मान रहा है.
बैठक में रक्षा और समुद्री सुरक्षा के साथ-साथ आर्थिक सुरक्षा, फार्मास्यूटिकल्स, सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे भविष्य के उद्योगों में सहयोग बढ़ाने पर विशेष जोर रहेगा. दोनों देश वैश्विक सप्लाई चेन को अधिक मजबूत और भरोसेमंद बनाने के लिए नई साझेदारियों पर भी विचार करेंगे.
61 अरब डॉलर होगा निवेश
भारत और जापान के आर्थिक संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं. जापान इस समय भारत में निवेश करने वाला पांचवां सबसे बड़ा देश है, जबकि भारत जापानी कंपनियों के लिए सबसे भरोसेमंद और तेजी से उभरते निवेश गंतव्यों में शामिल हो चुका है. वित्त वर्ष 2025-26 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 27.5 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है.
जापान ने अगले दस वर्षों में भारत में 61 अरब डॉलर से अधिक निवेश का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है. यह निवेश मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर, हाई-टेक इंडस्ट्री, ग्रीन एनर्जी और डिजिटल टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में नई संभावनाएं पैदा करेगा.
1400 जापानी कंपनी भारत में
वर्तमान में भारत में करीब 1,400 जापानी कंपनियां काम कर रही हैं, जिनमें लगभग आधी मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर से जुड़ी हैं. इनमें से 75 प्रतिशत से अधिक कंपनियां मुनाफे में हैं, जो भारतीय बाजार की बढ़ती क्षमता और निवेश के अनुकूल माहौल को दर्शाता है. मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड बुलेट ट्रेन परियोजना सहित कई बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में जापान की महत्वपूर्ण भागीदारी पहले से ही है.
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विशेषज्ञों का मानना है कि सनाए ताकाइची का यह दौरा केवल कूटनीतिक औपचारिकता नहीं, बल्कि भारत-जापान आर्थिक साझेदारी को अगले चरण में ले जाने की दिशा में एक अहम कदम साबित हो सकता है. यदि प्रस्तावित निवेश और औद्योगिक सहयोग को गति मिलती है, तो इससे भारत के मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम, रोजगार सृजन और वैश्विक सप्लाई चेन में उसकी भूमिका और मजबूत होगी.
-भारत एक्सप्रेस
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