NSE IPO News: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के बहुप्रतीक्षित IPO की राह में एक नई कानूनी अड़चन सामने आ गई है. करीब 10 साल के लंबे इंतजार के बाद जहां NSE की लिस्टिंग की प्रक्रिया आगे बढ़ती दिख रही है, वहीं बॉम्बे हाईकोर्ट में लंबित एक याचिका ने इस पर सवाल खड़े कर दिए हैं. याचिकाकर्ता ने IPO प्रक्रिया पर रोक लगाने के साथ-साथ NSE की शेयरहोल्डिंग और अंतिम लाभकारी मालिकों से जुड़ी अधिक जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है.
IPO पर रोक लगाने की मांग
एनएसई ने अपने ड्राफ्ट दस्तावेज में बताया है कि बॉम्बे हाईकोर्ट में दायर एक याचिका में सेबी को लंबित शिकायत पर फैसला लेने का निर्देश देने की मांग की गई है. साथ ही याचिकाकर्ता चाहता है कि एनएसई अपने प्रमोटर समूह, प्रमुख शेयरधारकों और अंतिम लाभकारी मालिकों (Ultimate Beneficial Owners) से जुड़ी जानकारी और केवाईसी दस्तावेज सार्वजनिक करे. याचिका में अंतिम फैसला आने तक आईपीओ प्रक्रिया रोकने की भी मांग की गई है.
एनएसई ने दावों को बताया कमजोर
NSE का कहना है कि याचिका में लगाए गए आरोप तथ्यों पर आधारित नहीं हैं और वह अपने पक्ष को मजबूत करने के लिए सभी जरूरी कानूनी कदम उठा रहा है.
विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी पर सवाल
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, याचिकाकर्ता ने एनएसई में निवेश करने वाले कुछ निवेशकों के लाभकारी स्वामित्व को लेकर सवाल उठाए हैं. साथ ही एक्सचेंज में विदेशी हिस्सेदारी की जांच कराने की मांग भी की गई है. इस मामले की पहली सुनवाई 17 जून को हुई थी. अब बॉम्बे हाईकोर्ट में इसकी अगली सुनवाई 24 जून को होने वाली है.
आईपीओ दस्तावेज में बताए गए दूसरे जोखिम
एनएसई ने अपने ड्राफ्ट पेपर्स में यह भी कहा है कि यदि वह अपने ट्रेडमार्क, तकनीक और व्यावसायिक गोपनीयताओं की पर्याप्त सुरक्षा नहीं कर पाया, तो इससे कारोबार, ब्रांड वैल्यू और बाजार में उसकी प्रतिस्पर्धी स्थिति प्रभावित हो सकती है.
एक्सचेंज के कुछ ट्रेडमार्क अभी पंजीकरण की प्रक्रिया में हैं. ऐसे में उनके दुरुपयोग या किसी अन्य पक्ष द्वारा इस्तेमाल किए जाने का खतरा बना हुआ है. इसके अलावा, कंपनी की कुछ इन-हाउस विकसित तकनीकें पेटेंट सुरक्षा के दायरे में नहीं हैं, जिससे प्रतिस्पर्धियों द्वारा उनकी नकल किए जाने की आशंका रहती है. एनएसई ने अपने नाम और ब्रांड का गलत इस्तेमाल करने वाले फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट्स और भ्रामक सामग्री फैलाने वाले लोगों के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया था. अप्रैल 2026 में अदालत ने अंतरिम राहत देते हुए ऐसे लोगों को एनएसई के नाम या उससे मिलते-जुलते चिन्हों के उपयोग से रोकने का आदेश दिया था.
कैसा रहा 10 साल का सफर
एनएसई के आईपीओ का सफर काफी लंबा और उतार-चढ़ाव भरा रहा है. एक्सचेंज ने पहली बार 2016 में शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने की तैयारी शुरू की थी, लेकिन नियामकीय जांच, कानूनी चुनौतियों और को-लोकेशन मामले से जुड़े विवादों के चलते यह योजना बार-बार टलती रही.
दिलचस्प बात यह है कि इसी दौरान बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) 2017 में ही शेयर बाजार में सूचीबद्ध हो गया था. अब करीब एक दशक बाद एनएसई ने एक बार फिर सेबी के पास ड्राफ्ट पेपर दाखिल किए हैं, जिससे उसके आईपीओ का रास्ता खुलता नजर आ रहा है. लेकिन बॉम्बे हाईकोर्ट में लंबित याचिका चलते NSE की तकलीफें बढ़ सकती है.
-भारत एक्सप्रेस
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