प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार द्वारा किए गए दूरगामी GST (वस्तु एवं सेवा कर) सुधारों के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था में उपभोग (कंजम्पशन) को अभूतपूर्व बढ़ावा मिला है. इंडस्ट्री लीडर्स और विशेषज्ञों ने भी इन सुधारों की सराहना की है.
GST दरों के सरलीकरण और विशेष रूप से घरेलू आवश्यक वस्तुओं, दोपहिया वाहनों, छोटी कारों और इलेक्ट्रॉनिक्स पर करों में कमी ने आम उपभोक्ताओं को बड़ी राहत दी है. इन कदमों से कीमतों में कमी आई है, जिससे लोगों की क्रय शक्ति बढ़ी है. एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, इन सुधारों के चलते इस साल खपत में 10% से अधिक की वृद्धि होने की पूरी संभावना है, जिससे अर्थव्यवस्था में लगभग 20 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त खपत जुड़ सकती है.
तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर भारत
सरकारी नीतियों और निरंतर सुधारों के कारण भारत का आर्थिक विकास ऊंचे शिखर पर बना हुआ है. पीएम ई-ड्राइव योजना जैसी पहल इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा दे रही है, जिसे सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता माना जा रहा है. वैश्विक भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच भी, भारतीय अर्थव्यवस्था लचीलापन प्रदर्शित कर रही है, जिसकी वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 2025-26 की पहली तिमाही में 7.8% रहने का अनुमान है. डीकिन यूनिवर्सिटी की सीईओ रवनीत पाहवा सहित कई इंडस्ट्री लीडर्स ने यह विश्वास व्यक्त किया है कि भारत जल्द ही दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा. अनुमान है कि यह लक्ष्य 2030 तक, या कुछ विशेषज्ञों के अनुसार दो से ढाई वर्षों में भी, हासिल हो सकता है. यह उच्च विकास दर, कम महंगाई दर के साथ मिलकर, देश के लिए एक ऐसा “नुस्खा” है जो बड़ी संख्या में लोगों को गरीबी से बाहर निकालने और वैश्विक मंच पर भारत को मजबूत करने का काम करेगा.
एआई में स्वदेशी दृष्टिकोण और भविष्य की संभावनाएं
अल्फाजियो के संस्थापक और सीईओ पराग खन्ना ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के लिए भारत के स्वदेशी और ओपन-सोर्स दृष्टिकोण की प्रशंसा की. उन्होंने कहा कि भारत का यह दृष्टिकोण अमेरिकी या चीनी मॉडल से अलग और महत्वपूर्ण है, जिसमें पारदर्शिता और खुले डेटा पर ज़ोर दिया गया है. यह उम्मीद की जा रही है कि भारत न केवल एआई मॉडल के विकास में बल्कि जनहित में इसके परिनियोजन में भी विश्व में अग्रणी बन सकता है.
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