PHDCCI Post Budget Session: बुधवार 4 फरवरी 2026 को नई दिल्ली के पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (PHDCCI) में केंद्रीय बजट 2026-27 पर पोस्ट-बजट सत्र का आयोजन किया गया. इस कार्यक्रम में सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, अर्थशास्त्री और उद्योग जगत से जुड़े दिग्गजों ने बजट के सुधार एजेंडे, वित्तीय दिशा और इसके कारोबारी व आर्थिक असर पर खुलकर विचार रखे.
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वित्त मंत्रालय के राजस्व सचिव अरविंद श्रीवास्तव ने कहा कि बजट 2026–27 के जरिए देश की टैक्स व्यवस्था में बुनियादी बदलाव किए गए हैं. उन्होंने कहा कि सरकार का फोकस टैक्सपेयर्स को सशक्त बनाने और अनावश्यक प्रक्रियाओं को कम करने पर है.
श्रीवास्तव के मुताबिक, रिटर्न संशोधन की समय-सीमा बढ़ाना, जांच के दौरान भी रिटर्न अपडेट करने की सुविधा और आकलन व पेनल्टी को एक साथ जारी करने जैसे कदम टैक्स विवादों को काफी हद तक कम करेंगे. उन्होंने बताया कि टैक्स सिस्टम को अब लेन-देन आधारित जांच से हटाकर भरोसे पर आधारित अनुपालन की ओर ले जाया जा रहा है, जिसमें डिजिटल और जोखिम आधारित निगरानी अहम भूमिका निभाएगी.

तेज सुधार प्रक्रिया को बढ़ाता है बजट
मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. वी. अनंत नागेश्वरन ने कहा कि यह बजट 2025 से शुरू हुई तेज सुधार प्रक्रिया को आगे बढ़ाता है और आर्थिक सर्वे के अनुरूप है. उन्होंने शहरों को आर्थिक इंजन के रूप में विकसित करने, MSME सेक्टर को क्रेडिट गारंटी और मैन्युफैक्चरिंग फंड के जरिए मजबूत करने पर जोर दिया.
उन्होंने कहा कि ₹12.2 लाख करोड़ का रिकॉर्ड इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश और वित्तीय घाटे पर नियंत्रण से अर्थव्यवस्था को स्थिर और टिकाऊ विकास का आधार मिलेगा.

PHDCCI के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट अनिल गुप्ता ने कहा कि बजट ऐसे समय में आया है जब भारतीय अर्थव्यवस्था निर्णायक मोड़ पर है. उन्होंने इसे सरकार की वित्तीय अनुशासन, तेज विकास और ‘विकसित भारत’ के विजन के प्रति प्रतिबद्धता का प्रमाण बताया. उन्होंने SME ग्रोथ फंड, पुराने औद्योगिक क्लस्टरों के पुनर्जीवन और रोजगार बढ़ाने वाली योजनाओं को उद्योग के लिए सकारात्मक बताया.
बजट में उद्योग के कई सुझावों को दी गई जगह
डायरेक्ट टैक्स कमेटी के चेयरमैन मुकुल बगला ने कहा कि बजट में उद्योग के कई सुझावों को जगह दी गई है. TCS दरों में कटौती, रिटर्न संशोधन की समय-सीमा बढ़ाने और पेनल्टी व्यवस्था को सरल बनाने से टैक्स सिस्टम में भरोसा बढ़ेगा. हालांकि उन्होंने व्यक्तिगत आयकर की ऊंची दरों और लंबित अपीलों के निपटारे में देरी पर चिंता भी जताई.

इनडायरेक्ट टैक्स कमेटी के चेयरमैन अशोक बत्रा ने कहा कि GST और कस्टम्स से जुड़े प्रस्तावों से लंबे समय से चली आ रही कई व्यावहारिक दिक्कतों का समाधान होगा. इससे GST विवाद घटेंगे और निर्यातकों को बड़ी राहत मिलेगी.
BFSI कमेटी के चेयरमैन गुरमीत चड्ढा ने कहा कि बजट में सरकारी उधारी का बड़ा हिस्सा पूंजीगत खर्च के लिए रखा गया है, जो इंफ्रास्ट्रक्चर आधारित विकास की साफ तस्वीर पेश करता है. उन्होंने भारत की मजबूत मैक्रो इकोनॉमिक स्थिति और व्यापार समझौतों को निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत बताया.
टैक्स सिस्टम को बनाया गया सरल
डायरेक्ट टैक्स कमेटी की को-चेयर पल्लवी दिनोदिया ने कहा कि बजट 2026 टैक्स सिस्टम को सरल और भरोसे पर आधारित बनाने की दिशा में बड़ा कदम है. उन्होंने 1 अप्रैल 2026 से नए इनकम टैक्स कानून के लागू होने और विदेशी संपत्तियों के खुलासे के लिए एकमुश्त राहत योजना का स्वागत किया.

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PHDCCI के CEO और सेक्रेटरी जनरल डॉ. रंजीत मेहता ने कहा कि बजट महीनों की तैयारी, डेटा विश्लेषण और सरकार-उद्योग के निरंतर संवाद का नतीजा है. उन्होंने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और उनकी टीम की सराहना करते हुए कहा कि अब सबसे बड़ी चुनौती नीतियों को ज़मीन पर प्रभावी तरीके से लागू करने की है.
इस मौके पर PHDCCI ने बजट 2026–27 पर अपनी एक विश्लेषणात्मक रिपोर्ट भी जारी की. चर्चा के दौरान इस बात पर सहमति दिखी कि बजट के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए सरकार और उद्योग के बीच सहयोग लगातार बना रहना जरूरी है.
-भारत एक्सप्रेस
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